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Wednesday, 1 April, 2026
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ट्रंप का कश्मीर को लेकर जुनून भारत के लिए खतरनाक है, नई दिल्ली को इसके लिए तैयार रहना चाहिए

1960 के दशक में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी द्वारा कश्मीर पर मध्यस्थता के प्रयास ने पाकिस्तान को अपनी तलवार तेज करने के लिए प्रेरित किया था, न कि उसे हल चलाने के लिए प्रेरित किया था.

‘मेक इन इंडिया’ बनी स्टार्टअप कंपनियों की कब्र

मानकों के पालन को सरल बनाएं. नियमन संबंधी अड़चनों को दुरुस्त करें. उधार देने में समानता बरती जाए और उस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए. ऐसी संस्कृति बनाई जाए जो उद्यम का सम्मान करती हो.

भारत ने पाकिस्तान के लिए केवल संघर्ष विराम का बटन ही दबाया है, उसे तौर-तरीके बदलना होंगे

जब भी ज़रूरत पड़ेगी, सैन्य ताकत का ज़रूर इस्तेमाल किया जाएगा, लेकिन यह कुल योजना का हिस्सा होगा ताकि पाकिस्तान के तौर-तरीकों में बदलाव लाया जा सके.

पाकिस्तान को सैन्य मदद देने पर RSS से जुड़े संगठन ने तुर्किये पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने की मांग की

स्वदेशी जागरण मंच ने मोदी सरकार से अपील की है कि वह द्विपक्षीय संबंधों पर फिर से विचार करे, गैरज़रूरी आयातों पर रोक लगाए, उड़ानें निलंबित करे और देश में विदेशी पर्यटन का बहिष्कार किया जाए.

IMF के कर्ज़ से पता चलता है पाकिस्तान का नारा है — भीख मांगो, उधार लो लेकिन आतंक का साथ देना मत छोड़ो

आईएमएफ को इस बात पर आत्मचिंतन करना चाहिए कि किस आधार पर एक ऐसे देश को लोन दिया गया जो अपने डिफॉल्ट और आतंकवादी नेटवर्क के लिए जाना जाता है?

क्या इस संघर्ष से पाकिस्तान में खौफ पैदा करने का मकसद पूरा कर पाया भारत?

दुश्मन में खौफ पैदा करना और उसे सज़ा देना इस बात पर निर्भर करता है कि जिन पर हम प्रभाव डालने की कोशिश कर रहे हैं उन पर कितना प्रभाव पड़ा है. मुश्किल यह है कि हम यह निश्चित रूप से नहीं जान सकते कि वह मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालने के लिए कितना नुकसान पहुंचाना ज़रूरी है.

पाकिस्तानी सेना के लिए युद्ध उसकी राष्ट्र पहचान है. सीज़फायर का उल्लंघन नए विवादों की आहट है

भारत को जो लक्ष्य हासिल करना चाहिए, वह है पाकिस्तान को एक नया रूप देना, न कि वह देश जैसा उसके जनरलों और मौलवियों ने कल्पना की है. गुस्से के शब्द और क्रोध की लहरें काफी नहीं होंगी.

आसिम मुनीर के दिमाग में क्या चल रहा है?

कश्मीर में जो सामान्य स्थिति बहाल हुई है उसे, मुनीर के मुताबिक, उलटना जरूरी था. पहलगाम कांड की तैयारी उनके भाषण और इस हमले के बीच के एक सप्ताह में तो नहीं ही की गई, इसमें कई महीने नहीं तो कई सप्ताह जरूर लगे होंगे.

जनरल मुनीर की असली जंग LoC पर नहीं, पाकिस्तान के भीतर है—और वे हार रहे हैं

खैबर-पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में वास्तविक राजनीतिक प्रतिरोध का सामना करते हुए, पाकिस्तानी सेना की रणनीति पूरी तरह ध्वस्त होने के कगार पर है. भारत को इस अवसर को पहचानना चाहिए.

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