नयी दिल्ली, 16 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट के लिए आमंत्रित अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं को दी गई फीस पर लगाए गए सेवा कर की मांग को खारिज करते हुए कहा कि इस तरह के भुगतान वित्त अधिनियम के तहत ‘‘इवेंट मैनेजमेंट सर्विस’’ के दायरे में नहीं आते।
न्यायमूर्ति जे बी परदीवाला और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ ने फैसला सुनाया कि किसी सम्मेलन के लिए अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं को आमंत्रित करने हेतु बुकिंग एजेंटों को भुगतान की गई फीस पर ‘‘इवेंट मैनेजमेंट सर्विस’’ की श्रेणी के तहत कर नहीं लगाया जा सकता।
फैसला लिखने वाले न्यायमूर्ति पारदीवाला ने एचटी मीडिया लिमिटेड की अपील को स्वीकार कर लिया।
इसने सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (सीईएसटीएटी) के 2017 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पहले एचटी मीडिया लिमिटेड को विदेशी एजेंटों को किए गए भुगतानों पर सेवा कर के लिए उत्तरदायी ठहराया गया था।
यह विवाद 2009 से 2012 के बीच आयोजित हुए वार्षिक ‘हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट’ से जुड़ा है।
इस कार्यक्रम में ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, अमेरिका के पूर्व उपराष्ट्रपति अल गोर और अंतरिक्ष यात्री जेरी लिनेंगर सहित कई वैश्विक हस्तियों को लाने के लिए एचटी मीडिया ने वाशिंगटन स्पीकर्स ब्यूरो और हैरी वॉकर एजेंसी जैसी विशेष बुकिंग एजेंसियों के साथ अनुबंध किया था।
राजस्व विभाग ने विस्तारित समयसीमा का हवाला देते हुए, बुकिंग एजेंटों के माध्यम से इन वक्ताओं को भुगतान की गई फीस पर ‘इवेंट मैनेजमेंट सेवा’ की श्रेणी के तहत सेवा कर लगाने का प्रस्ताव करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किए थे।
कुल कर की मांग लगभग 60.56 लाख रुपये थी। आयुक्त ने 13 फरवरी, 2014 को ब्याज और जुर्माने सहित मांग की पुष्टि की।
अपील पर, सीईएसटीएटी ने विस्तारित परिसीमा अवधि के आह्वान को रद्द कर एचटी मीडिया की याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया।
हालांकि, सीईएसटीएटी ने सामान्य अवधि के लिए सेवा कर की मांग को यह मानते हुए बरकरार रखा कि भुगतान ‘इवेंट मैनेजमेंट सर्विस’ के तहत सेवा कर के दायरे में आते हैं।
न्यायाधिकरण ने प्रबंधन परामर्श सेवा और व्यावसायिक सहायता सेवा श्रेणियों के तहत की गई मांगों को एक साथ खारिज कर दिया।
इस फैसले ने राजस्व विभाग की व्यापक व्याख्या को खारिज कर दिया और कराधान कानूनों की सख्त व्याख्या के सिद्धांत पर जोर दिया।
इसमें कहा गया, ‘‘यदि राजस्व विभाग, न्यायालय को यह संतुष्ट कर दे कि मामला कानून के प्रावधानों के दायरे में आता है, तो उस पर कर लगाया जा सकता है। दूसरी ओर, यदि मामला कानून के दायरे में नहीं आता है, तो अनुमान या सादृश्य के आधार पर कोई कर नहीं लगाया जा सकता।’’
फैसले में कहा गया, ‘‘वक्ता कार्यक्रम की योजना, प्रचार, आयोजन या प्रस्तुति नहीं करता है। कार्यक्रम में भागीदारी को कार्यक्रम का प्रबंधन नहीं माना जा सकता। राजस्व विभाग की यही मूलभूत गलती है।’’
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नेत्रपाल माधव
माधव
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