नयी दिल्ली, पांच नवंबर (भाषा) हरित भवन रेटिंग देने वाली गृह परिषद ने कहा है कि देश में बुनियादी ढांचे और रियल एस्टेट परियोजनाओं के डिजाइन और निर्माण में स्थायित्व के पहलुओं को नवाचार के माध्यम से समाहित करना जरूरी है, ताकि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटा जा सके।
राष्ट्रीय राजधानी में तीन-चार नवंबर को आयोजित ’17वें गृह शिखर सम्मेलन’ में जलवायु-अनुकूल दुनिया के लिए नवाचार के माध्यम से कार्रवाई पर चर्चा हुई।
गृह परिषद के उपाध्यक्ष और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) संजय सेठ ने कहा, “तेजी से हो रहे विकास के बीच हमें नवाचार के जरिये स्थायित्व को विकास के हर चरण में शामिल करना होगा। यह हमें जलवायु के प्रति अधिक जुझारू बनाएगा।”
सम्मेलन के दौरान देश-विदेश के नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने शिक्षा में जलवायु साक्षरता, शहरी स्थायित्व को बढ़ाने वाले नवाचार, कचरा प्रबंधन के लिए संसाधनों के अधिकतम इस्तेमाल वाले समाधान और टिकाऊ डिजाइन के माध्यम से वायु प्रदूषण से निपटने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया।
गृह परिषद की अध्यक्ष और टेरी की महानिदेशक विभा धवन ने कहा, “इस साल का विषय बेहद प्रासंगिक है। नवाचार को उद्देश्यपूर्ण होना चाहिए, टिकाऊपन को शुरुआत से ही डिजाइन में शामिल किया जाना चाहिए और सहयोग हर स्तर पर जरूरी है।”
आवासीय उपक्रम हुडको के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक संजय कुलश्रेष्ठ ने बताया कि परिषद के साथ संस्थान की साझेदारी से भारत के निर्मित परिवेश में हरित भवनों को बढ़ावा मिला है।
‘गृह प्रणाली’ भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय और टेरी द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई है। परिषद इमारतों के पूरे जीवनचक्र के दौरान उनके पर्यावरणीय प्रदर्शन का आकलन करती है और हरित भवनों के लिए एक मानक ढांचा प्रदान करती है।
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