कोलकाता, 19 फरवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु ने शनिवार को कहा कि उन्हें उनके विभाग के किसी ऐसे मसौदे की जानकारी नहीं है, जिसमें स्कूलों के लिये सरकारी-निजी भागीदारी(पीपीपी) मॉडल का प्रस्ताव दिया गया हो। मंत्री का यह बयान वामपंथी संगठनों की उस धमकी के एक दिन बाद आया है, जिसमें इस तरह के कदम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की बात कही गई थी।
स्कूली शिक्षा विभाग के नाम से एक अहस्ताक्षरित और बिना तारीख वाला नोटिस हाल ही में सोशल मीडिया पर दिखा था। इसमें कहा गया था कि सरकार पीपीपी मॉडल के माध्यम से विद्यालयों को संचालित करने का इरादा रखती है। बसु ने कोलकाता में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि इस संबंध में मुख्यमंत्री संग उनकी कोई बैठक नहीं हुई थी।
मंत्री ने कहा कि अटकलों के आधार पर किसी का बयान देना गलत है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे ऐसे किसी मसौदे या नोटिस की जानकारी नहीं है और ना ही मुख्यमंत्री से इस बारे में कोई चर्चा हुई है, फिर इसका आधार क्या है?’’ यह पूछे जाने पर कि क्या नोटिस फर्जी है, बसु ने कहा कि वह इस मामले को देखेंगे।
शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को पीटीआई-भाषा को बताया था कि उसके प्रमुख सचिव मनीष जैन ने पिछले महीने अन्य संबद्ध विभागों के प्रमुखों को लिखे पत्र में स्कूलों के लिए पीपीपी मॉडल पर उनकी राय मांगी थी। अधिकारी ने यह भी लिखा था कि सरकार विरोध के मद्देनजर कोई कदम उठाने से पहले ‘स्थिति को सतर्कता के साथ देखेगी।’
भाषा संतोष दिलीप
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