हांगझोउ, चार अक्टूबर ( भाषा ) पिछले 41 साल में पहली बार एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने से दो जीत दूर भारतीय महिला हॉकी टीम सेमीफाइनल में बुधवार को तीन बार की चैम्पियन चीन से खेलेगी तो उसे मेजबान विरोधी टीम के अलावा दर्शकों की चुनौती से भी निपटना होगा ।
भारतीय महिला टीम ने 2018 में जकार्ता में रजत पदक जीता था लेकिन इस बार सविता पूनिया की अगुवाई में शानदार प्रदर्शन कर रही टीम स्वर्ण पदक की प्रबल दावेदार है ।
भारत ने एशियाई खेलों में एकमात्र स्वर्ण 1982 में दिल्ली में जीता था जब महिला हॉकी पहली बार खेली गई थी । उसके बाद से टीम तीन कांस्य और दो रजत पदक जीत चुकी है ।
भारत विश्व रैकिंग में इस समय सातवें और चीन 12वें स्थान पर है । भारत ने पहले मैच में सिंगापुर को 13 . 0 से, फिर मलेशिया को 6 . 0 से और हांगकांग को 13 . 0 से हराया जबकि दक्षिण कोरिया से 1 . 1 से ड्रॉ खेला ।
दक्षिण कोरिया के खिलाफ मैच को छोड़कर भारतीय डिफेंस को कड़ी चुनौती नहीं मिली है । फॉरवर्ड पंक्ति और मिडफील्ड ने मिलकर जमकर गोल दागे हैं और वे इस लय को कायम रखना चाहेंगे ।
दीपिका और दीप ग्रेस इक्का ने पेनल्टी कॉर्नर को भुनाया है जबकि वंदना कटारिया, संगीता कुमारी, नवनीत कौर और लालरेम्सियामी ने फील्ड गोल दागे हैं ।
भारतीय कप्तान सविता ने कहा ,‘‘ हमारे लिये यह खास पल है । हमने अभी तक बहुत अच्छा खेला है लेकिन सेमीफाइनल की चुनौती अलग है । चीन की टीम मजबूत है और एशियाई खेलों में अच्छा प्रदर्शन करती आई है लेकिन हम भी तैयार हैं ।’’
चीन ने पूल चरण में इंडोनेशिया , कजाखस्तान और थाईलैंड को हराया लेकिन जापान से हार गया ।
भारत और चीन के बीच खेले गए 22 मैचों में से 11 भारत ने, नौ चीन ने जीते और दो ड्रॉ रहे ।
भाषा मोना सुधीर
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