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Tuesday, 14 July, 2026
होमविदेशहोर्मुज़ हमला: टैंकरों पर मिसाइल हमले में नाविक की मौत, भारत ने ईरान के टॉप डिप्लोमैट को किया तलब

होर्मुज़ हमला: टैंकरों पर मिसाइल हमले में नाविक की मौत, भारत ने ईरान के टॉप डिप्लोमैट को किया तलब

मंगलवार सुबह तेल टैंकर मोम्बासा और अल बहियाह पर ईरानी मिसाइल हमलों के बाद भारत ने ईरान के उप मिशन प्रमुख मोहम्मद जावेद होसैनी को तलब किया है.

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नई दिल्ली: स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ में दो तेल टैंकरों पर हुए हमले में एक भारतीय नाविक की मौत और आठ अन्य के घायल होने के बाद भारत ने मंगलवार को ईरान के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया.

नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास के उप मिशन प्रमुख मोहम्मद जावेद होसैनी को मंगलवार सुबह विदेश मंत्रालय ने तलब किया.

विदेश मंत्रालय में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान (PAI) डिवीजन के संयुक्त सचिव आनंद प्रकाश ने इस घटना पर ईरान के सामने भारत का कड़ा विरोध दर्ज कराया.

यह पूरी प्रक्रिया करीब 10 मिनट तक चली. भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली इस समय यात्रा पर हैं, इसलिए उप मिशन प्रमुख को तलब किया गया.

उन्हें सबके सामने तलब किया गया, जिससे यह साफ दिखा कि व्यापारिक जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों को लेकर भारत का गुस्सा बढ़ता जा रहा है.

मंगलवार सुबह संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि यूएई के झंडे वाले दो तेल टैंकर—मोम्बासा और अल बहियाह पर ईरान की क्रूज मिसाइलों से हमला किया गया.

उस समय दोनों जहाज स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ में ओमान के समुद्री क्षेत्र से गुज़र रहे थे. यूएई रक्षा मंत्रालय के अनुसार, “हमले में मोम्बासा टैंकर पर सवार एक भारतीय चालक दल के सदस्य की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य घायल हो गए. इनमें चार की हालत गंभीर है. घायलों में छह भारतीय और दो यूक्रेन के नागरिक शामिल हैं.”

बयान में यह भी कहा गया, “यूएई इस बढ़ते तनाव का जवाब देने और अपनी जमीन, अपने नागरिकों और निवासियों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने का पूरा अधिकार रखता है. साथ ही वह अपनी संप्रभुता, सुरक्षा, स्थिरता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा.”

व्यापारिक जहाजों पर यह ताजा हमला ऐसे समय हुआ है, जब कुछ दिन पहले साइप्रस के झंडे वाले कंटेनर जहाज GFS Galaxy पर ईरानी हमले में एक भारतीय नाविक लापता हो गया था. फरवरी के आखिर में पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक 13 से ज्यादा भारतीय, जिनमें कई नाविक हैं, अपनी जान गंवा चुके हैं.

अमेरिका और इज़रायल ने मिलकर ईरान पर हमला किया था, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी. इसके बाद आठ अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच एक अस्थायी युद्धविराम हुआ, जिसे बाद में 60 दिन के अंतरिम समझौते में बदल दिया गया था. यह समझौता पिछले महीने घोषित किया गया था और इसमें पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी, लेकिन हाल के दिनों में यह समझौता टूटता हुआ दिखाई दे रहा है.

सप्ताहांत में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि “युद्धविराम खत्म हो चुका है.” इसके बाद सोमवार को उन्होंने ईरान के खिलाफ नाकेबंदी फिर से लागू करने का आदेश दिया और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ से गुज़रने वाले जहाजों पर अमेरिकी शुल्क (टोल) लगाने की घोषणा की.

अमेरिका का यह फैसला उसके पहले के रुख से बिल्कुल अलग है. पहले वॉशिंगटन ऐसे शुल्क को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत गैरकानूनी बताता रहा है. सोमवार को अमेरिका ने लगातार तीसरे दिन ईरान पर हमले भी किए. ट्रंप के लगातार बदलते रुख से शांति की संभावना और कम हो गई है.

भारत के लिए स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ में किसी भी तरह की रुकावट उसकी ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर डाल सकती है. भारत अपने कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है.

नई दिल्ली ने अमेरिका और ईरान दोनों से अपील की है कि वे “बातचीत और कूटनीति” के रास्ते पर लौटें. अगर ऊर्जा आपूर्ति में और रुकावट आती है, तो इसका भारतीय अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ेगा.

वैसे भी वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत का कच्चे तेल का आयात बढ़कर 60 अरब डॉलर पहुंच गया है. इसकी बड़ी वजह तेल की कीमतों में बढ़ोतरी रही.

इसके मुकाबले वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में भारत ने 45 अरब डॉलर से थोड़ा अधिक का कच्चा तेल आयात किया था.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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