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Saturday, 21 February, 2026
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समाज-संस्कृति

जी आपने सही सुना, प्रियंका और दीपिका प्रेगनेंट नहीं हैं!

समाज में शादी के बाद मां बनना इतना महत्व रखता है कि जो धारा के विपरीत चलते हैं उनको संदेह की दृष्टि से देखा जाता है.

अलविदा विनोद कश्यप, चली गई आकाशवाणी की आवाज़

विनोद कश्यप ने ही देश को भारत-चीन युद्ध, भारत पाकिस्तान युद्ध ( 1965, 1971), नेहरू जी और लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु के समाचार सुनाए थे.

सीआरपीएफ के जवानों के लिए जन्नत में खुला ‘हेवन’, जल्द ही आमलोग भी ले सकेंगे मजा

आम लोगों के लिए फिलहाल ‘हेवन’ के दरवाज़े नहीं खोले गए हैं मगर कश्मीर के विशेषकर दक्षिण कश्मीर के हालात को देखते हुए एक सिनेमाघर का खुलना व फ़िल्मों का प्रदर्शित होना एक बड़ी बात है.

अमिताभ बच्चन के अंदर का इंकलाब 77 की उम्र में भी अभी शांत नहीं हुआ है

मीडिया चौथा स्तंभ है, देश की अंतरात्मा है. मेरे पास अपनी अंतरात्मा के साथ जीने की क्षमता या दुस्साहस है, लेकिन मीडिया के साथ नहीं.

तेजप्रताप का नाटक तो जारी है, पर ऐश्वर्या की शादी का मुद्दा क्यों उछाला जा रहा है?

आज भी पढ़ी-लिखी लड़कियों के शादी से बाहर निकलने या रहने की व्यवस्था घर के बड़े-बुज़ुर्गों के हाथों में है. कुछ ऐसा ही हाल है तेजप्रताप और एश्वर्या की शादी का.

नामवर सिंह के जाने से अचानक कमी का एहसास हुआ… अब मिलना नहीं होगा: गुलज़ार

हिंदीे के प्रख्यात आलोचक नामवर सिंह की मृत्यु से साहित्य जगत में गहरा शोक व्याप्त है. पर नामवर सिंह ने कोई ख़ाली जगह नहीं छोड़ी, उन्होंने अपनी जगह बनायी और उसे बख़ूबी भर दिया. कोई और नामवर सिंह नहीं हो सकता.

कचरे-कबाड़ से बने दुनिया के सात अजूबों की प्रतिकृति का नजारा अब देखिए दिल्ली में

दक्षिण दिल्ली नगर निगम हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के पास एक पार्क तैयार किया गया है जहां पर दुनिया के सात अजूबे आप अपनी आंखों से देख पाएंगे.

हिन्दी जगत के प्रख्यात, जाने-माने लेखक नामवर सिंह नहीं रहे

नई दिल्ली: साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित हिंदी लेखक और आलोचक नामवर सिंह का यहां निधन हो गया. वह 92 वर्ष के थे. नामवर...

नेहरू और हरि सिंह का वह पत्राचार जो बताता है कि कश्मीर मसले को संयुक्त राष्ट्र में ले जाने के पीछे क्या थी रणनीति

जिन लोगों को लगता है कि नेहरू ने जनमत संग्रह की बात कह कर गलती की थी, उन्हें जिन्ना के इस बयान को बहुत गौर से सुनना चाहिए.

नंगे सच को सपना देने की कहानी है ज़ोया अख्तर की फिल्म गली बॉय

ज़ोया अख्तर ने साबित कर दिया है कि वह बिलकुल आज के समय की, युवाओं की डायरेक्टर हैं. युवा नब्ज़ को पकड़ती हैं, घिसी-पिटी नहीं बिलकुल नई और मौलिक जवां कहानियों के साथ.

मत-विमत

भारत में केंद्र-राज्य रिश्तों में बदलाव की जरूरत, लेकिन उतना बड़ा नहीं जितना स्टालिन का दावा

एक राज्य सरकार का नई दिल्ली से वित्तीय स्वायत्तता की मांग करना, जबकि अपने स्थानीय निकायों को धन और निर्णय लेने के अधिकार से वंचित रखना, विडंबना है, जिसे नज़रअंदाज़ करना कठिन है — और इसका बचाव करना और भी कठिन है.

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राजनीति

देश

भाजपा कार्यकर्ताओं ने मुंबई में राहुल गांधी को काले झंडे दिखाए

मुंबई, 21 फरवरी (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं ने शनिवार को मुंबई में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.