नयी दिल्ली, 18 अप्रैल (भाषा) एशियाई खेल जैसे जैसे नजदीक आ रहे हैं वैसे ही ओलंपिक के लिए क्वालीफिकेशन की राह मुश्किल होती जा रही है और भारत की शीर्ष रिकर्व तीरंदाज दीपिका कुमारी का कहना है कि पेरिस 2024 में मिली निराशा अब भी उनके मन में है जिसने उन्हें मानसिक मजबूती पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया है ताकि वह पोडियम पर जगह बनाने के अपने सपने को पूरा कर सकें।
दीपिका 2024 में अपने चौथे ओलंपिक में क्वार्टरफाइनल तक पहुंचीं, लेकिन हारकर पदक जीतने से चूक गईं। इस अनुभवी तीरंदाज ने माना कि अब उनकी सबसे बड़ी लड़ाई बाहरी उम्मीदों से नहीं, बल्कि अंदर चल रहे द्वंद्व से है।
उन्होंने यहां पीटीआई वीडियो से कहा, ‘‘बाहर की उम्मीदों से अधिक मेरे मन में जो चल रहा है, मुझे वह ज्यादा सुनाई देता है। इसलिए मैं उन सब बातों को नजरअंदाज नहीं कर सकती। यह मेरी जिंदगी है। मैं जानती हूं कि मुझे अपनी जिंदगी में क्या करना है और मैंने क्या किया है। कोई और कुछ नहीं जानता। ’’
उन्होंने राष्ट्रीय रैंकिंग तीरंदाजी टूर्नामेंट के दौरान कहा, ‘‘मैं खुद को कोसती हूं कि मैं क्या कर रही हूं, क्या हो रहा है, मैं अपनी जिंदगी के साथ क्या कर रही हूं। कभी-कभी मुझे लगता है कि मैंने कुछ भी हासिल नहीं किया है। ’’
दुनिया की पूर्व नंबर एक खिलाड़ी दीपिका मां बनने के बाद खेल में वापसी करने के बाद से सर्किट पर भारत की सबसे लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाली खिलाड़ियों में से एक रही हैं। 2024 सत्र में उन्होंने शंघाई विश्व कप में रजत पदक जीता और एशियाई कप में भी पोडियम पर जगह बनाई।
दीपिका ने कहा कि उस दौर से मिले सबकों ने उन्हें अपने अंदर झांकने के लिए प्रेरित किया है जिससे उनका ध्यान तकनीक से हटकर खेल के मानसिक पहलू पर महारत हासिल करने की ओर पूरी तरह से केंद्रित हो गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘तैयारी अच्छी चल रही है। हम अगले 10 दिन में विश्व कप खेलने जा रहे हैं, यह दूसरा विश्व कप होगा। हम अलग-अलग चीजें आजमा रहे हैं। ’’
भाषा नमिता आनन्द
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