scorecardresearch
Saturday, 18 April, 2026
होमदेशअर्थजगतआरबीआई का कदम संतुलित, दिसंबर में नीतिगत दर में कटौती की उम्मीद: विशेषज्ञ

आरबीआई का कदम संतुलित, दिसंबर में नीतिगत दर में कटौती की उम्मीद: विशेषज्ञ

Text Size:

नयी दिल्ली, एक अक्टूबर (भाषा) भारतीय उद्योग जगत और विशेषज्ञों ने बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दर अपरिवर्तित रखने के निर्णय को ‘संतुलित’ बताया और उम्मीद जताई कि केंद्रीय बैंक दिसंबर की मौद्रिक नीति में नीतिगत दर रेपो में कमी करेगा।

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने नीतिगत दर यानी रेपो दर को 5.5 प्रतिशत पर बरकरार रखते हुए ‘तटस्थ’ रुख बनाए रखा है। साथ ही वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में आर्थिक गतिविधियों में मजबूती को देखते हुए चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर के अनुमान को 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.8 प्रतिशत कर दिया है।

उद्योग मंडल फिक्की के अध्यक्ष हर्षवर्धन अग्रवाल ने कहा कि आरबीआई की यह वृद्धि दर की समीक्षा भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और हाल की नीतिगत पहलों, खासकर जीएसटी के सरलीकरण के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाती है।

उन्होंने कहा, ‘‘बैंकिंग प्रणाली को मजबूत करने, ऋण प्रवाह बढ़ाने, निर्यातकों को सहूलियत देने और रुपये के अंतरराष्ट्रीयकरण को बढ़ावा देने वाले आरबीआई के कदम सराहनीय हैं।’’

अग्रवाल ने कहा, ‘‘वृद्धि की गति को तेज करने को लेकर हमारा नजरिया सकारत्मक है। हमें विश्वास है कि आरबीआई समय पर उपायों के साथ वृद्धि को समर्थन देना जारी रखेगा, जिसमें अगली मौद्रिक नीति समीक्षा रेपो दर में संभावित कटौती भी शामिल है।’’

एसोचैम के अध्यक्ष संजय नायर ने कहा कि रेपो दर को स्थिर रखना एक संतुलित फैसला है जो वृद्धि को समर्थन देते हुए मुद्रास्फीति पर नियंत्रण बनाए रखता है। इससे कारोबारियों और निवेशकों को दीर्घकालिक निवेश योजना बनाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘आरबीआई द्वारा रेपो दर को 5.5 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखते हुए ‘तटस्थ’ रुख अपनाने का निर्णय आर्थिक प्रबंधन के प्रति एक सतर्क किन्तु सहयोगपूर्ण दृष्टिकोण को बताता है। वृद्धि और मूल्य स्थिरता के दोहरे उद्देश्यों में संतुलन स्थापित करके, यह नीति व्यवसायों और निवेशकों को एक आश्वस्त करने वाला संकेत देती है।’’

नायर ने कहा, ‘‘स्थिर ब्याज दरें कंपनियों को दीर्घकालिक निवेश की योजना अधिक स्पष्टता के साथ बनाने में मदद करेंगी, साथ ही भरोसेमंद उधारी लागतों के माध्यम से उपभोक्ताओं को राहत प्रदान करेंगी।’’

एलएंडटी फाइनेंस के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुदीप्त रॉय ने कहा, ‘‘मौद्रिक नीति समिति की घोषणाएं सूझबूझ और वास्तविक अर्थव्यवस्था में ऋण की स्थिति को सुगम बनाने के बीच सही संतुलन है। नीतिगत दरों में यथास्थिति उम्मीद के मुताबिक है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अपेक्षित ऋण हानि (ईसीएल) रूपरेखा अपनाने, पूंजी बाजार कर्ज के दायरे का विस्तार करने आदि जैसे उपाय सही समय पर उठाये गए कदम हैं। इससे वित्तीय प्रणाली के विकास को जरूरी गति मिलेगी।’’

ज्यूरिख कोटक जनरल इंश्योरेंस के प्रमुख आर्चित शाह ने कहा कि आरबीआई का कदम बताता है कि वह पिछली मौद्रिक नीति समीक्षाओं में उठाये गए कदमों के लाभ पूरी तरह से ग्राहकों तक पहुंचने का इंतजार कर रहा है। आरबीआई का मानना ​​है कि पहले से की गई मौद्रिक ढील को पूरी तरह से लागू होने में समय लगेगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘वृद्धि दर में वृद्धि का संशोधन विराम की गुंजाइश देता है, जबकि मुद्रास्फीति में नरमी का अनुमान दरों को स्थिर रखने को उचित ठहराता है। हालांकि यह रुख वैश्विक जिंस कीमतों में किसी भी तरह की उछाल, राजकोषीय गिरावट या विनिमय दर के दबाव पर निर्भर है जो आरबीआई को कदम उठाने के लिए मजबूर कर सकता है।’’

एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस के प्रबंध निदेशक (एमडी) एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) त्रिभुवन अधिकारी ने कहा,‘‘आरबीआई का रेपो दर को 5.5 प्रतिशत पर बरकरार रखना उम्मीद के मुताबिक है…। रेपो दर स्थिर रहने से घर खरीदने वालों के लिए किफायती आवास की उम्मीद बनी रहेगी।’’

उन्होंने कहा कि इसके साथ ही, जीएसटी परिषद द्वारा निर्माण सामग्री पर कर दरों में कटौती और त्योहारी सीजन की शुरुआत से मध्यम और किफायती आवास क्षेत्र में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।

आनंद राठी ग्रुप के मुख्य अर्थशास्त्री और कार्यकारी निदेशक सुजन हजरा ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति द्वारा नीतिगत दर और रुख में यथास्थिति बनाए रखना उम्मीद के मुताबिक है। लेकिन आने वाले समय में दरों में 0.25 प्रतिशत से 0.50 प्रतिशत की कटौती की संभावना बन रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘घरेलू मोर्चे पर जीएसटी में सुधार और मुद्रास्फीति में नरमी जैसे सकारात्मक संकेत वैश्विक जोखिमों की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी साबित हो सकते हैं। अमेरिका में ब्याज दरों की सख्ती में संभावित कमी भी भारत की नीतिगत दिशा को प्रभावित करेगी। मजबूत वृद्धि और अनुकूल मुद्रास्फीति के साथ विभिन्न मोर्चे पर सुधार भारतीय वित्तीय बाजारों के लिए सहायक माहौल बना रहे हैं।’’

भाषा

योगेश रमण

रमण

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments