बहराइच (उप्र), 17 जनवरी (भाषा) जिले की महसी तहसील के रेहुआ मंसूर गांव में चार दिनों से दहशत का पर्याय बन चुके एक बाघ को वन विभाग के विशेषज्ञों ने शनिवार को बेहोश करके पकड़ लिया और उसे पिंजरे में कैद करने में कामयाबी हासिल की। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
प्रभागीय वनाधिकारी सुन्दरेशा ने बताया कि महसी तहसील के रेहुआ मंसूर गांव में बीते चार दिनों से एक बाघ दिखाई दे रहा था। इस क्षेत्र में साल 2024 में भेड़िए व पिछले वर्ष तेंदुओं द्वारा इंसानों पर हमलों को लेकर गांव के लोग दहशत में थे।
सुन्दरेशा ने कहा कि हमें दुर्लभ वन्यजीव को भी बचाना था और इंसानों पर हमले की संभावनाओं का भी ध्यान रखना था। इसलिए वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों ने बाघ को बचाने का निर्णय लिया।
उन्होंने बताया कि ड्रोन कैमरे लगाकर लगातार बाघ की निगरानी की गई और उसे पकड़ने का प्रयास किया गया, लेकिन घने कोहरे के कारण ड्रोन कैमरे बाघ का पता नहीं लगा पा रहे थे।
बचाव अभियान को अंजाम देने के लिए बृहस्पतिवार को दुधवा बाघ अभयारण्य से ‘‘डायना’’ और ‘‘सुलोचना’’ नाम की दो प्रशिक्षित मादा हाथी लाई गईं।
इसके साथ साथ दुधवा के ‘ट्रैंक्विलाइजिंग’ (इंजेक्शन देकर बेहोश करने वाले) विशेषज्ञ पशु चिकित्सक डॉ. दयाशंकर व कतर्नियाघाट के डॉ. दीपक को बचाव अभियान की कमान दी गयी थी।
‘ट्रैंक्विलाइजिंग गन’ के साथ प्रशिक्षित शूटर की बचाव टीम तीन दिन से हाथियों पर सवार होकर तलाश अभियान चला रही थी। बाघ लगातार सबको चकमा देकर कभी गन्ने के खेत में तो कभी घाघरा नदी के कछार में ओझल हो जा रहा था लेकिन दोबारा गांव के आसपास लौट भी आता था।
डीएफओ ने बताया कि शनिवार दोपहर बाद टीम ने ड्रोन की मदद से बाघ की लोकेशन का पता लगाया, हाथी पर चढ़कर ‘ट्रैंक्विलाइजिंग गन’ से निशाना लगाकर उसे बेहोश करने में कामयाबी हासिल की।
बाघ के बेहोश होने के बाद उसे पिंजरे में डालकर चिकित्सीय जांच के लिए बहराइच वन प्रभाग के संभागीय कार्यालय लाया गया।
उन्होंने बताया कि सुरक्षित बचाव अभियान के दौरान किसी इंसान अथवा जानवर को चोट नहीं आई है।
भाषा सं जफर सुरभि
सुरभि
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