नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने शनिवार को केंद्र सरकार से मूल महिला आरक्षण विधेयक को दोबारा पेश करने की मांग की. यह बयान उस समय आया जब एक दिन पहले विशेष संसद सत्र के दौरान संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में पास नहीं हो पाया.
विशेष सत्र के अंतिम दिन से पहले प्रियंका गांधी ने सरकार को चुनौती दी कि वह उस पुराने बिल को वापस लाए जिसे पहले सभी दलों का व्यापक समर्थन मिला था.
उन्होंने कहा, “उन्हें (केंद्र सरकार) पुराना महिला बिल लाना चाहिए, जिसे सभी पार्टियों ने पास किया था, तुरंत सोमवार को लाएं. सोमवार को संसद बुलाएं, बिल लाएं और देखते हैं कौन महिला विरोधी है. हम सभी वोट करेंगे और आपका समर्थन करेंगे.”
उनका यह बयान सत्तारूढ़ भाजपा नीत सरकार और विपक्षी दलों के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव के बीच आया है. यह टकराव उस विधेयक को लेकर है जो महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने को परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ता था.
यह बिल लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका. इसके पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसका विरोध किया.
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने घोषणा की कि संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हुआ है. इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार इससे जुड़े बाकी दो विधेयकों को आगे नहीं बढ़ाएगी.
भाजपा ने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले ऐतिहासिक सुधार को रोक दिया. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस, टीएमसी और अन्य दलों ने बिल को पास नहीं होने दिया और इसके राजनीतिक परिणाम भुगतने की चेतावनी दी.
वहीं, विपक्ष का कहना है कि वह सिद्धांत रूप से महिला आरक्षण का समर्थन करता है, लेकिन इसे परिसीमन और जनगणना से जोड़ने का विरोध करता है. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस बिल को भारत की चुनावी संरचना बदलने की कोशिश बताया, जबकि कांग्रेस के कई नेताओं ने इस वोटिंग को लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा बताया.