आर्मी वाइव्स ग्रुप चीता और चेतक के बेड़े को ‘उड़ते ताबूत’ करार देते हुए इन्हें बदलने की मांग कर रहा है. रक्षा मंत्रालय ने नवंबर 2021 में एचएएल से 12 एलयूएच की खरीद को मंजूरी दे दी थी, लेकिन अब ऑर्डर देने पर कदम पीछे खींचे जा रहे हैं.
दोनों देशों के बीच हुए करीब 2,000 करोड़ रुपये के करार पर इस महीने की शुरुआत में हस्ताक्षर किए गए थे. आर्मेनिया की आवश्यकता के अनुसार उसे तेजी के साथ इन साजोसामान की आपूर्ति करनी है.
रक्षा प्रतिष्ठान का मानना है कि चूंकि एलएसी सक्रिय सैन्य गतिविधियों वाली सीमा है, इसलिए आईटीबीपी को उसके अधीन लाया जाना चाहिए. लेकिन इससे इतर राय रखने वाला एमएचए ‘एक बॉर्डर, एक फोर्स’ पर जोर दे रहा है.
1954 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है जब उग्रवाद से निपटने के लिए इस क्षेत्र में एक पूरी ब्रिगेड की तैनाती नहीं की गई. उग्रवादी संगठनों के साथ शांति समझौतों के कारण भी यहां हिंसा में कमी आई है.