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Tuesday, 14 July, 2026
होमदेशबॉलीवुड से ‘कॉकरोच’ के साथ जंतर-मंतर तक—एक्टिविस्ट बनकर प्रकाश राज को क्यों मिलती है ज्यादा खुशी

बॉलीवुड से ‘कॉकरोच’ के साथ जंतर-मंतर तक—एक्टिविस्ट बनकर प्रकाश राज को क्यों मिलती है ज्यादा खुशी

कभी हिंदी फिल्मों के सबसे व्यस्त अभिनेताओं में रहे प्रकाश राज का कहना है कि राजनीति, विरोध प्रदर्शन और नागरिक आंदोलनों ने उनके जीवन को नया मतलब दिया है, भले ही इसकी कीमत उन्हें अपने करियर से चुकानी पड़ी हो.

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बेंगलुरु: अभिनेता प्रकाश राज शनिवार को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे. उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी के उस प्रदर्शन का समर्थन किया, जिसमें बार-बार हो रहे परीक्षा पेपर लीक मामलों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की जा रही है.

प्रकाश राज ने कहा, “वे कहते हैं कि यह सोशल मीडिया से चलने वाला आंदोलन है. अरे भाई, आप भी तो व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी और सोशल मीडिया के जरिए ही आए थे. आपके पास एक हथियार था, जो हमारे पास नहीं था. अब वह हथियार हमारे पास है.”

उनका यह बयान बीजेपी पर तंज माना गया. इसे सुनकर प्रदर्शन में मौजूद युवाओं की छोटी-सी भीड़ ने जोरदार तालियां बजाईं. 61 साल के प्रकाश राज ने अजय देवगन की ‘सिंघम’, सलमान खान की ‘वॉन्टेड’ और ‘दबंग-2’ जैसी बॉलीवुड फिल्मों में अहम भूमिकाएं निभाई हैं.

जंतर-मंतर पर छोटी-सी भीड़ को संबोधित करना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि उनकी सक्रिय राजनीति और सामाजिक आंदोलनों की वजह से उनके करियर पर क्या असर पड़ा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर खुलकर निशाना साधने के बाद उन्हें लगभग बॉलीवुड से दूर कर दिया गया. इसके बाद से वे कर्नाटक के धर्मस्थल विवाद समेत कई सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों से जुड़े आंदोलनों में हिस्सा लेते रहे हैं.

हालांकि, राजनीति में उन्हें सफलता नहीं मिली. उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव में बेंगलुरु सेंट्रल सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था, लेकिन करीब 30 हज़ार वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे. प्रकाश राज ने सोमवार को दिप्रिंट से कहा, “हर कोई इस बात की चर्चा करता है कि मुझे इसकी क्या कीमत चुकानी पड़ रही है, लेकिन यह भी बात होनी चाहिए कि मुझे इससे क्या मिल रहा है. ज़िंदगी को एक मतलब मिला है, क्या वह ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है?”

प्रकाश राज पहले भी कई बार कह चुके हैं कि हिंदुत्व, सांप्रदायिक राजनीति और बीजेपी के खिलाफ खुलकर बोलने की वजह से उन्हें फिल्म इंडस्ट्री, खासकर बॉलीवुड, में कई काम गंवाने पड़े.

आंबेडकर और चे ग्वेरा का ज़िक्र

प्रकाश राज ने कहा, “इसमें समय लगे तो लगे. मैं एक्टिंग करता हूं, सिनेमा करता हूं, थिएटर करता हूं. मैं पढ़ता भी हूं. यही मेरा समय है और इससे मेरी ज़िंदगी ज्यादा मायने रखने लगी है. सवाल यह नहीं है कि समय कहां और कितना लगाना है. बात यह है कि समय अच्छा होना चाहिए. एक नागरिक के तौर पर क्या हमें यह सब नहीं करना चाहिए? क्या हमने (डॉ. भीमराव) आंबेडकर या चे ग्वेरा से ऐसा सवाल पूछा था? हर नागरिक की कुछ जिम्मेदारियां होती हैं.”

प्रकाश राज की पहचान मुख्य रूप से तमिल, कन्नड़, मलयालम और तेलुगु फिल्मों में निभाए गए उनके किरदारों से है. उन्होंने बॉलीवुड में भी कई फिल्मों में काम किया है. ‘सिंघम’, ‘वॉन्टेड’ और ‘दबंग-2’ जैसी फिल्मों में उन्होंने मुख्य विलेन की भूमिका निभाई.

सितंबर 2017 में उनकी दोस्त और पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के बाद प्रकाश राज का रुख पूरी तरह बदल गया. उसी साल अक्टूबर में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गौरी लंकेश की हत्या पर चुप रहने का आरोप लगाया. गौरी लंकेश की हत्या उन घटनाओं में शामिल थी, जिन्हें सरकार के आलोचकों ने कट्टर हिंदुत्व संगठनों द्वारा तर्कवादी लोगों को निशाना बनाए जाने की कथित श्रृंखला बताया था.

