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Thursday, 26 February, 2026
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कार्यस्थल पर रोना असामान्य नहीं, मानवीय व्यवहार का स्वाभाविक हिस्सा: विशेषज्ञ

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(रॉबिन जान्स एवं रोवेना डिजेल, यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, सिडनी)

सिडनी, तीन सितंबर (द कन्वरसेशन) कार्यस्थल पर कामकाज की समीक्षा के दौरान जब एक कर्मचारी जेन भावनात्मक रूप से टूट जाती है और रोने लगती है, तो उसका प्रबंधक असहज हो जाता है और स्थिति को ठीक से संभाल नहीं पाता। ऐसे में यह सवाल उठता है कि इस स्थिति में कोई व्यक्ति कैसे प्रतिक्रिया देगा और अगर रोने वाला व्यक्ति कोई और होता तो क्या वही प्रतिक्रिया होती?

विशेषज्ञों के अनुसार, भले ही सामान्य धारणा यह हो कि कार्यस्थल पर रोना अनुचित है, लेकिन यह व्यवहारिक रूप से असामान्य नहीं है।

हाल ही में मानसिक स्वास्थ्य ऐप कंपनी ‘हेडस्पेस’ द्वारा कराए गए एक सर्वेक्षण के मुताबिक, कार्यालय में काम करने वाले 48 फीसदी कर्मचारी और कार्यालय या अन्य जगहों से काम करने वाले 44 फीसदी कर्मचारी कार्य से संबंधित कारणों से रो चुके हैं। पूरी तरह से दूरस्थ स्थान पर कार्य करने वालों में यह आंकड़ा 70 फीसदी है।

रोना सामान्य है

कार्यस्थल पर रोने के कई कारण हो सकते हैं — जैसे कार्यभार का अत्यधिक दबाव, सहकर्मियों से मतभेद, या बड़े स्तर पर परिवर्तन। कई बार कर्मचारी निजी कारणों से भी परेशान होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, रोना एक स्वाभाविक और स्वस्थ प्रतिक्रिया है, जिसे दबाना नहीं चाहिए।

कार्यस्थल पर रोना अलग क्यों महसूस होता है?

शादी, अंतिम संस्कार या अन्य सामाजिक अवसरों पर रोना सामान्य माना जाता है, लेकिन कार्यालय में ऐसा होना कई बार असहज बना देता है। इससे न केवल रोने वाला व्यक्ति बल्कि आसपास के लोग भी असहज हो जाते हैं। इस स्थिति में रोने वाले की मंशा पर भी सवाल उठ सकते हैं कि क्या वह वास्तव में परेशान है या स्थिति को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है?

यदि रोना किसी उचित कारण जैसे व्यक्तिगत संकट या काम के प्रति गहरी भावना के कारण माना जाए, तो समाज इसे अधिक स्वीकार करता है। लेकिन अगर यह बार-बार हो और प्रदर्शन को प्रभावित करे, तो यह करियर के लिए हानिकारक हो सकता है।

लैंगिक रूढ़ियाँ भी जिम्मेदार

इस विषय में लैंगिक मानदंड भी अहम भूमिका निभाते हैं। महिलाएं यदि कार्यस्थल पर रोती हैं तो उन्हें अक्सर अधिक भावुक, कमजोर और गैर-पेशेवर माना जाता है। दूसरी ओर, पुरुषों द्वारा रोना सामाजिक मानकों के विरुद्ध समझा जाता है, जिससे वे भावनाएं दबाने को मजबूर हो जाते हैं।

कैसे दें प्रतिक्रिया

विशेषज्ञों के अनुसार, कार्यस्थल पर किसी के रोने की स्थिति में निम्नलिखित सुझाव उपयोगी हो सकते हैं:

रोने वाले व्यक्ति के लिए:

1 – ध्यान केंद्रित करें, गहरी सांस लें और अपने विचारों को केंद्रित करें।

2 – ब्रेक लें और खुद को संभालने के लिए समय निकालें।

3 – भावनाओं को खुद पर हावी होने देने के बजाय सोच कर बताएं कि यह प्रतिक्रिया देखभाल या जुनून से प्रेरित है।

4 – मदद लेने में न हिचकिचाएं और यदि ज़रूरत हो तो डॉक्टर या काउंसलर की सहायता लें।

प्रबंधक या सहकर्मी के लिए:

1 – सामने वाले की मदद के लिए तैयार रहें। कार्यस्थल पर ऐसे क्षण सामान्य हैं। एक शांत स्थान और टिशू जैसी छोटी चीज़ें मददगार हो सकती हैं।

2 – दूसरों के प्रति संवेदनशील बनें। सामने वाले की बात ध्यान से सुनें, निष्कर्ष पर न पहुंचें और सीमाओं का सम्मान करें।

3 – पूर्वाग्रहों को चुनौती दें बजाय इसके कि उन्हीं पर चलें। ध्यान रहे कि एक बार का रोना व्यक्ति की कमजोरी नहीं दर्शाता।

4 – अपनी भूमिका समझें और सोचें कि क्या यह स्थिति आपके नियंत्रण के तहत है?

5 – पेशेवर सहायता लें। यदि आवश्यक हो तो विशेषज्ञ से मदद लें।

विशेषज्ञों का कहना है कि जीवन की अनिश्चितताओं और तनाव के बीच यह स्वाभाविक है कि कर्मचारी कभी-कभी भावनाओं के अतिरेक में बह जाएं। ऐसे में रोना एक सामान्य मानवीय प्रतिक्रिया है, जिसे कार्यस्थल पर भी समझदारी और संवेदनशीलता से संभाला जाना चाहिए।

द कन्वरसेशन नरेश मनीषा

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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