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Tuesday, 26 May, 2026
होमविदेश‘इतिहास का बचा हुआ केस’—शरीफ की यात्रा के बाद चीन-पाकिस्तान ने संयुक्त बयान में कश्मीर मुद्दा उठाया

‘इतिहास का बचा हुआ केस’—शरीफ की यात्रा के बाद चीन-पाकिस्तान ने संयुक्त बयान में कश्मीर मुद्दा उठाया

बयान के मुताबिक, पाकिस्तान ने चीन को 'लेटेस्ट डेवलपमेंट' के बारे में बताया, चीन ने अपनी बात दोहराई कि विवाद को UNSC के प्रस्तावों और द्विपक्षीय समझौतों के अनुसार शांति से सुलझाया जाना चाहिए.

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नई दिल्ली: चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान में मंगलवार को कश्मीर मुद्दे को “इतिहास से बचा हुआ” बताया गया और कहा गया कि इसका समाधान शांतिपूर्ण तरीके से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के ढांचे के तहत किया जाना चाहिए.

ये टिप्पणी 25 मई को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बीच उच्च स्तरीय बातचीत के बाद आई.

यह बयान पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने जारी किया, जब प्रधानमंत्री शहबाज चार दिन की चीन यात्रा पूरी कर रहे थे. बयान के अनुसार, पाकिस्तान ने चीनी पक्ष को जम्मू और कश्मीर में “हाल की घटनाओं” की जानकारी दी. चीन ने अपने लंबे समय से चले आ रहे रुख को दोहराते हुए कहा कि इस विवाद को “संयुक्त राष्ट्र चार्टर, संबंधित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और द्विपक्षीय समझौतों के अनुसार ठीक और शांतिपूर्ण तरीके से हल किया जाना चाहिए”.

“दोनों पक्षों ने किसी भी एकतरफा कार्रवाई का विरोध दोहराया और दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता बनाए रखने तथा सभी लंबित विवादों को बातचीत और कूटनीति के जरिए हल करने के महत्व की पुष्टि की. पाकिस्तानी पक्ष ने चीनी पक्ष को जम्मू और कश्मीर की स्थिति में हाल की घटनाओं की जानकारी दी. चीनी पक्ष ने दोहराया कि जम्मू और कश्मीर का विवाद इतिहास से बचा हुआ मुद्दा है और इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर, संबंधित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और द्विपक्षीय समझौतों के अनुसार ठीक और शांतिपूर्ण तरीके से हल किया जाना चाहिए,” बयान में कहा गया.

भारत पर परोक्ष टिप्पणी करते हुए बयान में यह भी कहा गया. “दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद विरोधी सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया और आतंकवाद के मामले में दोहरे मापदंडों का विरोध तथा आतंकवाद को राजनीतिक बनाने और उसका इस्तेमाल करने का विरोध दोहराया”.

दोनों देशों ने आगे कई रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का वादा किया, जिनमें आतंकवाद विरोध, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरराष्ट्रीय शासन और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग शामिल हैं. बयान में सीमापार जल संसाधनों पर भी “समानता और पारस्परिक लाभ” के सिद्धांतों के तहत सहयोग का उल्लेख किया गया.

नई दिल्ली ने लगातार कहा है कि जम्मू और कश्मीर भारत का “अखंड और अविभाज्य” हिस्सा है और इस क्षेत्र से जुड़े किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को पूरी तरह खारिज किया है.

भारत ने यह भी दोहराया है कि जम्मू और कश्मीर से जुड़े सभी मुद्दे भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय रूप से हल किए जाने चाहिए. सरकार ने इस क्षेत्र से जुड़े संवैधानिक और प्रशासनिक फैसलों को भारत का आंतरिक मामला बताया है.

चीन द्वारा पाकिस्तान के रुख का यह नया समर्थन ऐसे समय आया है जब एशिया में भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है. एक तरफ चीन और पाकिस्तान रणनीतिक सहयोग बढ़ा रहे हैं, वहीं भारत अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ क्वाड जैसे मंचों के जरिए अपने संबंध मजबूत कर रहा है.

हालांकि चीन पहले भी बहुपक्षीय मंचों पर कश्मीर पर टिप्पणी करता रहा है, लेकिन पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय बयान में ऐसे संदर्भ विशेष राजनीतिक महत्व रखते हैं, क्योंकि यह पाकिस्तान की प्रमुख विदेश नीति पर चीन के लगातार समर्थन को दिखाता है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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