पोर्ट ब्लेयर, 29 अप्रैल (भाषा) अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने और बेहतर संचार स्थापित करने के लिए जनजातीय समुदायों पर व्यापक शोध के लिए जल्द ही विशेषज्ञों की एक केंद्रीय टीम का गठन किया जाएगा। जनजातिय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा ने यह जानकारी दी।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि टीम का गठन प्रधानमंत्री पीवीटीजी मिशन के तहत किया जाएगा। टीम यह पता लगाएगी कि जनजातीय समूहों को ठेस पहुंचाए बिना उन इलाकों में पहुंचने के लिए कौन-कौन से तरीके अपनाये जाने चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उन्होंने मानव विज्ञान विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से जरूरी योजना बनाने और जल्द रिपोर्ट देने को कहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह मिशन तीन वर्षों के भीतर पूरा किया जाएगा।’’
मुंडा बृहस्पतिवार को पोर्ट ब्लेयर पहुंचे और केंद्र के सभी कल्याणकारी योजनाओं को पीवीटीजी तक पहुंचाने के लिए विभिन्न जनजातीय समूहों से मुलाकात की।
उन्होंने लिटिल अंडमान में डुगोंग क्रीक का दौरा किया और ओंग जनजाति के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। उन्होंने उन्हें सब्जियों के बीज और मछली पकड़ने के उपकरण भी वितरित किए।
इसके अलावा उन्होंने ‘कैंपबेल बे’ का भी दौरा किया और शोम्पेन और निकोबारी जनजातियों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की।
भाषा साजन संतोष
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