नई दिल्ली: ओमान के तट के पास भारतीय नाविकों वाले एक और तेल टैंकर पर गुरुवार को हमला हुआ. 8 जून के बाद यह तीसरी ऐसी घटना है.
ओमान में भारतीय दूतावास ने शिनास बंदरगाह के पास एक जहाज से जुड़ी घटना की पुष्टि की है.
भारतीय दूतावास ने एक्स पर जारी बयान में कहा, “हमें आज ओमान के शिनास बंदरगाह के पास एक जहाज से जुड़ी घटना की जानकारी मिली है. हम स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं और अधिक जानकारी के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहे हैं.”
ओमानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बिटुमेन टैंकर एमटी जलवीर के इंजन रूम और फनल वाले हिस्से में आग लग गई है. माना जा रहा है कि जहाज पर करीब 20 भारतीय नाविक सवार हैं. हालांकि विदेश मंत्रालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है.
इस हफ्ते ओमान तट के पास किसी व्यापारी जहाज पर हमला होने की यह तीसरी घटना है.
भारत ने बुधवार शाम अमेरिका के प्रभारी राजदूत जेसन मीक्स को तलब किया था. इससे पहले अमेरिकी हमले में MT Settebello पर सवार कम से कम दो भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी और एक अन्य लापता हो गया था. इस जहाज पर कुल 24 नाविक थे और सभी भारतीय नागरिक थे.
भारत ने व्यापारी जहाजों पर हुए हमलों को लेकर मीक्स के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया. यह बैठक करीब 25 मिनट चली.
विदेश मंत्रालय ने Settebello पर हुए हमले की कड़ी निंदा करते हुए अमेरिका समेत सभी पक्षों से क्षेत्र में व्यापारी जहाजों पर हमले रोकने की अपील की. अमेरिका उन टैंकरों पर हमले कर रहा है, जिन पर उसे संदेह है कि वे ईरान पर लगाए गए उसके नौसैनिक प्रतिबंध को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं.
इससे पहले 8 जून को MT Marivex पर सटीक हमला किया गया था. अमेरिकी नौसेना की कई चेतावनियों का पालन न करने के बाद यह कार्रवाई की गई थी. जहाज पर मौजूद सभी 24 भारतीय नाविकों को ओमान नौसेना ने सुरक्षित बचा लिया था.
अब एमटी जलवीर इस तरह के हमले का शिकार होने वाला ताजा जहाज बन गया है.
MarineTraffic के अनुसार, यह बिटुमेन टैंकर गिनी-बिसाउ के झंडे के तहत संचालित होता है. इससे पहले इसका नाम सरेश्वर था और इस साल की शुरुआत तक यह कुक आइलैंड्स के झंडे के तहत चलता था.
Marivex और Settebello दोनों प्रतिबंधित तेल टैंकर थे और माना जाता है कि वे उन जहाजों के बेड़े का हिस्सा थे जिनका इस्तेमाल ईरान अपने तेल के परिवहन के लिए करता है. पिछले पांच वर्षों में अमेरिका ने ईरानी तेल पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं.
28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले शुरू किए जाने के बाद से कई भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है. यह युद्ध अब चौथे महीने में पहुंच चुका है.
8 अप्रैल से एक नाजुक युद्धविराम लागू है, लेकिन इसके बावजूद अमेरिका और ईरान लगातार दो रातों से एक-दूसरे पर हमले कर रहे हैं.
युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने प्रभावी रूप से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ को बंद कर रखा है. वहीं अमेरिका ने 13 अप्रैल को नौसैनिक नाकेबंदी लागू की थी, ताकि तेहरान पर दबाव बनाया जा सके. दोनों देश युद्ध समाप्त करने के लिए समझौते पर बातचीत कर रहे हैं.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)