पटियाला: गुरजीत सिंह खालसा “सत श्री अकाल” के नारों के बीच समाना में स्टेज पर पहुंचे, उन्होंने 18 महीने तक एक टेलीकॉम टावर पर बैठकर विरोध करने के बाद यह कदम उठाया. उनका मांग था कि पंजाब में बेअदबी के खिलाफ कानून बनाया जाए.
एक हजार से ज्यादा लोग पटियाला रोड, समाना के बंदा सिंह बहादुर चौक पर इकट्ठा हुए थे, जहां 24 फरवरी से विरोध चल रहा है. खालसा एंबुलेंस से वहां पहुंचे और उनके मोर्चा के सदस्यों ने उन्हें स्टेज पर चढ़ने में मदद की.
भीड़ को संबोधित करने से पहले, 43 साल के पूर्व सैनिक और किसान सीधे गुरु ग्रंथ साहिब के पालकी साहिब के पास गए और माथा टेका. वह काफी भावुक दिख रहे थे.
इससे पहले दिन में, खालसा को BSNL के टावर से नीचे उतारा गया, जिससे उनका लंबा विरोध खत्म हुआ. यह घटना कुछ ही दिन बाद हुई, जब पंजाब सरकार ने जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026 को लागू किया, जिसे राज्यपाल की मंजूरी मिल चुकी थी. यह मुद्दा पिछले एक दशक से राज्य की राजनीति में अहम रहा है.

टावर से उतरने के बाद, खालसा को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया. SMO डॉ. नंदिनी शर्मा और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. परमिंदर पाल सिंह की टीम ने उनका चेकअप किया और जरूरी इलाज दिया.
इसके बाद वह समाना के गुरुद्वारा गढ़ी साहिब गए, जिसे उन्होंने अपने विरोध का मुख्य कारण बताया.
उन्होंने कहा, “मैं वहां गया और गुरु साहिब से प्रार्थना की. मैंने कहा कि लंबे समय से हमारे धर्म का अपमान हो रहा है, और मैं इसे रोकने के लिए कुछ करना चाहता हूं. मैंने रास्ता मांगा. तब मुझे एक दृश्य दिखा—मैंने एक बड़े खुले मैदान में कीर्तन होते देखा. गुरु साहिब ने कहा कि मुझे अपनी जान जोखिम में डालनी होगी. मैंने कहा, ‘मुझे ताकत दो. मैं आपका सिख हूं.’ तभी गुरु साहिब ने मुझे टावर पर चढ़ने का रास्ता दिखाया.”
‘वह हमारे लिए भगवान की तरह हैं’
मोर्चा स्थल पर कई नेता और समर्थक मौजूद थे, जिनमें BKU सिधुपुर के अध्यक्ष मां जगजीत सिंह डल्लेवाल; टावर मोर्चा समाना समिति के सदस्य अमितोज मान; टावर मोर्चा समाना के समन्वयक गुरप्रीत सिंह; इंडियन फार्मर एसोसिएशन के अध्यक्ष सतनाम सिंह बहेरू; SAD (पुनर सुरजीत) के वरिष्ठ नेता इकबाल सिंह झुंडा; पंजाब के पूर्व मंत्री और SAD (पुनर सुरजीत) के वरिष्ठ नेता सुरजीत सिंह रखड़ा; और SAD (पुनर सुरजीत) के वरिष्ठ नेता मनप्रीत सिंह अयाली शामिल थे.
खालसा का स्वागत एक धाड़ी जत्था ने भी किया, जिसका नेतृत्व सभा सिंह सितारा कर रहे थे, और पूरे कार्यक्रम में नारे लगते रहे.
इतने जोश के माहौल के बावजूद, उनकी सेहत को लेकर चिंता बनी रही. वह कमजोर दिख रहे थे, उनका ब्लड प्रेशर हाई था, और स्टेज पर दवाई लेते हुए भी दिखे.
भीड़ को संबोधित करते हुए खालसा ने कहा कि कई लोगों ने उन्हें यह विरोध न करने की सलाह दी थी, लेकिन वह अपने फैसले पर डटे रहे.
उन्होंने कहा, “यह मेरे बाबा जी का आदेश है, और मैं इसे पूरा करूंगा. इसी वजह से मुझे 400 फुट ऊंचे टावर पर चढ़ने और गर्मी, ठंड और तेज बारिश सहने की ताकत मिली.”
खालसा, जो खेड़ी नगाइयां गांव के रहने वाले हैं, ने कहा कि उनका हौसला ही उन्हें इतने महीनों तक टावर पर टिकाए रहा.
भीड़ में मौजूद सुरिंदर सिंह ने कहा कि खालसा के विरोध ने कई लोगों को प्रेरित किया.

उन्होंने कहा, “हम कई सालों से इसका इंतजार कर रहे थे. जब यह कानून पास हुआ, तो लगा कि न्याय मिला. उन्होंने जो किया, उससे लोगों ने आवाज उठाई, और आज हम उसका नतीजा देख रहे हैं.”
कार्यक्रम के दौरान लोग खालसा के पास इकट्ठा हो गए और कई लोग उनके सामने झुकने की कोशिश करने लगे. उन्होंने बार-बार उन्हें ऐसा न करने का इशारा किया.
फिर भी, लोगों का सम्मान साफ दिख रहा था. भीड़ में इलेक्ट्रिक व्हीलचेयर पर बैठे गुरजंत सिंह हाथ जोड़कर चुपचाप सब सुन रहे थे.
उन्होंने कहा, “वह हमारे लिए भगवान जैसे हैं. उन्होंने वह किया जो कोई और नहीं कर सका. गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी एक गंभीर अपराध है और इसे सख्त सजा मिलनी चाहिए.”
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