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Sunday, 19 April, 2026
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गरीबी उन्मूलन एजेंडे में तेजी लाने के लिए राज्यों को वित्तीय सुधार की जरूरत: धालीवाल

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नयी दिल्ली, पांच अक्टूबर (भाषा) मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) की इकाई जे-पीएएल के वैश्विक कार्यकारी निदेशक इकबाल सिंह धालीवाल ने कहा कि गरीबी उन्मूलन के लक्ष्यों को तेजी से हासिल करने के लिए राज्यों को अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार करने की जरूरत है।

धालीवाल ने ‘पीटीआई भाषा’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ”केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा ठीक है, लेकिन राज्य सरकारों को अपने वित्त और राजकोषीय संसाधनों के मामले में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके दो मूल कारण हैं। एक तो लगातार योजनाएं जुड़ती जा रही हैं। करीब 20 साल पहले जो कार्यक्रम शुरू किया गया था, वह हाल में शुरू किए गए कार्यक्रम के साथ ही चल रहा है।”

उन्होंने कहा, ”ऐसी योजनाओं को युक्तिसंगत बनाने की आवश्यकता है।”

उन्होंने कहा कि जिन योजनाओं ने अपना उद्देश्य पूरा कर लिया है, उन्हें चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाना चाहिए, जैसे हम अपने पुराने टीवी या लैपटॉप को उनके उद्देश्य पूरा होने के बाद बदल देते हैं।

पूर्व नौकरशाह से अर्थशास्त्री बने धालीवाल ने यह भी सुझाव दिया कि सरकार को उत्पादक उद्देश्यों के लिए धन उपलब्ध कराने पर विचार करना चाहिए।

उन्होंने कहा, ”पैसे देने का तरीका, कितनी रकम दी जाती है, और महीने में किस तारीख को दी जाती है— ये सब बहुत मायने रखते हैं। इसलिए इस मामले में और प्रयोग करने की जरूरत है।”

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को नकद राशि देने के बजाय बेहतर सार्वजनिक स्कूल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उपलब्ध कराने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

नौकरियों पर एआई के प्रभाव के बारे में धालीवाल ने कहा कि यह भारत में भी छंटनी का कारण बनेगा, जैसे अमेरिका और यूरोप में हुआ है। खासकर बीपीओ और आईटी क्षेत्र की कम कौशल वाली नौकरियां इसके कारण खत्म हो सकती हैं।

उन्होंने कहा कि इन कमजोर वर्गों को कौशल प्रदान करने तथा आवश्यक प्रशिक्षण देने की तत्काल आवश्यकता है, ताकि वे एआई-प्रेरित कार्य के लिए तैयार हो सकें।

उन्होंने कहा कि इससे नौकरियों के नुकसान को रोका जा सकेगा।

भाषा योगेश पाण्डेय

पाण्डेय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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