(रियोना इंदुर और शीना कुमारी, डरबन प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय)
डरबन, 10 अक्टूबर (द कन्वरसेशन) माइक्रोप्लास्टिक हमारी प्लास्टिक की दुनिया के अंश हैं, जो बड़े वस्तुओं के टूटने से या सिंथेटिक कपड़ों और पैकेजिंग जैसे उत्पादों से उत्पन्न होते हैं।
अब ये हर जगह मौजूद हैं। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि दुनिया के सतही जल में लगभग 51 खरब कण तैर रहे हैं, और दक्षिण अफ्रीका के नल के पानी में भी इनका निम्न स्तर पाया गया है।
यही चिंता का विषय है क्योंकि ये कण रसायन और हानिकारक बैक्टीरिया के वाहक बन सकते हैं, मछलियों और अन्य वन्य जीवों द्वारा खाए जा सकते हैं, और हमारे शरीर में भी पहुंच सकते हैं।
हम जल वैज्ञानिक हैं और इस समस्या के समाधान की तलाश में हैं। हाल ही में किए गए एक अध्ययन में, हमने एक व्यावहारिक समाधान का परीक्षण किया — दो ‘‘चुंबकीय सफाई पाउडर’’ जो पानी में मौजूद माइक्रोप्लास्टिक्स पर चिपक सकते हैं। इन गुच्छों को फिर एक चुंबक की मदद से बाहर निकाला जा सकता है। इन पदार्थों को चुंबकीय नैनोकंपोजिट कहा जाता है (इनकी कल्पना विशेष सतहों वाले बहुत महीन पाउडर के तौर पर की जा सकती है)।
इसके पीछे का विचार बहुत सरल है। पानी में पाउडर की थोड़ी मात्रा मिलाएं, इसे माइक्रोप्लास्टिक्स को आकर्षित करने और उनसे जुड़ने दें, और फिर पाउडर-प्लास्टिक समूहों को हटाने के लिए एक शक्तिशाली चुंबक का उपयोग करें, जिससे स्वच्छ पानी बचेगा।
दुनिया भर में, अनुसंधानकर्ताओं ने माइक्रोप्लास्टिक को पानी से निकालने के लिए कई अलग-अलग तरीकों से प्रयास किये हैं, लेकिन हमारा अध्ययन यह दिखाने वाले पहले अध्ययनों में से एक है कि चुंबकीय नैनोकंपोजिट न केवल प्रयोगशाला स्थितियों में बल्कि वास्तविक दुनिया के नमूनों में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकते हैं, जिनमें शहरों ने निकलने वाला अपशिष्ट जल और मुहैया कराया जाने वाला पेयजल शामिल हैं।
प्लास्टिक के सूक्ष्म कणों को हटाने के लिए इन विशिष्ट नैनोपदार्थों का उपयोग करने वाला यह पहला अध्ययन है, जो उनकी उच्च दक्षता और व्यावहारिक क्षमता, दोनों को सिद्ध करता है। अधिकांश मौजूदा फिल्टर स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए सबसे हानिकारक, सबसे छोटे प्लास्टिक को हटाने में कठिनाई का सामना करते हैं। अगला कदम इन पाउडर का बड़े पैमाने पर परीक्षण करना और घरों और जल उपचार संयंत्रों में उपयोग की जा सकने वाली सरल, किफायती प्रणालियां विकसित करना है।
पाउडर कितनी अच्छी तरह काम करते हैं?
हमने अपने अनुसंधान में पाया कि ये पाउडर शुद्ध जल से 96 प्रतिशत तक छोटे पॉलीएथिलीन और 92 प्रतिशत तक पॉलीस्टाइरीन कणों को हटाने में सक्षम थे।
जब हमने पीने के पानी और नगरपालिका अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र से निकलने वाले पानी दोनों में यही तरीका अपनाया, तो परिणाम उतने ही अच्छे रहे। पेयजल से करीब 94 प्रतिशत प्लास्टिक कणों को हटाने में सफलता मिली जबकि उपचारित अपशिष्ट जल में यह स्तर 92 प्रतिशत तक रहा।
इस अध्ययन का एक और निष्कर्ष यह है कि प्लास्टिक के कणों का आकार मायने रखता है। माइक्रोप्लास्टिक जितना छोटा होगा, पाउडर के लिए उससे चिपकना उतना ही आसान होगा, क्योंकि सूक्ष्म कण पाउडर की विशेष ‘‘चिपचिपी’’ सतह तक ज्यादा पहुंच सकते हैं।
अति सूक्ष्म प्लास्टिक कण (सैकड़ों माइक्रोमीटर) के लिए तो हमें बहुत अच्छे नतीजे मिले, लेकिन बड़े कण (3-5 मिलीमीटर) मुश्किल से ही हटे। ऐसा इसलिए क्योंकि वे पाउडर के साथ अच्छी तरह नहीं मिल पाते और पाउडर के चिपकने के लिए सतह कम होती है।
रोजमर्रा के संदर्भ में, ये चुंबकीय पाउडर छोटे माइक्रोप्लास्टिक के लिए उत्कृष्ट हैं, जिन्हें सामान्य फिल्टरों से हटाना सबसे कठिन होता है।
अब बड़ा सवाल यह है कि ये पाउडर प्लास्टिक से क्यों चिपकते हैं?
