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Tuesday, 14 July, 2026
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ASI के पुरातत्वविद ‘मनमाने’ भर्ती प्रक्रिया को लेकर अपने ही विभाग से क्यों लड़ रहे हैं

डिप्टी सुपरिंटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट (DSA) के पदों पर भर्ती कई याचिकाओं के कारण अटकी हुई है. याचिकाओं में नई भर्ती अधिसूचना जारी करने और विभागीय उम्मीदवारों को उम्र में छूट देने की मांग की गई है.

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नई दिल्ली: जब यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (यूपीएससी) ने अगस्त 2024 में डिप्टी सुपरिंटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट (डीएसए) के 67 पदों का विज्ञापन दिया, तो उम्मीद थी कि यह एक दशक से ज़्यादा लंबे इंतज़ार को खत्म करेगा, लेकिन इसके बजाय, इसने आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) के अंदर एक नई लड़ाई शुरू कर दी.

विभाग में काम कर रहे पुरातत्वविदों के लिए यह भर्ती ऐसा मौका थी, जो उनके हाथ से पहले ही निकल चुका था. असल में, ये पद 2013 से खाली थे, लेकिन जब इनकी भर्ती का विज्ञापन आखिरकार जारी हुआ, तब तक असिस्टेंट सुपरिंटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट (एएसए) के कई अधिकारी, जो डीएसए पद के लिए अगला स्तर माने जाते हैं, सीधी भर्ती की अधिकतम उम्र सीमा पार कर चुके थे. इसके बाद उन्होंने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (सीएटी) में याचिका दायर की. उनका आरोप है कि एएसआई ने उन पदों को, जिन्हें विभागीय पदोन्नति से भरा जाना चाहिए था, मनमाने तरीके से सीधी भर्ती के लिए भेज दिया.

सीएटी में 2024 में भर्ती को चुनौती देने वाले एएसआई के एक एएसए अधिकारी ने कहा, “ये पद विभाग के उन कर्मचारियों से भरे जाने थे, जो एएसए के रूप में काम कर रहे हैं और डीएसए के लिए फीडर कैडर हैं, लेकिन एएसआई ने इन्हें सीधी भर्ती के लिए भेज दिया, जो पूरी तरह मनमाना फैसला है.”

करीब दो साल बाद भी यह भर्ती कोर्ट में चल रहे मामले के कारण अटकी हुई है. इस वजह से एएसआई में पहले से मौजूद कर्मचारियों की भारी कमी और बढ़ गई है. देशभर में एएसआई के 2,646 पद खाली पड़े हैं. डिप्टी सुपरिंटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट के 120 स्वीकृत पदों में से 75 अभी भी खाली हैं. इन्हीं अधिकारियों की जिम्मेदारी खुदाई का काम, संरक्षण कार्य और देशभर के संरक्षित स्मारकों की देखरेख करना है. जिन 67 पदों के लिए भर्ती निकाली गई थी, उनमें 29 अनारक्षित, 18 ओबीसी, 10 अनुसूचित जाति (एससी), 6 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और 4 अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए हैं.

असल में ये सभी रिक्तियां 2013 की भर्ती प्रक्रिया की हैं. उस समय एएसआई ने यूपीएससी से भर्ती शुरू करने को कहा था, लेकिन प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो सकी. एएसआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “कुछ कारणों से यह भर्ती नहीं हो सकी और 2014 के बाद UPSC को कोई नया प्रस्ताव नहीं भेजा गया. इस देरी के कारण एएसआई में काम कर रहे कई कर्मचारी उम्र सीमा पार कर गए और सीधी भर्ती में आवेदन करने का मौका खो बैठे. इसलिए उन्होंने भर्ती को अदालत में चुनौती दी.”

दिलचस्प बात यह है कि 2024 की यह भर्ती भी एक कोर्ट केस के बाद ही शुरू हुई थी. यूपीएससी ने यह विज्ञापन अलका सिंह और अन्य बनाम भारत सरकार मामले में सीएटी की प्रधान पीठ के निर्देश पर जारी किया था. इस भर्ती के लिए 1,407 आवेदन आए थे, जिनमें से 293 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया, लेकिन इसके बाद कई याचिकाएं दायर होने के कारण चयन प्रक्रिया रुक गई. इन याचिकाओं में भर्ती का विज्ञापन रद्द करने, नई भर्ती अधिसूचना जारी करने और उन विभागीय कर्मचारियों को उम्र में छूट देने की मांग की गई है, जो 10 साल की देरी के कारण पात्रता खो चुके हैं.

एएसआई अधिकारियों का कहना है कि मामला अदालत में होने के कारण विभाग फिलहाल कुछ नहीं कर सकता. एक अधिकारी ने कहा, “हमारे अलग-अलग एएसआई सर्किलों में कर्मचारियों की बहुत जरूरत है क्योंकि डिप्टी सुपरिंटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट के आधे से ज्यादा पद खाली हैं. लेकिन मामला कोर्ट में होने के कारण हम कुछ नहीं कर सकते.”

