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विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ।पीटीआई
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नई दिल्ली: पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भारत के अपने समकक्ष विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का मज़ाक उड़ाते हुए ऐसे आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया जिससे शायद नई दिल्ली नाराज़ हो जाए.

उन्होंने कहा कि ‘मैं नहीं कह सकता कि क्या हुआ. मैं नहीं कह सकता कि सुषमा जी शरमा गई पर मुझे लगता है कि भारतीय राजनीति बीच में आ गई.’ कुरैशी सुषमा स्वराज से न्यू यॉर्क में होने वाली अपनी सितम्बर की बैठक के रद्द होने पर टिप्पणी कर रहें थे.

भारत ने दोनों मंत्रियों के बीच वो प्रस्तावित बैठक रद्द कर दी थी जो संयुक्त राष्ट्र महासभा के साइडलाइन पर होनी थी. भारत ने ये फैसला जम्मू कश्मीर में एक पुलिसकर्मी की नृशंस हत्या के बाद और पाकिस्तान के कश्मीरी आतंकवादी बुरहान वानी की याद में डाक टिकट जारी करने के बाद लिया था.

प्रस्तावित बैठक को दोनों देशों के रिश्तों में गर्माहट के संकेत के रूप में देखा जा रहा था जोकि दोनों प्रतिद्वंदी मुल्कों के बीच इमरान खान के पाकिस्तान के प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद आयी थी. पर बैठक की धोषणा होने के एक दिन बाद ही इसे रद्द कर दिया गया.

कुरैशी का ये वक्तव्य गुरुवार को इमरान खान की तेहरीक ए इंसाफ पार्टी के सत्ता में काबिज़ होने के 100 दिनों के समारोह में दिया गया था. वे अपने मंत्रालय की उपलब्धियों का ब्यौरा दे रहे थे.

कुरैशी ने ये भी कहा कि पाकिस्तान ने भारत से रिश्तें सुधारने की कई कोशिशें की पर नई दिल्ली ने उसको खारिज कर दिया. उनका कहना था कि पाकिस्तान की ‘नपी तुली,’ ‘सोच समझकर’ और ‘बार बार’ की गई इस कोशिश को नकार दिया गया. इसलिए खान ने एक ‘गूगली’ फैंकी ताकि भारत के दो मंत्री करतारपुर कॉरिडोर के निर्माण की आधारशिला समारोह में पहुंचे.

कुरैशी के भाषण को इमरान खान पहली पंक्ती में बैठे सुन रहें थे. कुरैशी ने कहा, ‘इमरान खान ने भारत पर करतारपुर गूगली फैंकी और नतीजतन भारत जो पाकिस्तान से बात करने को तैयार नहीं था, को समारोह के लिए दो मंत्रियों को पाकिस्तान भेजना पड़ा और उनकों हमसे बात करनी पड़ी. ’

उन्होंने साथ ही कहा कि ‘हमें खुशी है कि वे आए क्योंकि हमारा संदेश शांति का है.’

इमरान खान ने जहां एक बार फिर भारत पाकिस्तान के बीच बातचीत का प्रस्ताव दोहराया, स्वराज ने बुधवार को कहा था कि इस्लामाबाद से तब तक बात नहीं होगी जब तक पाकिस्तान सीमा पार से आतंकवाद का खात्मा नहीं कर देता.

स्वराज को भी करतारपुर कॉरिडोर के समारोह के लिए न्यौता दिया गया था पर वे खराब स्वास्थ्य का हवाला दे कर वहां नहीं गईं थी.

इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.


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