इंदौर (मध्यप्रदेश), 31 जनवरी (भाषा) पद्मश्री से नवाजे गए अंतरराष्ट्रीय पैरा तैराक सतेंद्र सिंह लोहिया को इस मुकाम तक पहुंचने के लिए शारीरिक, मानसिक और सामाजिक चुनौतियों के महासागरों को पार करना पड़ा है।
राज्य के मुरैना जिले के गाता गांव से ताल्लुक रखने वाले लोहिया (35) ने बुधवार को यहां ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा,‘‘पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुना जाना बहुत बड़ी बात है जिसे मैं महसूस तो कर सकता हूं, पर शब्दों में बयान नहीं कर सकता।’’
उन्होंने,‘‘शुरुआत में लोग मुझे हमदर्दी की नजर से देखते थे। वे कहते थे कि पैरों में समस्या के कारण मेरी जिंदगी बर्बाद हो गई है, लेकिन मैंने सोचा कि मुझे लोगों की सहानुभूति का नहीं, बल्कि उनके सम्मान का पात्र बनना है। इसके लिए मैंने अपने मन में शक्ति जुटाई।’’
लोहिया के मुताबिक बचपन में चिकित्सकों की कथित लापरवाही के कारण पैरों पर दवा के दुष्प्रभाव से 12 साल की उम्र में उन्हें चलने में दिक्कत पेश आने लगी जो लगातार बढ़ती चली गई।
उन्होंने बताया,‘‘मैंने बचपन में अपने गांव की नदी में तैरना सीखा, लेकिन मुझे तैराकी के तकनीकी गुर पता नहीं थे। मैंने ग्वालियर में महाविद्यालय की पढ़ाई के दौरान ये गुर सीखे और पेशेवर तौर पर इस खेल में आगे बढ़ने के बारे में सोचा।’’
लोहिया ने बताया कि उन्होंने 2017 में इंग्लिश चैनल तैर कर पार करने की कोशिश की, लेकिन अत्यधिक ठंड के कारण उन्हें इसमें कामयाबी नहीं मिली।
उन्होंने कहा,‘‘…लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी। मैंने भारतीय रिले दल के साथ 2018 में इंग्लिश चैनल पार किया और इसके साथ ही हमने नया एशियाई कीर्तिमान भी बनाया।’’
कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए पदक जीत चुके लोहिया तैराकी की बैकस्ट्रोक शैली में महारत रखते हैं। अब उनकी नजर 2026 में जापान में होने वाले एशियाई पैरा खेलों पर है।
लोहिया को ‘तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार’ और मध्यप्रदेश के सर्वोच्च खेल अलंकरण ‘विक्रम पुरस्कार’ से भी नवाजा जा चुका है। वह राज्य सरकार के वाणिज्यिक कर विभाग में काम करते हैं।
भाषा हर्ष नरेश सुधीर
सुधीर
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