नयी दिल्ली, 26 जून (भाषा) उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के.वी. विश्वनाथन ने सोमवार को रियल एस्टेट कंपनी आईआरईओ से जुड़े धनशोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) एवं अन्य की याचिकाओं की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया।
ईडी ने दिल्ली उच्च न्यायालय के नौ जून के उस आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया है, जिसमें एम3एम समूह के मालिकों- बसंत बंसल और पंकज बंसल, को इस मामले में पांच जुलाई तक गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दी गई है।
याचिकाएं न्यायमूर्ति ए. एस. ओका और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध थीं।
न्यायमूर्ति विश्वनाथन ने सुनवाई के दौरान कहा कि वह एक वकील के तौर पर पहले एक संबंधित मामले में पेश हुए थे, इसलिए वह मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर रहे हैं।
इसके बाद पीठ ने कहा कि याचिकाओं को अगले सप्ताह उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए।
पिछले महीने शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण करने वाले न्यायमूर्ति विश्वनाथन पहले एक वरिष्ठ अधिवक्ता थे।
उच्च न्यायालय के 16 जून के आदेश को चुनौती देने वाली अलग-अलग याचिकाओं को भी सुनवाई के लिए शीर्ष अदालत के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था। उच्च न्यायालय ने एक पूर्व न्यायाधीश और अन्य के खिलाफ कथित रिश्वत मामले से जुड़े धनशोधन की जांच के सिलसिले में बसंत और पंकज बंसल की गिरफ्तारी में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया था।
गुरुग्राम स्थित रियल्टी समूह एम3एम के निदेशक बसंत और पंकज बंसल को कथित रिश्वत मामले से जुड़े धनशोधन की जांच के सिलसिले में ईडी ने पहले गिरफ्तार किया था।
उच्च न्यायालय ने गिरफ्तारी-पूर्व जमानत याचिकाओं के जवाब में स्थिति रिपोर्ट के साथ-साथ अन्य दस्तावेज दाखिल करने के लिए ईडी को पांच जुलाई तक का समय दिया था।
भाषा सुरेश माधव
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