नयी दिल्ली, 16 फरवरी (भाषा) नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने बृहस्पतिवार को कहा कि बजट में संपत्ति को बाजार पर चढ़ाने तथा निजीकरण पर और जोर होना चाहिए था। साथ ही सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं के लिए और कोष का आवंटन किया जाना चाहिए था।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक फरवरी को लोकसभा में 2023-24 का बजट पेश किया।
केंद्रीय बजट 2023 और उसके बाद विषय पर चर्चा में भाग लेते हुए कुमार ने कहा, ‘‘निजीकरण और संपत्ति मौद्रीकरण पर जोर दिया जाना चाहिए था। मुझे इसका जिक्र नहीं दिखा।’’
उन्होंने यह भी कहा कि 51,000 करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य काफी कम है।
कुमार ने कहा, ‘‘एक मायने में, मुझे लगता है कि अर्थव्यवस्था में निजी निवेश के लिये जगह कम होती जा रही है। और मुझे लगता है कि यह कुछ ऐसा है जो तथ्य से भी पता चलता है। वाणिज्यिक बैंक कर्ज वृद्धि को दहाई अंक में जरूर है लेकिन उद्योग के लिये वाणिज्यिक बैंक ऋण अभी भी एकल अंक में है। शायद ही ऋण की कोई मांग है।’’
उन्होंने सुझाव दिया कि संपत्ति मौद्रीकरण के जरिये जो राशि जुटायी जा रही है, उसका उपयोग सार्वजनिक कर्ज लौटाने में किया जाना चाहिए।
बजट में अगले वित्त वर्ष में विनिवेश से 51,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिये विनिवेश लक्ष्य को 65,000 करोड़ रुपये से घटाकर 50,000 करोड़ रुपये कर दिया है।
भाषा रमण अजय
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