यह अकेली भर्ती नहीं है जो अटकी हुई है. इससे पहले दिप्रिंट ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि एएसआई ने 2024 में निकले असिस्टेंट आर्कियोलॉजिस्ट के 50 पदों पर भर्ती भी टाल दी है. इससे विभाग में कर्मचारियों की कमी और बढ़ गई है.

ग्राफिक्स: श्रुति नैथानी/दिप्रिंट
ग्राफिक्स: श्रुति नैथानी/दिप्रिंट

प्रमोशन, उम्र और एक दशक का नुकसान

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में वर्षों से काम कर रहे असिस्टेंट सुपरिंटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट के लिए यह लड़ाई सिर्फ एक भर्ती अधिसूचना की नहीं है. उनका कहना है कि सरकार के फैसले का इंतजार करते-करते उन्होंने अपने करियर का एक बड़ा मौका खो दिया.

अगस्त 2024 में यूपीएससी द्वारा भर्ती का विज्ञापन जारी होने के तुरंत बाद, एएसआई में काम कर रहे 11 एएसए अधिकारियों ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण का दरवाजा खटखटाया. उनका कहना था कि भर्ती विभाग के अपने ही नियमों के मुताबिक नहीं की गई.

इन नियमों के अनुसार, डिप्टी सुपरिंटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट के एक-तिहाई पद विभागीय फीडर कैडर से पदोन्नति के जरिए भरे जाने चाहिए, जबकि बाकी दो-तिहाई पद सीधी भर्ती से भरे जाने हैं. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस नियम का पालन नहीं किया गया. लेकिन उनकी शिकायत सिर्फ पदोन्नति तक सीमित नहीं है.

उनका कहना है कि सबसे बड़ी समस्या यह है कि 10 साल की देरी की वजह से उनमें से कई लोग अब सीधी भर्ती के लिए आवेदन करने की पात्रता ही खो चुके हैं. एएसआई में लगभग 10 साल काम करने के बाद कई विभागीय पुरातत्वविद 35 साल की अधिकतम उम्र सीमा पार कर चुके हैं.

एक आवेदक ने कहा, “विभाग में काम करते-करते हम उम्र सीमा पार कर चुके हैं. इसलिए हमें उम्र में छूट मिलनी चाहिए, ताकि हम इस भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा ले सकें.”

इस मुद्दे पर सीएटी ने भी कुछ हद तक सहमति जताई. आशीष रंजन साहू बनाम भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण मामले में सीएटी ने कहा कि अगर आवेदकों को भर्ती में हिस्सा लेने का मौका नहीं दिया गया, तो उनके साथ अन्याय होगा. इसलिए ट्रिब्यूनल ने मामला लंबित रहने तक उन्हें ऑफलाइन आवेदन करने की अनुमति दे दी.

दिप्रिंट ने याचिकाकर्ता आशीष रंजन साहू से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने इस मामले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. सुनवाई के दौरान यूपीएससी ने कहा कि वह सिर्फ एएसआई से मिले भर्ती प्रस्तावों के आधार पर विज्ञापन जारी करता है.

अप्रैल 2025 में दिए गए अपने आदेश में सीएटी ने एक कदम और आगे बढ़ते हुए सिफारिश की कि यूपीएससी विभागीय उम्मीदवारों को उम्र में छूट दे, क्योंकि उन्होंने कई साल एएसआई में सेवा दी है. सीएटी ने कहा, “पूरे मामले को देखते हुए हमारा मानना है कि यह ऐसा मामला है, जिसमें एएसआई की सिफारिश पर यूपीएससी को आवेदकों को उम्र में छूट देनी चाहिए, ताकि वे नए उम्मीदवारों और बाहरी लोगों के साथ इस भर्ती में प्रतिस्पर्धा कर सकें.”

हालांकि, यह राहत ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी. पांच महीने बाद, यूपीएससी ने सीएटी के इस आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी. UPSC का कहना था कि वह भर्ती नियमों या भर्ती विज्ञापन में तय सीमा से ज्यादा उम्र में छूट नहीं दे सकता.

इस कानूनी लड़ाई के कारण भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर रुक गई है.

यह मामला फिलहाल दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित है और इसकी अगली सुनवाई 15 जुलाई को होनी है.

अदालत में चल रही लड़ाई

भर्ती को अदालत में चुनौती देने वाले कई असिस्टेंट सुपरिंटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट के लिए यह मामला 2024 में यूपीएससी का विज्ञापन आने से शुरू नहीं हुआ था. इसकी शुरुआत 10 साल से भी पहले हो चुकी थी.

