नई दिल्ली: विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हो रहे क्षेत्रीय चुनावों को लेकर अपना रुख दोहराया और कहा कि ‘ऐसी खोखली कवायद सच्चाई को छिपा नहीं सकती.’
MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नियमित प्रेस ब्रीफिंग में कहा, “PoK में होने वाला यह तथाकथित स्थानीय चुनाव पूरी तरह दिखावा है. असल में वहां जनता का विरोध प्रदर्शन और पाकिस्तानी सुरक्षाबलों की तरफ से की जा रही बेवजह हत्याएं हो रही हैं. ऐसी खोखली कवायद सच्चाई को छिपा नहीं सकती.”
मतदान 27 जुलाई से शुरू हुआ है और 10 अगस्त तक चलेगा. यह इंटरनेट बंद किए जाने, बड़ी संख्या में गिरफ्तारियों और प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसक झड़पों के बीच हो रहा है. इन झड़पों में कम से कम 90 लोगों की जान जा चुकी है. कुछ अनुमानों के मुताबिक, मतदान की निगरानी के लिए पाकिस्तान के पंजाब से 14,000 सुरक्षाकर्मियों को PoK में तैनात किया गया है.
एक दिन में मतदान कराने के बजाय, सुरक्षा की स्थिति को देखते हुए पहली बार PoK की 53 सीटों के लिए तीन चरणों में मतदान कराया जा रहा है.
मीरपुर डिवीजन की 13 सीटों पर 27 जुलाई को मतदान हुआ. मुजफ्फराबाद डिवीजन की नौ सीटों और PoK में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों पर 1 अगस्त को मतदान हुआ. बाकी 11 सीटों पर 10 अगस्त को मतदान होगा. ये सीटें सुंधनोटी डिवीजन में हैं, जो अशांति से सबसे ज्यादा प्रभावित रहा है. PoK की 53 में से 45 सीटों पर सीधे चुनाव होते हैं. मतदान के पहले चरण में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज ने 13 में से नौ सीटें जीतीं, जबकि उसकी गठबंधन सहयोगी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने बाकी चार सीटें जीतीं.
केंद्र में दोनों पार्टियां मिलकर सरकार चला रही हैं, लेकिन इसके बावजूद दोनों दल चुनाव कराने के तरीके को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं. PPP ने बड़े पैमाने पर धांधली, हिंसा और चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं.
MEA ने मंगलवार को PoK की स्थिति पर कहा, “इस साल जून से अब तक जारी कार्रवाई में कम से कम 90 नागरिकों की जान जा चुकी है. पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान ने जनता की नाराजगी का जवाब गोलियों, ब्लैकआउट, डराने-धमकाने और दमन से दिया है और अब खोखली चुनावी कवायद के जरिए अपनी वैधता साबित करने की कोशिश कर रहा है. उसे जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और दुनिया को पाकिस्तान के मानवाधिकारों पर दिए जाने वाले पाखंडी भाषण की कमजोर दिखावटी परत के पीछे की सच्चाई देखनी चाहिए.”
PoK में जारी विरोध प्रदर्शन जून में शुरू हुए थे. उस समय JAAC—व्यापारिक संगठनों, नागरिक समाज संगठनों और धार्मिक संगठनों के एक बड़े गठबंधन—ने पूरे पाकिस्तान में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को खत्म करने की मांग की थी. इस मांग को जोर देने के लिए उसने 9 जून को क्षेत्रीय राजधानी मुजफ्फराबाद तक मार्च निकालने का आह्वान किया था. लेकिन इससे चार दिन पहले, 5 जून को क्षेत्रीय प्रशासन ने JAAC पर प्रतिबंध लगा दिया. प्रशासन ने उस पर देशद्रोह, हिंसा और राज्य की सुरक्षा के खिलाफ गतिविधियों का आरोप लगाया था.
PoK में कई महीनों से सरकार विरोधी प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहे जमीनी संगठन जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने रविवार को लोगों से चल रहे विधानसभा चुनावों का बहिष्कार करने की अपील की. उसने चुनाव को “धोखा” बताया और कहा कि यह चुनाव “बंदूक की नोक पर” कराया जा रहा है. इस बीच पाकिस्तानी रेंजर्स पूरे क्षेत्र में बड़े स्तर पर कार्रवाई कर रहे हैं.
JAAC के नेता सरदार उमर नजीर के फेसबुक पेज पर पोस्ट किए गए एक वीडियो बयान में गठबंधन ने चुनाव सुधारों की अपनी पुरानी मांग दोहराई. साथ ही उसने साफ किया कि वह लोकतांत्रिक चुनावों के खिलाफ नहीं है.
नजीर ने कहा, “जो चुनाव अभी चल रहा है, वह बंदूक की नोक पर कराया जा रहा है. हम इस चुनाव में रुकावट नहीं डालेंगे, लेकिन JAAC के तौर पर हम इसे धोखाधड़ी और दिखावा वाला चुनाव घोषित करते हैं.” उन्होंने लोगों से मतदान केंद्रों से दूर रहने की अपील की. उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि उनके अनुसार बड़ी संख्या में लोगों को चुनाव में सही तरीके से हिस्सा लेने से बाहर रखा गया है.
उन्होंने आगे कहा, “हम लोकतंत्र या चुनाव के खिलाफ नहीं हैं. हालांकि, हमारी मांग है कि चुनाव निष्पक्ष हों, लेकिन इन चुनावों में ऐसा नहीं है. JAAC ने घोषणा की है कि जो चुनाव हो रहे हैं, वे बंदूक की नोक पर कराए जा रहे धोखाधड़ी वाले चुनाव हैं.”
इसके बाद उन्होंने समर्थकों से मतदान करने के बजाय मुजफ्फराबाद में होने वाले प्रदर्शनों में शामिल होने की अपील की. उन्होंने कहा कि इन चुनावों के जरिए बनने वाली किसी भी सरकार के पास जनता की वैध मंजूरी नहीं होगी.
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