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Friday, 6 March, 2026
होमखेलभारतीय निशानेबाजों को दो स्वर्ण सहित सात पदक, सरवनन को कांसा, रोशिबिना ने वुशु में रजत पक्का किया

भारतीय निशानेबाजों को दो स्वर्ण सहित सात पदक, सरवनन को कांसा, रोशिबिना ने वुशु में रजत पक्का किया

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हांगझोउ, 27 सितंबर (भाषा) भारतीय निशानेबाजों ने बुधवार को यहां एशियाई खेलों की शूटिंग रेंज में दबदबा बनाते हुए दो स्वर्ण सहित सात पदक अपने नाम किये और भारतीय पाल नौकायन खिलाड़ी विष्णु सरवनन ने पुरूषों की डिंगी आईएलसीए 7 स्पर्धा में देश को पहला कांस्य पदक दिलाया जबकि प्रतिभाशाली वुशु खिलाड़ी रोशिबिना देवी ने कम से कम रजत पदक पक्का कर दिया।

भारत के इस तरह चौथे दिन पांच स्वर्ण, सात रजत और 10 कांस्य से कुल 22 पदक हो गये हैं। निशानेबाजी ने अभी तक तीन स्वर्ण सहित 12 पदक जीत लिये हैं और देश 2018 खेलों में अपने निशानेबाजी प्रदर्शन में सुधार कर चुका है जहां उसने नौ पदक जीते थे।

रोशिबिना ने वियतनाम की थि थु एनगुएन को 2-0 से हराकर 60 किग्रा के फाइनल में प्रवेश किया इस स्पर्धा में कम से कम रजत पदक पक्का हो गया।

युवा निशानेबाज सिफ्ट कौर सामरा ने 469.6 के विश्व रिकॉर्ड स्कोर के साथ महिला 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन स्पर्धा में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीता। वह राइफल थ्री पोजीशन में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय निशानेबाज भी बनीं।

निशानेबाजी में दूसरा स्वर्ण पदक मनु भाकर, ईशा सिंह और रिदम सांगवान की तिकड़ी ने कुल 1759 अंक बनाकर महिला 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा टीम स्पर्धा में दिलाया। ईशा ने 25 मीटर पिस्टल व्यक्तिगत स्पर्धा में 34 अंक के साथ रजत पदक भी जीत लिया।

सिफ्ट की ही स्पर्धा में आशी चौकसी ने 451.9 अंक के साथ कांस्य पदक जीता जो एक समय रजत पदक की दौड़ में शामिल थी।

निशानेबाजी के दिन के अंतिम फाइनल में अनंत जीत सिंह नरुका ने पुरुष स्कीट स्पर्धा में रजत पदक जीता। उन्होंने इससे पहले अंगद वीर सिंह बाजवा और गुरजोत खांगुरा के साथ मिलकर टीम स्पर्धा का कांस्य पदक भी जीता। नरुका, बाजवा और खांगुरा की तिकड़ी ने टीम स्पर्धा में 355 अंक के साथ तीसरा स्थान हासिल किया।

भारत की महिला टीम हालांकि स्कीट स्पर्धा में चौथे स्थान पर रहते हुए स्पर्धा से बाहर हो गई।

सिफ्ट ने क्वालीफिकेशन में 600 में से 594 अंक से चीन की शिया सियु के साथ एशियाई खेलों का रिकॉर्ड तोड़ा। चीन की खिलाड़ी हालांकि 10 अंक के अंदरूनी हिस्से में अधिक निशाने लगाकर शीर्ष पर रही।

आशी चौकसी, माणिनी कौशिक और सिफ्ट कौर सामरा ने मिलकर महिला 50 मीटर राइफल 3पी टीम स्पर्धा में रजत पदक जीता। आशी, माणिनी और सिफ्ट की तिकड़ी ने क्वालीफिकेशन में 1764 अंक के साथ दूसरे स्थान पर रहते हुए महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन में दूसरा स्थान हासिल किया।

