Thursday, 8 December, 2022
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अजरबैजान के साथ बढ़ते तनाव के बीच आर्मेनिया ने किया भारत से पिनाका रॉकेट और गोला-बारूद खरीदने का करार

दोनों देशों के बीच हुए करीब 2,000 करोड़ रुपये के करार पर इस महीने की शुरुआत में हस्ताक्षर किए गए थे. आर्मेनिया की आवश्यकता के अनुसार उसे तेजी के साथ इन साजोसामान की आपूर्ति करनी है.

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नई दिल्ली: तुर्की और पाकिस्तान के करीबी माने जाने वाले अजरबैजान के साथ बढ़ते तनाव के बीच आर्मेनिया ने स्वदेशी (भारत निर्मित) पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर, अज्ञात संख्या में मिसाइलों और अन्य गोला-बारूद की खरीद के लिए भारत के साथ एक करार पर हस्ताक्षर किए हैं.

बुधवार को, आर्मेनिया और अजरबैजान ने एक-दूसरे पर संघर्ष विराम समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया थे और इसने इस महीने चले दो दिनों के संघर्ष को समाप्त कर दिया था .

रक्षा और सुरक्षा प्रतिष्ठान के सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की कि करीब 2,000 करोड़ रुपए के गवर्नमेंट- टू-गवर्नमेंट कॉन्ट्रैक्ट पर इस महीने की शुरुआत में हस्ताक्षर किए गए थे. आर्मेनिया की आवश्यकता के अनुसार उसे तेजी के साथ से इन साजोसामान की आपूर्ति की जानी है.

हालांकि निर्यात किए जाने वाले हथियारों की सटीक संख्या की जानकारी अभी तक नहींं मिल पाई है पर इस इस क्रय आदेश में स्वदेशी पिनाका प्रणाली, गोला-बारूद और टैंक रोधी रॉकेट शामिल हैं.

यह इस शास्त्र प्रणाली, जिसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित किया गया था, के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिला पहला ऑर्डर है. यह मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर पहले से ही भारतीय सेना की सेवा में है और इसे चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर तैनात किया गया है.

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रक्षा मामलों से जुड़े सूत्र गवर्नमेंट- टू-गवर्नमेंट कॉन्ट्रैक्ट की सटीक प्रकृति के बारे में चुप्पी साधे हुए है, लेकिन उन्होंने इस ओर इशारा किया कि आर्मेनिया ने अतीत में भी भारतीय रक्षा सामग्री खरीदी है.

सोवियत संघ के अंग रहे इस गणराज्य ने साल 2020 में भारत से रडार का पता लगाने वाले चार स्वदेशी स्वाति रडार प्रणाली (स्वाति वेपन लोकेटिंग राडार) खरीदे थे, जिसे उसे अजरबैजान के साथ उसके संघर्ष की पृष्ठभूमि में सुपुर्द किया गया था.


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 अज़रबैजान-तुर्की-पाकिस्तान धुरी

कई लोग अज़रबैजान को तुर्की और पाकिस्तान के साथ उभरती धुरी के एक हिस्से के रूप में देखते हैं. इसने आर्मेनिया के खिलाफ 2020 में हुई जंग को लड़ने के लिए तुर्की में बने ड्रोन का इस्तेमाल किया था और वह जेएफ -17 लड़ाकू विमान खरीदने के लिए पाकिस्तान के साथ भी बातचीत कर रहा है.

पर्यवेक्षकों का कहना है कि हाल के वर्षों में, उनकी भौगोलिक दूरी के बावजूद, आर्मेनिया-अज़रबैजान और भारत-पाकिस्तान के बीच एक ‘अप्रत्यक्ष संबंध’ उभरा है.

साल 2017 में, तुर्की, अजरबैजान और पाकिस्तान ने एक त्रिपक्षीय मंत्री-स्तरीय समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसने उनके बीच सुरक्षा सहयोग स्थापित किया था और पहले के द्विपक्षीय सैन्य सहायता व्यवस्था को आगे बढ़ाया.

आर्मेनिया के साथ सौदे के रणनीतिक महत्व के अलावा, हथियारों के निर्यात का यह आदेश स्वदेशी रक्षा उद्योग के लिए भी एक प्रोत्साहन है क्योंकि भारत सरकार भारतीय हथियारों के निर्यात के मूल्य को बढ़ाने के लिए उत्सुक है.

साल 2021-2022 के वित्तीय वर्ष में भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 13,000 करोड़ रुपए को छू गया, जो लगभग पांच साल पहले की तुलना में ‘आठ गुना’ था.

साल 2020 में, नरेंद्र मोदी सरकार ने अगले पांच वर्षों में एयरोस्पेस (विमान निर्माण तकनीक) तथा रक्षा वस्तुओं और सेवाओं के क्षेत्र में 35,000 करोड़ रुपए (5 बिलियन डॉलर) के निर्यात का लक्ष्य रखा था. यह साल 2025 तक रक्षा निर्माण क्षेत्र में 1.75 लाख करोड़ रुपये (25 अरब डॉलर) के सकल कारोबार का हिस्सा है, जिसे हासिल करने का लक्ष्य लेकर यह सरकार चल रही है.

इससे पहले जनवरी 2022 में, भारत ने ब्रह्मोस मिसाइलों की बिक्री के लिए फिलीपींस के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे.

वर्तमान में, भारत 75 देशों को रक्षा उपकरण निर्यात करता है और इसमें वेपन सिमुलेटर, आंसू गैस के गोले दागने वाले लांचर, टारपीडो लोडिंग तंत्र, चेतावनी की निगरानी और नियंत्रण की प्रणाली,  नाइट विजन मोनोकुलर और दूरबीन, हल्के वजन वाले टारपीडो और अग्नि नियंत्रण प्रणाली, बख्तरबंद सुरक्षा वाहन, हथियार खोजने वाले रडार उच्च आवृत्ति वाले रेडियो, तटीय निगरानी रडार आदि शामिल हैं.

(इस ख़बर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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