लगभग सवा दशक पहले दिवंगत हो चुके कांशीराम पर डॉक्यूमेंट्री अंदाज़ में बनी एक फिल्म को अगर दो दिन में दो लाख लोगों ने देख लिया, तो इसे एक असाधारण घटना माना जाएगा.
पेरुमाल मुरुगन का ’नर-नारीश्वर’ मानव मन की भीतरी परतों को पड़ताल करता है, साथ ही वह बच्चे की चाह में गारंटी के साथ बच्चा देने का वादा करने वाले फैलते बाज़ार में आज के युगलों पर भी तंज़ करता है.