तोक्यो ओलंपिक खेल चुके विष्णु सरवनन ने 11 रेस की स्पर्धा में 34 नेट स्कोर बनाया जिससे वह पुरूषों की डिंगी आईएलसीए 7 स्पर्धा में एक अंक से रजत पदक से चूक गए। पाल नौकायन में इस तरह भारत को एक रजत और दो कांस्य पदक मिल गये हैं। नेहा ठाकुर ने कल रजत और इबाद अली ने कांस्य पदक जीता था।

भारतीय पाल नौकायन खिलाड़ियों ने 2018 में जकार्ता खेलों में भी एक रजत और दो कांस्य जीते थे।

हवा का बहाव कम रहने के कारण भारत महिलाओं के एकल डिंगी आईएलसीए 6 में पदक नहीं जीत सका और नेत्रा कुमानन को चौथे स्थान से ही संतोष करना पड़ा।

महिला वुशु स्पर्धा रोशिबिना ने अपनी प्रतिद्वंद्वी को कोई मौका नहीं दिया और अब वह गुरुवार को स्वर्ण पदक के मैच में चीन की वु जियावेई से भिड़ेंगी। बल्कि यह रोशिबिना की ऐतिहासिक उपलब्धि है क्योंकि वह संध्यारानी देवी के बाद वुशु स्पर्धा के फाइनल में पहुंचने वाली दूसरी भारतीय हैं। संध्यारानी ने 2010 ग्वांग्झू एशियाड में यह उपलब्धि हासिल की थी।

रामकुमार रामनाथन और साकेत मयनेनी की जोड़ी ने पुरुष युगल के सेमीफाइनल में जगह बनाकर टेनिस स्पर्धा में भारत का एक पदक पक्का किया लेकिन एकल खिलाड़ी सुमित नागल और अंकिता रैना को क्वार्टर फाइनल में हारने के कारण खाली हाथ लौटना पड़ेगा।

भारत के हृदय विपुल छेदा, अनुष अग्रवाला और दिव्यकृति सिंह ने अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए घुड़सवारी स्पर्धा के व्यक्तिगत ड्रेसेज फाइनल के लिए क्वालीफाई किया जिससे वे पदक की दौड़ में बने हुए हैं।

हृदय, अनुष, दिव्यकृति और सुदिप्ती ने मंगलवार को ऐतिहासिक टीम ड्रेसेज स्वर्ण पदक जीता था।

मुक्केबाजी में दो बार की विश्व चैम्पियन मुक्केबाज निकहत जरीन (50 किग्रा) ने क्वार्टरफाइनल में प्रवेश किया जबकि भारत के अनुभवी मुक्केबाज शिव थापा (63.5 किग्रा) और संजीत (92 किग्रा) प्रतियोगिता से बाहर हो गये।

निकहत ने महिला स्पर्धा दूसरे दौर में दक्षिण कोरिया की चोरोंग बाक पर 5-0 से आसान जीत हासिल की।

रिकॉर्ड छह बार एशियाई चैम्पियनशिप पदक जीतने वाले शिव आसान ड्रा का फायदा नहीं उठा सके और प्री क्वार्टरफाइनल में किर्गिस्तान के अस्कत कुलताएव से 0-5 से हार गये।

संजीत को विश्व चैम्पियनशिप के कांस्य पदक विजेता लाजिजबेक मुलोजोनोव से 0-5 से हार मिली।

भारतीय शतरंज खिलाड़ियों से व्यक्तिगत स्पर्धा में पदक जीतने की उम्मीदें लगी हुई थीं लेकिन वे ऐसा करने में नाकाम रहे।

ग्रैंडमास्टर विदित गुजराती (5.5 अंक) और अर्जुन एरिगैसी (5.5) पुरुष वर्ग में क्रमशः पांचवें और छठे स्थान पर रहे, जबकि महिला वर्ग में पूर्व कांस्य पदक विजेता डी हरिका (6 अंक) चौथे और 2006 की चैंपियन कोनेरू हम्पी सातवें स्थान पर रहीं।

