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Tuesday, 28 April, 2026
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श्रीलंका : अटॉर्नी जनरल ने पुलिस प्रमुख से देश में हुई हिंसा की जांच शुरू करने को कहा

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कोलंबो, 10 मई (भाषा) श्रीलंका के अटॉर्नी जनरल ने मंगलवार को पुलिस प्रमुख से देश में सरकार विरोधी और सरकार समर्थक प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पों की तत्काल और पूर्ण जांच करने को कहा है। इन झड़पों में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई तथा 200 से अधिक घायल हो गए।

श्रीलंका में सोमवार को उस वक्त हिंसा भड़क गई थी जब पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के समर्थकों ने शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर हमला किया था। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोग देश के सबसे खराब आर्थिक संकट को लेकर प्रधानमंत्री को हटाने की मांग कर रहे थे।

कोलंबो और अन्य शहरों में हिंसा में 200 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।

‘न्यूज फर्स्ट’ समाचार पोर्टल की खबर के अनुसार, अटॉर्नी जनरल संजय राजारत्नम ने पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) को लोगों के संवैधानिक अधिकार में गैरकानूनी हस्तक्षेप, किन वजहों से यह परिस्थितियां बनीं…उनकी पूर्ण जांच करने को कहा।

खबर के मुताबिक, आईजीपी को लिखे एक पत्र में अटॉर्नी जनरल ने कहा कि कोलंबो शहर में हुई घटना ने देश भर में गंभीर हिंसा को हवा दी जिसमें जान-माल का नुकसान हुआ। उन्होंने पुलिस प्रमुख को पूरे प्रकरण की जांच की सलाह दी।

उन्होंने आईजीपी से अनुरोध किया कि जांच को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करें।

श्रीलंका में घोर आर्थिक संकट के बीच महिंदा राजपक्षे (76) ने सोमवार को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इससे कुछ ही घंटों पहले, उनके समर्थकों ने सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर हमला किया था, जिसके कारण प्राधिकारियों को राजधानी में सैन्य बलों को तैनात करना पड़ा और राष्ट्रव्यापी कर्फ्यू लगाना पड़ा।

इस हिंसा के दौरान हंबनटोटा में राजपक्षे के पैतृक आवास सहित कई नेताओं के आवासों में आगजनी की गई। वीडियो फुटेज में हंबनटोटा शहर के मेदामुलाना में महिंदा राजपक्षे और उनके छोटे भाई एवं राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे का आवास जलता दिखाई दे रहा है।

कुरुनेगला स्थित महिंदा राजपक्षे के आवास में भी प्रदर्शनकारियों ने आग लगा दी और भीड़ ने हंबनटोटा के मेदामुलाना में महिंदा और गोटबाया के पिता की स्मृति में निर्मित डी ए राजपक्षे मेमोरियल को भी नष्ट कर दिया।

वर्ष 1948 में ब्रिटेन से आजादी मिलने के बाद श्रीलंका अब तक के सबसे गंभीर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। यह संकट मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा की कमी के कारण पैदा हुआ, जिसका अर्थ है कि देश मुख्य खाद्य पदार्थों और ईंधन के आयात के लिए भुगतान नहीं कर पा रहा है।

भाषा

प्रशांत वैभव

वैभव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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