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Saturday, 25 April, 2026
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‘एमएसजी’ और ‘टेबल साल्ट’ में क्या फर्क है? एक रसायनविद की नजर में

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(नाथन किलाह, तस्मानिया विश्वविद्यालय)

तस्मानिया, 10 सितंबर (द कन्वरसेशन) रात के खाने का समय हो गया है। आपने पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन तैयार करने के लिए कड़ी मेहनत की है। लेकिन पहला निवाला लेने के बाद आपको लगता है कि कुछ कमी रह गई है। शायद आपको ज़्यादा नमक डालना चाहिए था। काली मिर्च, या शायद कुछ ज़्यादा चटपटा जैसे मोनोसोडियम ग्लूटामेट, जिसे ‘एमएसजी’ के नाम से जाना जाता है।

घर में खाना पकाने और व्यावसायिक उत्पादों दोनों में कई खाद्य योजकों का उपयोग किया जाता है। ये तत्व खाद्य पदार्थों के स्वाद, गंध, बनावट एवं रूप को बेहतर बनाते हैं एवं उन्हें लंबे समय तक उपयोग लायक बनाते हैं।

लवण और ‘एमएसजी’ दो जाने-माने योजक हैं। दोनों में सोडियम होता है लेकिन उनमें काफी फर्क होता है जिसका आप अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

लवण क्या होता है?

लवण धनात्मक और ऋणात्मक रूप से आवेशित घटकों से बने होते हैं जिन्हें ‘आयन’ कहते हैं। लवण आम तौर पर पानी में घुल जाते हैं और भंगुर होते हैं। लवणों के नामों में अक्सर एक धातु (धनात्मक रूप से आवेशित) के बाद एक अधातु (ऋणात्मक रूप से आवेशित) होता है।

रसोई में आम तौर पर इस्तेमाल होने वाला पदार्थ, जिसे हम ‘नमक’ कहते हैं, बस एक प्रकार लवण है। अन्य सभी लवणों से इसका फर्क करने के लिए, हमें इसे ज्यादातर ‘टेबल सॉल्ट (टेबल नमक)’ कहना चाहिए। रासायनिक रूप से, यह सोडियम क्लोराइड है।

सोडियम क्लोराइड।

रसायन के उपरोक्त त्वरित पाठ के बाद हम देख पाते हैं कि टेबल साल्ट, सोडियम क्लोराइड में धनात्मक रूप से आवेशित सोडियम और ऋणात्मक रूप से आवेशित क्लोरीन होता है।

ये आवेशित घटक नमक के क्रिस्टल में एक नियमित दोहराव पैटर्न में सजे हैं। प्रत्येक सोडियम ‘आयन’ छह क्लोराइड आयनों से घिरा होता है और प्रत्येक क्लोराइड ‘आयन’ छह सोडियम ‘आयन’ से घिरा होता है। यह व्यवस्था क्रिस्टल को एक ‘घन’ का आकार देती है। यदि आप नमक को ध्यान से देखें, तो आपको घन के आकार के क्रिस्टल दिखाई दे सकते हैं।

सोडियम क्लोराइड प्रचुर मात्रा में है। यह पृथ्वी के महासागरों में घुला हुआ पाया जाता है। नमक के खनिज भंडार, जिन्हें हैलाइट या ‘रॉक सॉल्ट’ के नाम से जाना जाता है, प्राचीन समुद्रों के वाष्पीकरण और क्रिस्टलीकरण से बने हैं।

स्रोत के आधार नमक में कई अन्य अल्प खनिज भी हो सकते हैं जो इसे रंग भी दे सकते हैं, जैसे कि पाकिस्तान से गुलाबी रंग का हिमालयन नमक। सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय के रूप में नमक में सोडियम आयोडाइड भी मिलाया जा सकता है।