गुजराती अंतिम दौर की बाजी में उज्बेकिस्तान के जावोखिर सिंदारोव से हार गए, जिससे उनकी पदक की उम्मीदें खत्म हो गईं। एरिगैसी भी अपने खेल में निरंतरता नहीं बनाए रख पाए। उन्होंने अंतिम दौर में बांग्लादेश के इनामुल हुसैन को हराकर जीत के साथ अपने अभियान का अंत किया।

महिला वर्ग में हरिका और हम्पी आठवें दौड़ ने एक दूसरे के सामने थी। यह बाजी ड्रॉ रही। हरिका ने नौवें और अंतिम दौर में स्वर्ण पदक विजेता जिनेर झू (चीन) को हराया जबकि हम्पी ने बिबिसारा असौबायेवा (कजाकिस्तान) के खिलाफ बाजी ड्रॉ कराई।

युवा स्ट्राइकर संगीता कुमारी की हैट्रिक समेत अपने खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन के दम पर भारतीय महिला हॉकी टीम ने पूल ए के अपने पहले मैच में सिंगापुर को 13 . 0 से हराया ।

भारत ने पहले दो क्वार्टर में आठ और आखिरी दो क्वार्टर में पांच गोल किये ।

विश्व रैंकिंग में सातवें स्थान पर काबिज भारत का सामना पूल ए के मैच में 34वीं रैंकिंग वाली टीम से था । तोक्यो ओलंपिक में चौथे स्थान पर रही भारतीय टीम के लिये संगीता (23वां, 53वां, 47वां मिनट ) ने तीन गोल किये जबकि नवनीत कौर ने 14वें मिनट में लगातार दो गोल दागे ।

दीपिका (11वां), सुशीला चानू (आठवां), उदिता (छठा), नेहा (19वां ), दीप ग्रेस इक्का ( 17वां), सलीमा टेटे (35वां), वंदना कटारिया (56वां ) और मोनिका (52वां ) ने गोल दागे ।

भारतीय स्क्वाश खिलाड़ियों ने अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए पुरूष और महिला वर्ग में आसान जीत दर्ज की ।

महिला टीम ने नेपाल को हराया जबकि पुरूष टीम ने कुवैत को मात दी । दोनों टीमों ने 3 . 0 के अंतर से मुकाबला जीता ।

टेनिस स्पर्धा में नागल के लिये दुनिया के 60वें नंबर के खिलाड़ी जिझेन झांग को हराना आसान नहीं था। वह दो घंटे 16 मिनट में 7 . 6, 1 . 6, 2 . 6 से हार गए ।

सोमदेव देववर्मन ने 2010 में पुरूष एकल में स्वर्ण जीता था । उसके बाद युकी भांबरी (2014 इंचियोन) और प्रजनेश गुणेश्वरन ( 2018 जकार्ता ) ने कांस्य पदक जीता था ।

दोहा में 2006 में हुए खेलों में रोहन बोपन्ना और करण रस्तोगी एकल वर्ग में पदक दौर में नहीं पहुंच सके थे ।

रैना को जापान की हारूका राजी ने क्वार्टर फाइनल में 3 . 6, 6 . 4, 6 . 4 से हराया ।

रामकुमार रामनाथन तीसरे और रूतुजा भोसले दूसरे दौर में ही हार गए थे।

भारतीय महिला तलवारबाजी टीम एशियाई खेलों में एपी वर्ग में जुझारू प्रदर्शन के बावजूद क्वार्टर फाइनल में हार गई जबकि पुरूष टीम फॉइल वर्ग में अंतिम 16 में सिंगापुर से 30 . 45 से हारकर बाहर हो गई ।

शिवांश त्यागी और मारग्रेट मारिया रेगी की हार के साथ ताइक्वांडो प्रतियोगिता में भारतीय अभियान खत्म हो गया।

भारत के वुशू खिलाड़ी रोहित जाधव पुरूषों के डाओशू फाइनल में निराशाजनक आठवें स्थान पर रहे ।

भाषा नमिता पंत

पंत

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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