नई दिल्ली: बुधवार को आई एक गुमनाम चिट्ठी से नागपुर पुलिस में अफरा-तफरी मच गई. इसमें दावा किया गया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) मुख्यालय की कुर्सियों के अलावा संघ और बीजेपी के दफ्तरों तक जाने वाले पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर रेडियोधर्मी तत्व सीज़ियम-137 छिड़का गया है, “दलितों के खिलाफ नफरत का बदला लेने” के लिए.
स्पीड पोस्ट से भेजी गई यह चिट्ठी शहर के सभी बड़े पुलिस अधिकारियों को मिली, जिसके बाद बड़े स्तर पर तलाशी अभियान और जांच शुरू की गई. महाराष्ट्र पुलिस के सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि यह गुमनाम चिट्ठी सबसे पहले नागपुर पुलिस कमिश्नर के ऑफिस में मिली थी और इसे “DSS” के नाम से भेजा गया था, लेकिन इस संगठन का पूरा नाम नहीं लिखा था.
आरएसएस, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की वैचारिक मूल संस्था है, जो महाराष्ट्र और केंद्र में सत्ता में है.
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए नागपुर के पुलिस कमिश्नर रविंदर सिंगल ने कहा कि गुमनाम चिट्ठी के स्रोत और मकसद का पता लगाने के लिए जांच चल रही है.
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि गिरफ्तारी होने के बाद ही पुलिस को ज्यादा स्पष्ट जानकारी मिल पाएगी.
उन्होंने गुरुवार को मीडिया से कहा, “कल हमें एक चिट्ठी मिली जिसमें कुछ जगहों को नुकसान पहुंचाने की बात कही गई थी. हम फिलहाल चिट्ठी के स्रोत और लिखने वाले की जांच कर रहे हैं. इसका मकसद क्या था और क्या इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है, यह तब पता चलेगा जब आरोपी हमारे हाथ लगेंगे.”
उन्होंने फोन पर दिप्रिंट को बताया कि नागपुर पुलिस ने इस मामले में बीएनएस की धारा 351 (2) (आपराधिक धमकी), 353 (2) (शरारत) और 196 (2) (a) (धर्म, जाति, जन्म स्थान आदि के आधार पर समूहों के बीच दुश्मनी फैलाना) के तहत एफआईआर दर्ज की है.
महाराष्ट्र पुलिस के सूत्रों ने बताया कि इस गुमनाम चिट्ठी में दावा किया गया था कि सीज़ियम-137, जो सीज़ियम का एक रेडियोधर्मी रूप है, उसे नागपुर शहर के रेशीमबाग इलाके में स्थित आरएसएस मुख्यालय और ऑफिस में छिड़का गया है. रेशीमबाग ऑफिस एक परिसर है, जहां आरएसएस के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार और माधव सदाशिवराव गोलवलकर की स्मृति में बना स्मारक भी है.
सूत्रों के मुताबिक, चिट्ठी में लिखा था, “यह बहुत ज्यादा रेडियोधर्मी है. अस्पताल जाकर पता करो. आरएसएस के परिवार भी सीज़ियम से संक्रमित हैं. हमने यह एक कैंसर अस्पताल से लिया है. यह दलितों से नफरत करने की सजा है.”
सूत्रों ने बताया कि चिट्ठी में यह भी दावा किया गया कि शहर में आरएसएस और बीजेपी के दफ्तरों पर रुकने वाली मेट्रो ट्रेन और बसों में भी यह रेडियोधर्मी तत्व छिड़का गया है. एक सूत्र ने कहा, “चिट्ठी में मेट्रो की ऑरेंज और एक्वा लाइनों की सीटों का जिक्र किया गया था.”
रेडिएशन बीमारी के लक्षणों में मतली, उल्टी, सिरदर्द और दस्त शामिल हैं.
यह भी पता चला है कि चिट्ठी भेजने वालों ने इस महीने की शुरुआत में डॉ. उज्ज्वल लांजेवार के घर के बाहर जिलेटिन स्टिक और डेटोनेटर रखने की जिम्मेदारी भी ली है. नागपुर पुलिस ने 7 अप्रैल को सेंट्रल नागपुर में आरएसएस मुख्यालय से करीब 5 किमी दूर डोसर भवन चौक के पास लांजेवार के घर के गार्डन से 15 जिलेटिन स्टिक और 58 डेटोनेटर (जिनमें से 8 कनेक्टर के साथ थे) बरामद किए थे.
हालांकि, सूत्रों ने उस मामले में उनकी भूमिका के दावों को खारिज कर दिया और कहा कि उस घटना में एक नाराज सस्पेंडेड पुलिस कॉन्स्टेबल की भूमिका सामने आई थी.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)