उस समय प्रकाश राज ने कहा था, “हम शायद गौरी के हत्यारों को नहीं देख पा रहे हैं, लेकिन हम उन लोगों को ज़रूर देख रहे हैं जिन्होंने नफरत फैलाई. उनमें ऐसे लोग भी हैं, जिन्हें हमारे प्रधानमंत्री फॉलो करते हैं. हमारे पास ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो इस सब पर आंखें बंद किए हुए हैं.”

इसके बाद उन्होंने बीजेपी पर अपने हमले और तेज़ कर दिए. वे अक्सर लिटरेचर फेस्टिवल, मीडिया कार्यक्रमों और दूसरे मंचों से मोदी सरकार की आलोचना करते रहे हैं. वे अपने एक्स (पहले ट्विटर) अकाउंट पर #JustAsking हैशटैग के जरिए भी अपने विचार रखते हैं. प्रदर्शनों के दौरान वे फिल्मों के मशहूर डायलॉग भी बोलते हैं, जिन्हें लोग काफी पसंद करते हैं.

2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले प्रकाश राज पूरे राज्य में घूमे और नरेंद्र मोदी की आलोचना की. हालांकि, वे अक्सर कहते थे कि उनकी यात्राओं का राजनीति से कोई संबंध नहीं है. रास्ते में अगर किसी शादी समारोह का पता चलता, तो वे वहां भी रुक जाते, दूल्हा-दुल्हन को शुभकामनाएं देते, परिवार के साथ समय बिताते, लोगों का मनोरंजन करते और सेल्फी की मांग भी खुशी से पूरी करते.

मई 2019 में प्रकाश राज ने दिप्रिंट से कहा था कि अक्टूबर 2017 से, जब उन्होंने नरेंद्र मोदी के खिलाफ खुलकर बोलना शुरू किया, तब से उन्हें बॉलीवुड में कोई काम नहीं मिला. उन्होंने कहा था, “दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन जब से मैंने बोलना शुरू किया है, तब से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से मुझे कोई ऑफर नहीं मिला.”

प्रकाश राज ने ‘दोसिता चिनुकुलु’ नाम से एक तेलुगु किताब भी लिखी है, जिसका कन्नड़, मलयालम और तमिल में भी अनुवाद हुआ है. इस किताब में समाज, राजनीति और अपने जीवन पर लिखी गई उनकी टिप्पणियां शामिल हैं.

सोमवार को दिप्रिंट से बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस देश की फिल्म इंडस्ट्री “विचारधारा से ज्यादा अवसरवाद” पर चलती है. उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री को “कमजोर (वल्नरेबल) इंडस्ट्री” बताया. उन्होंने कहा, “सत्ता में बैठे लोग जानते हैं कि आपकी कमजोरी कहां है. मैं उस कमजोरी को समझता हूं. मुझे पता था कि इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी और मैं इसके लिए तैयार हूं.”

लेकिन उनका कहना है कि उनके लिए इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण चीजें हैं.

उन्होंने कहा, “हर व्यक्ति की अपनी वजह होती है. इस देश में हमें मतभेदों के साथ जीना सीखना चाहिए. इसमें कोई दिक्कत नहीं है. मैं पहले से ज्यादा आज़ाद महसूस करता हूं. कम से कम अब लोग जानते हैं कि मैं कौन हूं. अब लोग मुझे सिर्फ मेरे निभाए किरदारों से नहीं पहचानते.”

उन्होंने आगे कहा, “जब मैं कहीं जाता हूं, तो युवा, बुजुर्ग और कई आम लोग मेरे पास आते हैं और कहते हैं कि आपने आवाज़ उठाई, इसके लिए धन्यवाद. वे कहते हैं कि हम आपको अभिनेता के रूप में पसंद करते थे, लेकिन अब जो आप कर रहे हैं, उसके लिए हम आपको और ज्यादा पसंद करते हैं. यही सबसे बड़ी ताकत है. मेरे लिए यही काफी है.”

प्रकाश राज का नाम उन लोगों में भी आया था, जिन पर धर्मस्थल के संरक्षक और राज्यसभा सांसद वीरेंद्र हेगड़े को निशाना बनाने का आरोप लगाया गया था. मंदिर के पूर्व सफाई कर्मचारी चिन्नैया ने दावा किया था कि धर्मस्थल में कथित सामूहिक दफन विवाद को लेकर 200 करोड़ रुपये की फंडिंग के पीछे जिन लोगों का हाथ था, उनमें प्रकाश राज भी शामिल थे. प्रकाश राज ने इन सभी आरोपों से इनकार किया था.

उन्होंने कहा था कि ये “बढ़ा-चढ़ाकर और मनगढ़ंत कहानियां” हैं, जिन्हें कुछ लोग गलत मंशा से फैला रहे हैं.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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