नई दिल्ली: भारत ने सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले BRICS नेताओं के शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को न्योता दिया है. यह निमंत्रण पिछले गुरुवार को ढाका में सौंपा गया.
बांग्लादेश BRICS का सदस्य नहीं है. उसे बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल (BIMSTEC) के अध्यक्ष देश के तौर पर विशेष अतिथि के रूप में बुलाया गया है. प्रधानमंत्री तारिक रहमान को भेजा गया यह निमंत्रण नई दिल्ली की दोहरी कोशिश का हिस्सा है. पहला, दोनों देशों के रिश्तों में सुधार का संकेत देना. दूसरा, BIMSTEC को बढ़ावा देना.
इस निमंत्रण के साथ नई दिल्ली ने करीब एक दशक पहले BRICS-BIMSTEC संवाद शुरू करने की अपनी कोशिश फिर से आगे बढ़ाई है. इससे पहले अक्टूबर 2016 में गोवा में BRICS नेताओं का आखिरी प्रत्यक्ष शिखर सम्मेलन हुआ था.
BIMSTEC में सात सदस्य देश हैं. भूटान, बांग्लादेश, भारत, नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका और थाईलैंड. यह संगठन क्षेत्रीय संपर्क और सहयोग को बढ़ाने के भारत के विजन का हिस्सा है.
1997 में गठन के बाद से यह संगठन धीरे-धीरे ही संस्थागत रूप ले पाया है. इसकी एक वजह यह भी रही कि दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) जैसे दूसरे क्षेत्रीय संगठन पहले से सक्रिय थे. हालांकि भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में खराबी के कारण SAARC पिछले एक दशक से लगभग निष्क्रिय है.
ऐसे में भारत BIMSTEC देशों के बीच ज्यादा करीबी सहयोग बढ़ाने पर जोर देता रहा है.
बांग्लादेश ने अप्रैल 2025 में BIMSTEC की अध्यक्षता संभाली थी. प्रधानमंत्री रहमान की नई सरकार भी SAARC को फिर से सक्रिय करने की कोशिश कर रही है. कहा जाता है कि उनके पिता और पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान ने 1981 में अपनी हत्या से पहले इस संगठन की रूपरेखा तैयार करने में भूमिका निभाई थी.
भारत के लिए BIMSTEC अब भी क्षेत्रीय कूटनीति का सबसे अहम आधार है. कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि प्रधानमंत्री रहमान नई दिल्ली में होने वाले BRICS सम्मेलन में शामिल हो पाएंगे या नहीं.
अगस्त 2024 में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में भारी गिरावट आई थी. अगस्त 2024 से फरवरी 2026 तक मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने नई दिल्ली के प्रति कड़ा रुख अपनाया था.
लेकिन फरवरी में आम चुनाव और रहमान की जीत के बाद दोनों देशों ने रिश्तों को संभालने के लिए संतुलित तरीका अपनाया है. बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलील-उर-रहमान मई में नई दिल्ली आए थे और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की थी.
हाल ही में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रक्षा सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल ए.के.एम. शमसुल इस्लाम (सेवानिवृत्त) भी इस महीने नई दिल्ली में हुई BIMSTEC राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुखों की बैठक में शामिल हुए थे.
हालांकि रिश्तों में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा विवादित मुद्दा, अवैध प्रवासन, अब भी हल नहीं हुआ है.
बांग्लादेश ने बिना तय प्रक्रिया अपनाए संदिग्ध बांग्लादेशी घुसपैठियों को सीमा पार वापस भेजने यानी “पुशिंग-इन” की नीति पर नाराजगी जताई है.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने अप्रैल में मीडिया से बातचीत के दौरान पहली बार संदिग्ध अवैध प्रवासियों को पकड़कर सीमा पार भेजने की इस प्रक्रिया का जिक्र किया था.
गंगा जल संधि का नवीनीकरण, जिसकी अवधि इस साल के अंत में खत्म हो रही है, भारत और बांग्लादेश के रिश्तों को सामान्य बनाने में एक और बड़ी बाधा बना हुआ है.
प्रधानमंत्री रहमान अब तक दो विदेशी दौरे कर चुके हैं. मलेशिया और चीन.
BRICS शिखर सम्मेलन सितंबर के पहले पखवाड़े में नई दिल्ली में होने की उम्मीद है. भारत इससे पहले 2012, 2016 और कोविड-19 महामारी के दौरान 2021 में वर्चुअल तरीके से BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर चुका है.
BRICS में पहले ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे. 2023 के जोहान्सबर्ग शिखर सम्मेलन के बाद मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब भी इसके सदस्य बन गए. विस्तारित BRICS संगठन की भारत में यह पहली बैठक होगी.
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