इनमें से ज्यादातर लोगों का चयन 2009 में जारी भर्ती अधिसूचना के जरिए असिस्टेंट आर्कियोलॉजिस्ट के पद पर हुआ था, लेकिन कोर्ट में मामला चलने की वजह से उनकी नियुक्ति में देरी हुई और वे जुलाई 2013 में जाकर एएसआई में शामिल हो सके. उनका कहना है कि इसी देरी के बाद ऐसी घटनाओं की शुरुआत हुई, जिससे वे आज तक बाहर नहीं निकल पाए.

इसके बाद कई साल तक डिप्टी सुपरिंटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट के पदों पर कोई भर्ती नहीं हुई. फिर एक और झटका लगा. 2018 से 2019 के बीच एएसआई ने अपने भर्ती नियमों में बदलाव करना शुरू किया, जिससे नई भर्तियां रुक गईं. इसके कुछ समय बाद कोविड-19 महामारी आ गई, जिससे पूरी प्रक्रिया और धीमी हो गई. जब आखिरकार भर्ती दोबारा शुरू हुई, तब तक कई विभागीय पुरातत्वविद मैदान में काम करते हुए करीब 10 साल पूरे कर चुके थे और सीधी भर्ती की अधिकतम उम्र सीमा पार कर चुके थे.

यह लंबा इंतज़ार एएसआई में हुए बड़े बदलावों के साथ भी जुड़ा रहा. 2020 में नीति आयोग ने हेरिटेज मैनेजमेंट पर अपनी रिपोर्ट में एएसआई में कर्मचारियों की भारी कमी की ओर ध्यान दिलाया. रिपोर्ट में कहा गया कि अच्छे प्रतिभाशाली लोगों को जोड़ने और भर्ती में हो रही देरी को दूर करने के लिए एएसआई का पुनर्गठन किया जाना चाहिए.

रिपोर्ट में कहा गया, “संगठन में बेहतरीन प्रतिभाओं को शामिल करने और विशेषज्ञों को नियुक्त करने में लचीलापन होना चाहिए.” रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भर्ती नियमों को अंतिम रूप देने की लंबी प्रक्रिया के कारण कर्मचारियों की भारी कमी है. इस रिपोर्ट के बाद एएसआई ने अपने कर्मचारियों के लिए पदों की व्यवस्था (कैडर रिव्यू) की, ताकि कमियों को दूर किया जा सके और कर्मचारियों के करियर में आगे बढ़ने के मौके बेहतर हों.

इसी प्रक्रिया के तहत 2021 में डिप्टी सुपरिंटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट के स्वीकृत पद 65 से बढ़ाकर 120 कर दिए गए. यानी 55 नए पद बनाए गए. एएसआई में काम कर रहे पुरातत्वविदों को लगा कि उन्हें लंबे समय से जिस राहत का इंतजार था, वह अब मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

2021 में इन पदों के लिए निकाला गया विज्ञापन वापस ले लिया गया. मई 2024 में शुरू हुई एक और भर्ती प्रक्रिया का भी यही हाल हुआ. फिर अगस्त 2024 में नई भर्ती अधिसूचना जारी हुई, लेकिन वह भी कोर्ट केस में फंस गई. इसके बाद अदालत में यह लड़ाई और बड़ी हो गई.

श्रीमति अल्का सिंह बनाम भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण मामले में 37 असिस्टेंट सुपरिंटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण में याचिका दायर की. उन्होंने एएसआई को उन्हें पदोन्नति के लिए विचार करने का निर्देश देने और भर्ती अधिसूचना रद्द करने की मांग की. उनकी दलील 2021 के कैडर रिव्यू पर आधारित है.

उनका कहना है कि जब डिप्टी सुपरिंटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट के स्वीकृत पद काफी बढ़ा दिए गए थे, तो पदोन्नति का कोटा भी उसी अनुपात में बढ़ना चाहिए था. लेकिन अतिरिक्त पदों को पदोन्नति के बजाय सीधी भर्ती में डाल दिया गया. एक आवेदक ने कहा, “मिडिल और सीनियर स्तर पर सीधी भर्ती के जरिए लैटरल एंट्री का तरीका एएसआई में सही तरह से काम नहीं कर पाया है. यूपीएससी जैसी एजेंसियों से चुने गए उम्मीदवारों के पास अक्सर वह विशेष फील्ड अनुभव नहीं होता, जिसकी एएसआई को ज़रूरत होती है.”

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने एएसआई में करीब 10 साल तक देश के अलग-अलग हिस्सों में काम किया है. इसलिए वे सीधी भर्ती से आने वाले बाहरी उम्मीदवारों की तुलना में पदोन्नति के ज्यादा हकदार हैं. आवेदकों के मुताबिक, एएसआई के अधिकारियों ने उन्हें कई बार भरोसा दिलाया था कि कैडर रिव्यू के दौरान बनाए गए अतिरिक्त पद पदोन्नति से भरे जाएंगे.

एक आवेदक ने कहा, “हमने इसी बात को चुनौती दी है कि पदोन्नति वाले कोटे के पदों को सीधी भर्ती के कोटे में भेज दिया गया. एएसआई अपने पहले के रुख से पूरी तरह पलट गया है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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