इसे छोटे चुम्बकों की तरह समझिए। पाउडर और प्लास्टिक की विशेष सतहें होती हैं। पाउडर के कुछ हिस्से प्लास्टिक के लिए चिपचिपे होते हैं। यह चिपचिपाहट विभिन्न प्रकार के बलों के कारण होती है। प्लास्टिक और पाउडर में विपरीत आवेश होते हैं जो उन्हें एक साथ खींचते हैं या उन्हें एक साथ चिपकने देते हैं।
मुख्य बात यह है कि पाउडर को प्लास्टिक पर चिपकने के लिए विशेष रूप से तैयार किया जाता है, ताकि पानी में माइक्रोप्लास्टिक स्वाभाविक रूप से उनसे चिपक जाएं।
एक बार जब पाउडर माइक्रोप्लास्टिक्स पर चिपक जाते हैं, तो हम पाउडर-प्लास्टिक के गुच्छों को पानी से बाहर निकालने के लिए एक मजबूत चुंबक (चुंबकीय बल: 250 किलोग्राम) का उपयोग करते हैं।
फिर प्लास्टिक को धोकर और छानकर पाउडर से अलग किया जाता है, सुखाया जाता है और तौला जाता है। इससे हमें यह पता चलता है कि कितना प्लास्टिक निकाला गया। अलग किए गए पाउडर का दोबारा इस्तेमाल किया जाता है, जबकि प्लास्टिक को सुरक्षित रूप से फेंक दिया जाता है ताकि वह दोबारा पानी में न जाए।
हमने व्यावहारिक सवालों पर भी गौर किया: क्या आप पाउडर का दोबारा इस्तेमाल कर सकते हैं? और क्या ये सुरक्षित हैं?
ये पाउडर सुरक्षित, प्रयोगशाला-निर्मित सामग्रियों कार्बन और बोरॉन नाइट्राइड (सौंदर्य प्रसाधनों और परत में भी पाया जाने वाला एक पदार्थ) की छोटी चादरों से बने होते हैं, जिन पर चुंबकीय लौह नैनोकण लेपित होते हैं। इससे ये पानी में स्थिर रहते हैं और सूक्ष्म प्लास्टिक को आकर्षित करने के बाद चुंबक से आसानी से निकाले जा सकते हैं।
तीन बार इस्तेमाल के बाद, परीक्षण किए गए पाउडर 80 प्रतिशत तक प्लास्टिक हटाने में कारगर रहे। इसका अभिप्राय है कि आपको हर बार पाउडर की नई खेप की जरूरत नहीं पड़ेगी, जो लागत कम रखने के लिए ज़रूरी है। इस विधि से 1,000 लीटर पानी को शोधित करने में लगभग 41 अमेरिकी डॉलर का खर्च आता है, जो इसे कई मौजूदा विकल्पों के साथ प्रतिस्पर्धी बनाता है।
यह अध्ययन घरों और शहरों के लिए क्या मायने रखते?
अल्पावधि में, चुंबकीय पाउडर को फिल्टर इकाइयों में बनाया जा सकता है, जिन्हें घरेलू या सामुदायिक जल प्रणालियों से जोड़ा जा सकता है, जिससे पानी को पीने या खाना पकाने के लिए उपयोग करने से पहले माइक्रोप्लास्टिक्स को हटाने में मदद मिलेगी।
माइक्रोप्लास्टिक सिर्फ दक्षिण अफ्रीका की समस्या नहीं है, बल्कि एक वैश्विक प्रदूषक भी है जो नदियों, महासागरों और यहां तक कि हमारे द्वारा सांस ली जाने वाली हवा के जरिए भी अपनी सीमाएं पार कर रहा है।
चुंबकीय पाउडर जैसे कम लागत वाले, वृहद समाधान संसाधन-सीमित परिस्थितियों में वास्तविक अंतर ला सकते हैं, जहां उन्नत फिल्टर प्रणालियां बहुत महंगी या अव्यावहारिक होती हैं।
अगले चरण की बात करें तो इस पद्धति को बढ़ाने, अधिक विविध जल स्थितियों में इसका परीक्षण करने, तथा सरल, किफायती उपकरणों को डिजाइन करने पर केंद्रित होगा, जिन्हें घरों या जल शोधन संयंत्रों में अपनाया जा सके।
संक्षेप में कहें तो यह विशेष चुंबकीय पाउडर एक छोटे से प्रदूषक से निपटने में सक्षम है जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। समझदारी भरी इंजीनियरिंग और सावधानीपूर्वक पुनर्प्राप्ति के साथ, चुंबकीय नैनोकंपोजिट सूक्ष्म प्लास्टिक प्रदूषण से पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करते हुए, स्वच्छ जल के लिए एक उम्मीद, व्यावहारिक मार्ग प्रशस्त करते हैं।
(द कन्वरसेशन) धीरज सुभाष
सुभाष
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