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Friday, 26 June, 2026
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कनाडा की खुफिया एजेंसी ने एयर इंडिया कनिष्क बम धमाके के लिए ‘खालिस्तानियों’ को बताया जिम्मेदार

CSIS का बयान उसके रुख में एक अहम बदलाव है. ठीक पिछले महीने ही, उसने कहा था कि सिख अलगाववादी 'विदेशों में चरमपंथी गतिविधियों के लिए, खासकर भारत के खिलाफ, कनाडा का इस्तेमाल करके फंड जुटा रहे हैं.'

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नई दिल्ली: कनाडा की खुफिया एजेंसी ने बुधवार को पहली बार “खालिस्तानियों” को 1985 में एयर इंडिया फ्लाइट 182 बम विस्फोट के लिए जिम्मेदार ठहराया, जिसमें 329 लोगों की मौत हो गई थी. संयोग से, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का इस हमले पर बयान अपने पूर्ववर्ती की तुलना में आतंकवाद से निपटने के उनके सरकार के प्रयासों को लेकर ज्यादा संतुलित था.

“आतंकवाद के पीड़ितों के राष्ट्रीय स्मरण दिवस पर, CSIS एयर इंडिया फ्लाइट 182 के 329 लोगों को याद करता है, जिन्होंने एक जघन्य आतंकी कृत्य में अपनी जान गंवाई. 23 जून 1985 को, कनाडा स्थित खालिस्तानी चरमपंथियों द्वारा लगाया गया बम विमान में फट गया, जिससे सभी लोग मारे गए. इनमें से अधिकतर कनाडा के नागरिक थे. यह कनाडा के इतिहास का सबसे घातक आतंकी हमला है और हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा समुदाय के लिए एक निर्णायक क्षण है,” कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा (CSIS) ने 23 जून को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर कहा.

“CSIS उस समय एक साल से भी कम पुरानी थी, और इस त्रासदी ने इसके विकास को आकार दिया. पिछले चार दशकों में, हम राजनीतिक, धार्मिक और विचारधारात्मक रूप से प्रेरित हिंसा से कनाडाई नागरिकों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध रहे हैं,” बयान में आगे कहा गया.

एयर इंडिया विमान हमले के लिए केवल एक व्यक्ति को ही दोषी ठहराया गया था. कनाडाई अधिकारियों ने हमले से पहले कई चेतावनियों के बावजूद खतरों की गंभीरता को पहचानने में विफलता दिखाई, जिनमें भारत की चेतावनियां भी शामिल थीं. कनाडाई अधिकारियों की एक के बाद एक गलतियों की वजह से चरमपंथियों को दो एयर इंडिया उड़ानों को निशाना बनाने का मौका मिला.

जब फ्लाइट 182 में लगा बम आयरलैंड के तट के पास हवा में ही फट गया, तो विमान में सवार सभी लोग मारे गए. जबकि दूसरी फ्लाइट 301 को टोक्यो में निशाना बनाया गया था, लेकिन उसका बम समय से पहले फट गया, जिससे नारिता अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दो बैगेज हैंडलरों की मौत हो गई.

कनाडाई खुफिया सेवा की यह मान्यता उसकी स्थिति में एक अहम बदलाव है. पिछले महीने ही इस एजेंसी ने कहा था कि सिख अलगाववादी कनाडा का इस्तेमाल विदेशों में, खासकर भारत के खिलाफ, चरमपंथी गतिविधियों के लिए फंड जुटाने में कर रहे हैं.

पिछले करीब चार दशकों तक कनाडा अक्सर देश के भीतर सिख अलगाववादियों की बढ़ती भूमिका और उनके द्वारा विदेशों में चरमपंथी हमलों में मदद की बात को स्वीकार करने से बचता रहा है. इसके बजाय, कनाडा ने इन गतिविधियों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के नाम पर सही ठहराया है.

इस साल की CSIS रिपोर्ट में भी कहा गया है कि “खालिस्तान नामक अलग राज्य के लिए शांतिपूर्ण समर्थन” कानूनी है, जबकि कुछ लोग कनाडा का इस्तेमाल विदेशों में हिंसक गतिविधियों के लिए फंड इकट्ठा करने और योजना बनाने के लिए कर रहे हैं.

पूर्व कनाडाई सरकार, जिसका नेतृत्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो कर रहे थे, इस मुद्दे पर भारत सरकार से कई बार टकरा चुकी थी. ट्रूडो ने भारत के अधिकारियों पर हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से जुड़े होने का आरोप लगाया था.

निज्जर, जिसे भारत ने आतंकवादी घोषित किया था, की जून 2023 में ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में एक गुरुद्वारे के बाहर हत्या कर दी गई थी. तीन महीने बाद, 18 सितंबर को ट्रूडो ने कनाडा की संसद में भारत के अधिकारियों पर हत्या से जुड़े होने का आरोप लगाया था.

इन आरोपों के बाद दोनों देशों के रिश्ते पूरी तरह बिगड़ गए. एक साल बाद अक्टूबर 2024 में भारत ने छह कनाडाई राजनयिकों को निष्कासित कर दिया, जिनमें कार्यवाहक उच्चायुक्त स्टीवर्ट व्हीलर भी शामिल थे. साथ ही भारत ने अपने छह राजनयिकों को भी वापस बुला लिया, जिनमें तत्कालीन उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा शामिल थे.

यह घटना एक दुर्लभ पल था जब भारत ने एक G7 देश के खिलाफ कड़े कूटनीतिक कदम उठाए. इसके बाद संबंधों में सुधार हुआ, जब मार्च 2025 में मार्क कार्नी ने लिबरल पार्टी का नेतृत्व संभाला.

कार्नी ने अप्रैल 2025 के चुनावों में पार्टी को जीत दिलाई और इसके बाद उन्होंने भारत के साथ सुरक्षा मुद्दों को व्यापक राजनीतिक संबंधों से अलग रखा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले जून में G7 शिखर सम्मेलन के लिए कनाडा गए थे, जिससे दोनों देशों ने लगभग एक साथ अपने उच्चायुक्तों की पुनर्नियुक्ति की.

कनाडा के प्रधानमंत्री ने इस साल मार्च में भारत का आधिकारिक दौरा किया, जिससे संबंध और मजबूत हुए. भारत और कनाडा ने मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत फिर से शुरू कर दी है और इस साल के अंत तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा है.

इस साल हमले की वर्षगांठ पर कार्नी का बयान ज्यादा सख्त था, जिसमें कहा गया कि “एयर इंडिया फ्लाइट 182 की विरासत हमें याद दिलाने के साथ-साथ सतर्क भी करती है.”

“कनाडा की सरकार सभी रूपों में हिंसक उग्रवाद का सामना कर रही है और उसकी निंदा कर रही है. इसके लिए नए कानून लाए जा रहे हैं ताकि कनाडाई नागरिकों की सुरक्षा मजबूत हो, राष्ट्रीय सुरक्षा संस्थान मजबूत हों, और आतंक के वित्तपोषण और समर्थन नेटवर्क को रोका जा सके,” उन्होंने कहा.

कनाडा के प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि 329 मासूम लोगों में से 268 कनाडाई नागरिक थे. यह हमला 11 सितंबर 2001 के अमेरिकी हमलों तक विमानन आतंकवाद की सबसे घातक घटना थी.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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