नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में 3.04 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी. साथ ही कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) के दाम भी 2 रुपये प्रति किलो बढ़ा दिए गए.
इस फैसले से महंगाई का दबाव बढ़ने और ट्रांसपोर्ट व घर के खर्चों में इजाफा होने की संभावना है. वहीं सरकार सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर बढ़ रहे वित्तीय दबाव को कम करने की कोशिश कर रही है.
नई कीमतों के बाद दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 97.81 रुपये हो गया, जबकि डीजल 87.67 रुपये से बढ़कर 90.71 रुपये प्रति लीटर हो गया. कई शहरों में सीएनजी के दाम भी बढ़ाए गए हैं.
यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया संघर्ष की वजह से दुनिया के कई हिस्सों में सप्लाई प्रभावित हुई है और वैश्विक ईंधन कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी हुई है. इसके बावजूद भारत ने काफी हद तक उपभोक्ताओं को इस असर से बचाए रखा था.
सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और दूसरे ईंधन अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़े दामों से कम कीमत पर बेचकर भारी नुकसान झेल रही थीं.
इससे पहले पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा था कि कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और एलपीजी की आयात लागत बढ़ने की वजह से OMCs को रोज़ाना 1,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा है. उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए खुदरा ईंधन कीमतें कम रखी गई थीं. सरकार ने यह भी कहा कि वित्तीय दबाव के बावजूद देशभर में ईंधन आयात और सप्लाई लगातार जारी रही.
सरकार ने कहा कि भारत उन कुछ बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है जिसने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी का पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला. सरकार के मुताबिक हर दिन 6 करोड़ से ज्यादा उपभोक्ता फ्यूल रिटेल स्टेशनों पर आते हैं.
केंद्र सरकार ने यह भी बताया कि उसने पहले पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम की थी, जिससे एक महीने में करीब 14,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ. हालांकि अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा तिमाही में OMCs का अंडर-रिकवरी घाटा अभी भी तेजी से बढ़ सकता है.
सरकारी अनुमान के मुताबिक इस तिमाही में OMCs का अंडर-रिकवरी घाटा करीब 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जबकि कुल नुकसान ताजा कीमत बढ़ोतरी के बावजूद 1 लाख करोड़ रुपये तक जा सकता है.
ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार पर चुनाव के तुरंत बाद जनता पर बोझ डालने का आरोप लगाया. पार्टी ने एक्स पर पोस्ट में कहा, “‘महंगाई मैन’ मोदी ने आज फिर जनता पर महंगाई की मार चला दी है. पेट्रोल और डीजल 3-3 रुपये महंगे कर दिए गए हैं, जबकि सीएनजी के दाम भी 2 रुपये बढ़ा दिए गए हैं. चुनाव खत्म—अब मोदी की वसूली शुरू.”
टीएमसी सांसद कीर्ति आज़ाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर पर्याप्त ईंधन भंडार होने का बार-बार दावा करने को लेकर निशाना साधा.
उन्होंने पीटीआई से कहा, “मोदी सरकार से सीधा सवाल है…पिछले 10-12 सालों में, जब कच्चे तेल की कीमतें कम थीं और कोई युद्ध नहीं चल रहा था, तब एक्साइज ड्यूटी 16 बार बढ़ाई गई. पेट्रोल और डीजल के दाम करीब 65 रुपये से बढ़कर 100 रुपये से ऊपर पहुंच गए. उस समय जब लोगों को राहत देने का मौका था, तब कोई फायदा नहीं दिया गया. तो अब जब कीमतें बढ़ रही हैं, जनता पर इतना बड़ा बोझ क्यों डाला जा रहा है? लोगों को सबसे ज्यादा तकलीफ वाली जगह पर चोट क्यों पहुंचाई जा रही है?”
उन्होंने आगे कहा, “मैं आम लोगों से, खासकर बंगाल के लोगों से पूछना चाहता हूं…बीजेपी का समर्थन करने के बाद उन्हें क्या मिला? अब डीजल और पेट्रोल के दाम 3 रुपये बढ़ा दिए गए हैं. अमित शाह और नरेंद्र मोदी बार-बार कहते रहे कि पर्याप्त ईंधन भंडार है, कोई कमी नहीं होगी और कीमतें नहीं बढ़ेंगी. इससे उनकी राजनीति के दोहरे मापदंड साफ दिखाई देते हैं. वे सिर्फ जनता को लूट रहे हैं और कुछ नहीं कर रहे.”
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