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Saturday, 18 April, 2026
होमविदेशयूक्रेन के शीर्ष अधिकारी भारत में, रूस के साथ युद्ध पर चर्चा के लिए डोभाल और जयशंकर से मुलाकात

यूक्रेन के शीर्ष अधिकारी भारत में, रूस के साथ युद्ध पर चर्चा के लिए डोभाल और जयशंकर से मुलाकात

यूक्रेन की राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा परिषद के सचिव रुस्तेम उमेरोव इस समय राष्ट्रीय राजधानी में हैं और उन्होंने एनएसए अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की.

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नई दिल्ली: भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर अपना सिद्धांत आधारित रुख दोहराया और “संवाद और कूटनीति” के जरिए शांतिपूर्ण समाधान की बात कही. यह बात शुक्रवार को भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और यूक्रेन की राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा परिषद के सचिव रुस्तेम उमेरोव के बीच हुई बैठक में सामने आई.

उमेरोव की यह यात्रा, पिछले साल मार्च में विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा की राष्ट्रीय राजधानी यात्रा के बाद यूक्रेन सरकार की पहली उच्चस्तरीय यात्रा है.

विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने शुक्रवार को एक बयान में कहा, “दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और रूस-यूक्रेन संघर्ष पर चर्चा की. एनएसए ने संवाद और कूटनीति के जरिए शांतिपूर्ण समाधान पर भारत के सिद्धांत आधारित रुख को दोहराया.”

भारत में मौजूद उमेरोव ने शुक्रवार को भारतीय विदेश मंत्री एस.जयशंकर से भी मुलाकात की.

उमेरोव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर डोभाल से मुलाकात के बाद कहा, “हमने द्विपक्षीय संबंधों के विकास और सुरक्षा स्थिति के आकलन पर चर्चा की. भारतीय पक्ष ने संवाद और कूटनीति के आधार पर शांतिपूर्ण समाधान की जरूरत पर अपना स्थायी रुख दोहराया. स्थायी शांति सुनिश्चित करने वाले समाधान खोजने की जरूरत पर साझा समझ के लिए मैं आभारी हूं.”

जयशंकर के साथ बातचीत के दौरान उमेरोव ने रूस के साथ साढ़े चार साल से चल रहे युद्ध में मौजूदा मोर्चे की स्थिति पर भी बात की. हाल ही में यूक्रेन ने बिना चालक वाले रोबोट और हवाई वाहनों का इस्तेमाल कर एक मजबूत रूसी ठिकाने पर कब्जा करने का सफल ऑपरेशन किया था.

उमेरोव ने आगे कहा, “हमने द्विपक्षीय सहयोग के विकास और अगस्त 2024 में यूक्रेन की यात्रा के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संयुक्त बयान में तय समझौतों के लागू करने पर भी ध्यान दिया.”

फरवरी 2022 में शुरू हुआ रूस का यूक्रेन पर हमला अब भी जारी है और दोनों पक्ष एक और गर्मियों के संघर्ष के लिए तैयार हैं.

रूस भारी संख्या में सैनिकों की कीमत पर धीरे-धीरे जमीनी बढ़त बना रहा है, जबकि कीव जमीन, हवा और समुद्र में बिना चालक वाले वाहनों के इस्तेमाल से अपनी स्थिति बनाए रखने में सफल रहा है.

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जे़लेंस्की के भारत आने की उम्मीद है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगस्त 2024 में कीव गए थे.

इसी समय, भारत मॉस्को के साथ भी करीबी सहयोग बनाए हुए है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर वी. पुतिन पिछले दिसंबर भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली आए थे. मोदी के इस साल के अंत में रूस जाने की उम्मीद है.

युद्ध शुरू होने के बाद से भारत रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार रहा है. 2022 के अंत में G7 देशों द्वारा तय कीमत सीमा के बाद वित्त वर्ष 2024-2025 में रूस से भारत की तेल खरीद बढ़कर 56 अरब डॉलर तक पहुंच गई थी.

इसके बाद, पिछले एक साल में भारत की रूसी तेल खरीद में कमी आई है, जिसका एक कारण रूसी तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर अमेरिकी प्रतिबंध भी है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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