ठाणे, 28 अप्रैल (भाषा) महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक अदालत ने एक व्यक्ति को अपनी रिश्तेदार के साथ कथित तौर पर जबरन यौन संबंध बनाने और उसे गर्भवती करने के मामले में यह कहते हुए बरी कर दिया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में विफल रहा।
इस मामले में प्रमुख गवाह मुकर गए थे।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रेमल एस विठलानी ने कालवा निवासी 34 वर्षीय आरोपी को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 68(ए) (अधिकार/विश्वासपूर्ण रिश्ते में व्यक्ति द्वारा यौन संबंध बनाना), 88 (महिला की सहमति के बिना गर्भपात कराना) और अन्य संबंधित प्रावधानों के तहत लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया।
यह आदेश 18 अप्रैल को दिया गया, जिसकी एक प्रति सोमवार को उपलब्ध कराई गई।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता अपनी बड़ी बहन के प्रसव के बाद उसकी मदद करने के लिए 2021 में आरोपी के घर आई। इस दौरान आरोपी ने उसके साथ जबरदस्ती यौन संबंध बनाए और बाद में उसका गर्भपात करवा दिया।
न्यायाधीश ने संज्ञान लिया कि बीएनएस की धारा 68(ए) के तहत अपराध स्थापित करने के लिए, अभियोजन पक्ष को यह साबित करना होगा कि आरोपी ने एक विश्वासपूर्ण संबंध बनाए थे, उसने पीड़िता को प्रेरित करने या बहकाने के लिए ऐसे संबंध का दुरुपयोग किया और इस ओर भी ध्यान दिया कि पीड़िता ने गवाही दी थी कि उनका संबंध सहमति से था।
अदालत ने बताया कि पीड़िता के भाई ने कथित उत्पीड़न या गर्भावस्था के बारे में किसी भी तरह की जानकारी होने से इनकार किया है।
अदालत ने यह पाया कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि आरोपी ने पीड़िता को बहकाया या फुसलाया था या कोई आपराधिक धमकी दी थी।
अदालत ने इस आधार पर आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
भाषा यासिर मनीषा
मनीषा
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