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Sunday, 26 April, 2026
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साल 2006 का मुंबई ट्रेन विस्फोट: अदालत ने मौत की सजा का सामना कर रहे दोषी की याचिका खारिज की

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नयी दिल्ली, 18 अप्रैल (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को 2006 के मुंबई ट्रेन विस्फोट मामले में मौत की सजा का सामना कर रहे एक दोषी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें आतंकवादी संगठन इंडियन मुजाहिदीन पर लगाए गए प्रतिबंध से संबंधित जानकारी का खुलासा करने की मांग की गई थी।

एहतेशाम कुतुबुद्दीन सिद्दीकी ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत याचिका दायर की थी, जिसमें संगठन पर प्रतिबंध के संबंध में केंद्र के “बैकग्राउंड नोट्स” और गुजरात, दिल्ली और आंध्र प्रदेश की राज्य सरकारों की रिपोर्ट मांगी गई थी। ऐसा कहा गया था कि विस्फोट संगठन द्वारा किया गया था। संगठन को कड़े आतंकवाद विरोधी कानून गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत प्रतिबंधित किया गया था।

याचिकाकर्ता ने मुख्य सूचना आयुक्त (सीआईसी) द्वारा 13 जून, 2019 को पारित एक आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, जिसमें उसे इस आधार पर सूचना देने से इनकार कर दिया गया था कि यह सूचना आरटीआई अधिनियम में प्रदान की गई छूट के तहत आती है।

सीआईसी के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए, न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा मांगी गई जानकारी के दूरगामी परिणाम हैं और इसे “जनता और राष्ट्र की सुरक्षा के बड़े मुद्दे” के नजरिये से देखा जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि सिद्दीकी ने जो जानकारी मांगी है, यदि प्रदान की जाती है, तो इसका देश की संप्रभुता और सुरक्षा पर असर पड़ेगा।

अदालत ने कहा, “जानकारी को देखने से पता चलता है कि इसके दूरगामी परिणाम होते हैं। एक ही संगठन को 2005 के बाद से कई दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं में शामिल बताया गया है, जिनमें से कुछ में जान-माल का गंभीर नुकसान हुआ है।”

अदालत ने फैसला सुनाया, “उपरोक्त के मद्देनजर, रिट याचिका में कोई दम नहीं है और खारिज की जाती है।”

सिद्दीकी को 11 जुलाई, 2006 के सिलसिलेवार बम धमाकों के लिए मृत्युदंड दिया गया था। साल 2006 में मुंबई में पश्चिमी लाइन की कई लोकल ट्रेन में आरडीएक्स से भरे सात बम फटे थे, जिसमें 189 लोग मारे गए थे और 829 घायल हुए थे।

भाषा प्रशांत दिलीप

दिलीप

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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