‘नमकीन’ शब्द का इस्तेमाल किये बिना नमक के स्वाद का वर्णन कर पाना काफी मुश्किल है। यह एक बहुत ही आम खाद्य योजक है, क्योंकि यह बहुत प्रचुर मात्रा में और बहुमुखी है। यह मांस (सूअर का मांस और मछली), सब्जियों (किम्ची, सौकरकूट और अचार), और डेयरी (पनीर और मक्खन) के लिए कई पारंपरिक खाद्य संरक्षण तकनीकों के लिए एक आवश्यक घटक है।

नमक को एक सार्वभौमिक स्वाद देने वाला एजेंट माना जाता है। यह कड़वे स्वाद को छुपा सकता है और मीठे, खट्टे एवं उमामी (स्वादिष्ट) स्वादों को सामने ला सकता है।

स्वाद मानचित्र के लोकप्रिय रेखांकन के बावजूद, जीभ पर ऐसा कोई स्थान नहीं है जहां हम नमक का स्वाद ले सकें। अन्य सोडियम लवण भी ‘नमकीन’ स्वाद दे सकते हैं, लेकिन क्लोराइड के अलावा अन्य नकारात्मक रूप से आवेशित घटकों के साथ प्रभाव कम हो जाता है (और कड़वा भी हो सकता है)।

‘एमएसजी’ या मोनोसोडियम ग्लूटामेट

मोनोसोडियम ग्लूटामेट भी एक लवण है। ग्लूटामेट ग्लूटामिक अम्ल का ऋणात्मक आवेशित रूप है, यह अम्ल अमीनो अम्ल है जो प्रकृति में निर्माण खंड के रूप में पाया जाता है।

‘एमएसजी’ और आम तौर पर ग्लूटामेट्स कई तरह के खाद्य पदार्थों में पाए जाते हैं, जिनमें टमाटर, परमेसन चीज़, सोया सॉस, सूखे समुद्री शैवाल, ‘वॉर्सेस्टरशायर सॉस’ और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ शामिल हैं। ये सभी खाद्य पदार्थ उमामी स्वाद देते हैं, जिन्हें नमकीन या मांस जैसा कहा जाता है।

वाणिज्यिक ‘एमएसजी’ पर्यावरण से प्राप्त नहीं किया जाता है बल्कि इसे जीवाणु किण्वन से बनाया जाता है। ग्लूकोज को ग्लूटामिक एसिड में परिवर्तित किया जाता है, जिसमें बाद में सोडियम हाइड्रॉक्साइड मिलाकर ‘एमएसजी’ (और पानी) बनाया जाता है।

‘एमएसजी’ को क्रिस्टल के रूप में बेचा जाता है, लेकिन इनका आकार सोडियम क्लोराइड के घनाकार के बजाय लंबा, प्रिज्मीय होता है। उमामी के मूल स्वाद का अनुभव करने के लिए ‘एमएसजी’ के कुछ क्रिस्टल को सीधे चखना उचित है। दशकों से खराब दबाव और चिंता के बावजूद, ‘एमएसजी’ को आम तौर पर खाद्य पदार्थों में पाए जाने वाले या मिलाए जाने वाले सांद्रता में सेवन करने के लिए सुरक्षित माना जाता है।

‘टेबल सॉल्ट’ और ‘एमएसजी’ दोनों में सोडियम होता है, लेकिन कुल वजन के अलग-अलग प्रतिशत में: टेबल सॉल्ट में लगभग 40 प्रतिशत सोडियम होता है, जबकि ‘एमएसजी’ में सिर्फ़ 14 प्रतिशत होता है। आप नियमित रूप से अपने भोजन में ‘एमएसजी’ के बजाय ‘टेबल सॉल्ट’ मिलाते होंगे।

बहुत ज़्यादा सोडियम खाना सेहत के लिए हानिकारक माना जाता है। कई तरह के स्वास्थ्य लाभों के लिए पोटेशियम से भरपूर विकल्प सुझाए गए हैं।

स्वाद बढ़ाने वाला

‘एमएसजी’ के स्वाद को ‘सोडियम राइबोन्यूक्लियोटाइड्स’ के रूप में जाने जाने वाले अन्य खाद्य योजकों के साथ मिलाकर और भी बेहतर बनाया जा सकता है।

भाषा

राजकुमार रंजन

रंजन

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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