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Saturday, 25 April, 2026
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भारी उद्योग क्षेत्र की कंपनियों के लिए अनुपालन बोझ कम करने की जरूरत: पीएचडी चैंबर

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नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) उद्योग मंडल पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने बुधवार को भारी उद्योग क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों, विशेष रूप से एमएसएमई के लिए लक्षित सुधारों का प्रस्ताव दिया। इसमें दोहराव और अनुपालन लागत को कम करने के लिए कई कागजी कार्यवाही को एक सरल फॉर्म में एकीकृत करते हुए एकीकृत वार्षिक रिटर्न शुरू करने का सुझाव दिया गया है।

पीएचडीसीसीआई ने यह भी सिफारिश की है कि कर ऑडिट की सीमा को सुव्यवस्थित करते हुए इसे बढ़ाकर लगभग 5-10 करोड़ रुपये किया जाना चाहिए। इससे छोटे उद्यमों पर अनुपालन का बोझ कम होगा।

जीएसटी के मोर्चे पर एक प्रमुख प्रस्तावित सुधार इनपुट टैक्स क्रेडिट की पात्रता को आपूर्तिकर्ता के अनुपालन से अलग करना है। उद्योग मंडल ने कहा कि इसके बजाय जवाबदेही चूक करने वाले आपूर्तिकर्ताओं पर तय की जानी चाहिए।

पीएचडीसीसीआई ने उन संरचनात्मक बाधाओं का भी जिक्र किया, जो नियामक प्रक्रियाओं के सरलीकरण, युक्तिकरण और डिजिटलीकरण से संबंधित हैं और भारी उद्योग क्षेत्र को प्रभावित कर रही हैं।

उद्योग मंडल के अनुसार कंपनियां इस समय एमजीटी-7 और एओसी-4 जैसे कई वार्षिक फॉर्म भरती हैं, जिनमें एक जैसी जानकारियां देनी पड़ती हैं। यह दोहराव बिना किसी नियामक मूल्य के अनुपालन लागत और दंड के जोखिम को बढ़ाता है।

इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि आयकर अधिनियम के तहत अपेक्षाकृत कम सीमा होने के कारण बड़ी संख्या में एमएसएमई अनिवार्य कर ऑडिट के दायरे में आते हैं। इसके चलते अनुपालन लागत बढ़ जाती है।

भाषा पाण्डेय रमण

रमण

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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