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Thursday, 2 April, 2026
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तेलंगाना जाति सर्वेक्षण के नतीजे राहुल गांधी के लिए एक मौका और जाल दोनों हैं

रेवंत रेड्डी अपने कर्नाटक समकक्ष सिद्धारमैया के विपरीत, जो इस रिपोर्ट को करीब एक दशक से दबाए बैठे हैं, अपनी बात पर अमल कर रहे हैं.

मोदी 3.0 के बजट से जुड़ी है समाजवादी पहचान की सुर्खी और उसके नीचे दबी है परमाणु संधि की आहट

इस बजट की सुर्खी बनने लायक एकमात्र बात मिडिल-क्लास को इनकम टैक्स में दी गई राहत है और सबसे साहसिक और सकारात्मक पहलू है परमाणु ऊर्जा एक्ट और ‘सिविल लायबिलिटी ऑन न्यूक्लियर डैमेज एक्ट’ में संशोधन का इरादा.

मैं मूर्ति-सुब्रह्मण्यम से सहमत हूं: कामयाबी 9-5 से परे है, लेकिन लंबी शिफ्ट के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता

कॉर्पोरेट वालों की मलामत करना आसान है. लेकिन अपने उद्यमियों, संपदा और रोजगार पैदा करने वालों को प्यार और सम्मान न देने वाला समाज निम्न-मध्यवर्गीय आय के खांचे में ही अटके रहने को अभिशप्त होता है.

महाकुंभ मेला भारत के बारे में है सिर्फ हिंदुओं के बारे में नहीं, अपनी जड़ों को मत भूलिए

कुंभ मेले का राजनीतिकरण तो समझ में आता है, लेकिन जिस बात ने मेरा ध्यान खींचा, वह है आधुनिक भारतीयों द्वारा इसकी आलोचना.

क्या हम सच में चीन का विकल्प बन सकते हैं? मोदी का 2014 का भारत को महान बनाने का वादा बिखर चुका है

एक समय था जब भारतीय लोग तकनीक के क्षेत्र में दुनिया में अग्रणी होने का सपना देखते थे. अब, चीनी इतने आगे हैं कि वे हमें प्रतिस्पर्धी भी नहीं मानते. यह उनके और अमेरिका के बीच की बात है.

सब्यसाची हमें सीखा रहे हैं : अगर मैं बतौर गरीब बंगाली यह कर सकता हूं, तो सोचिए भारत क्या कर सकता है

जिस तरह से कपड़ों ने वैश्विक बाजार को देखा, उससे यह पता चलता है कि सब्यसाची की नजर “अगले 25 वर्षों” पर है.

भारतीय पायलटों की ज़िंदगी: थकान, तनाव और कम आय ने बढ़ाई मुश्किलें

जहां विदेशी पायलटों को काफी अधिक वेतन पर रखा जाता है, वहीं भारतीय पायलटों के वेतन पिछले एक दशक से स्थिर हैं, और कोविड-19 महामारी के बाद भत्तों में भी कटौती की गई है.

इंदिरा गांधी से लेकर ज़ीनत अमान तक, मेरी मां ने भारतीय महिलाओं पर काफी नोट्स बनाए: सागरिका घोष

इस 15 जनवरी को मेरी मां का देहांत हो गया. उनकी नोटबुक ने मुझे भारतीय महिलाओं की बेचैनी और अक्सर यातनापूर्ण खोज के बारे में बताया, जो आवाज़, जगह और समानता पाने के लिए शुरू की गई थी.

डियर राहुल गांधी, सफेद रंग एक विशेषाधिकार है – इसे बार-बार धोने, दाग हटाने और देखभाल की ज़रूरत है

भारतीय राजनीति में, सफ़ेद रंग पारदर्शिता और 'स्वच्छ' छवि का पर्याय नहीं है. और राहुल गांधी के लिए, यह पहचान का पर्याप्त प्रतीक नहीं है.

प्रशांत को नीतीश की मानसिक हालत पर संदेह है, CM के बेटे के आने से बिहार की राजनीति में क्या मायने हैं

प्रशांत किशोर ने बिहार के मतदाताओं की नब्ज़ पकड़ ली है — एक ऐसे CM के प्रति उनकी हताशा और उदासीनता, जिनका जादू खो गया है, लेकिन हार मानने से इनकार कर रहे हैं.

मत-विमत

ढाका नई दिल्ली के साथ अपने संबंधों को नया मोड़ दे रहा है, मोदी सरकार को खुलकर आगे बढ़ना चाहिए

बांग्लादेश के नए विदेश मंत्री खलील-उर-रहमान के अप्रैल में भारत आने की उम्मीद है. प्रधानमंत्री तारिक रहमान के पद संभालने के बाद ये दोनों देशों के बीच पहला बड़ा हाई-लेवल संपर्क होगा.

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अमीर चंद के शेयर की बाजार में कमजोर शुरुआत; आठ प्रतिशत टूटा

नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) बासमती चावल निर्यातक अमीर चंद जगदीश कुमार (एक्सपोर्ट्स) लिमिटेड का शेयर अपने निर्गम मूल्य 212 रुपये के मुकाबले...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.