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Thursday, 4 June, 2026
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RSP प्रमुख लामिछाने की मोदी से मुलाकात के कुछ दिन बाद नेपाल के विदेश मंत्री खनाल करेंगे भारत का दौरा

छह जून से शुरू होने वाले तीन दिवसीय दौरे में खनाल के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से बातचीत करने की उम्मीद है.

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नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के प्रमुख रवि लामिछाने के भाजपा के निमंत्रण पर भारत दौरे के कुछ दिनों बाद, नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल 6 जून को विदेश मंत्री एस. जयशंकर के निमंत्रण पर अपनी पहली आधिकारिक नई दिल्ली यात्रा पर आने वाले हैं. तीन दिन के इस दौरे के दौरान खनाल के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से भी बातचीत करने की उम्मीद है.

एजेंडे में शामिल प्रमुख मुद्दों में पंचेश्वर बहुउद्देशीय परियोजना, प्रस्तावित पूर्व-पश्चिम रेलवे, जनकपुर और अयोध्या को जोड़ने वाली रेल लाइन की योजना, पेट्रोलियम पाइपलाइन ढांचे का विस्तार और व्यापार व ट्रांजिट व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के प्रयास शामिल होंगे. नेपाल भारत से अतिरिक्त हवाई प्रवेश मार्ग भी चाहता है, ताकि पोखरा और भैरहवा में बने उसके दो नए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों का संचालन बेहतर हो सके. ये दोनों हवाई अड्डे खुलने के बाद से अब तक पर्याप्त अंतरराष्ट्रीय यातायात आकर्षित नहीं कर पाए हैं.

बातचीत में डिजिटल सहयोग का मुद्दा भी शामिल हो सकता है. इसमें सीमा-पार क्यूआर भुगतान प्रणाली को लागू करने पर चर्चा होगी, जिससे नेपाली नागरिक भारत यात्रा के दौरान इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्लेटफॉर्म का आसानी से इस्तेमाल कर सकें.

दोनों विदेश मंत्रियों की पिछली मुलाकात मॉरीशस में हिंद महासागर सम्मेलन के दौरान हुई थी. उस समय दोनों ने कूटनीतिक संपर्क बढ़ाने और नेपाल के नए राजनीतिक नेतृत्व के तहत द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के तरीकों पर काम करने पर सहमति जताई थी.

हाल के महीनों में दोनों देशों के रिश्तों में तनाव देखने को मिला है, खासकर लिपुलेख क्षेत्र को लेकर सीमा विवाद के कारण. यह तनाव तब फिर बढ़ गया जब भारत और चीन ने लिपुलेख मार्ग से कैलाश-मानसरोवर यात्रा फिर शुरू करने पर सहमति जताई. नेपाल इस क्षेत्र पर अपना दावा करता है.

काठमांडू ने इस मुद्दे पर नई दिल्ली और बीजिंग दोनों के सामने कूटनीतिक विरोध दर्ज कराया था. बाद में नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री बालेन शाह ने इस विवाद के समाधान के लिए चीन और ब्रिटेन से समर्थन मांगा और दावा किया कि नेपाल ने भी भारतीय क्षेत्र में अतिक्रमण किया है. भारत ने जवाब देते हुए कहा कि सीमा विवाद केवल स्थापित द्विपक्षीय तंत्र के जरिए ही सुलझाए जाने चाहिए और किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को खारिज कर दिया.

ऐसे माहौल में खनाल की यह यात्रा राजनीतिक भरोसा फिर से मजबूत करने पर केंद्रित रहने की उम्मीद है. साथ ही दोनों देशों के बीच आर्थिक और कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर भी चर्चा होगी. यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब पिछले महीने उनकी प्रस्तावित दिल्ली यात्रा को स्थगित कर दिया गया था. भारत ने अफ्रीका में इबोला मामलों में बढ़ोतरी के कारण इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (IBCA) शिखर सम्मेलन को टाल दिया था.

इस बीच, इसी हफ्ते आरएसपी अध्यक्ष रवि लामिछाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में नेपाल-भारत संबंधों के नए अध्याय की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति जताई. इस बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी मौजूद थे.

काठमांडू पोस्ट के अनुसार, लामिछाने ने मोदी से कहा कि आरएसपी किसी पुराने राजनीतिक बोझ के साथ नहीं आती और वह भारत के साथ संबंधों के लिए एक नया ढांचा बनाना चाहती है. मोदी ने पार्टी के अच्छे चुनावी प्रदर्शन पर बधाई देते हुए कहा कि भारत नेपाल के नए नेतृत्व के साथ मिलकर काम करने और उसकी विकास प्राथमिकताओं में सहयोग देने के लिए तैयार है.

हालांकि, सीमा विवाद पर औपचारिक चर्चा नहीं हुई. दोनों पक्षों ने कनेक्टिविटी, पर्यटन, जलविद्युत और डिजिटल बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया. लामिछाने इसे “विकास कूटनीति” बताते हैं.

मोदी ने कहा कि भारत की “पड़ोसी पहले” नीति के तहत नेपाल अब भी प्राथमिकता में है. उन्होंने कहा कि जैसे ही काठमांडू अपनी प्रमुख विकास प्राथमिकताएं तय करेगा, भारत सहयोग को और गहरा करने के लिए तैयार है. मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह को भारत आने का निमंत्रण भी दिया.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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