बीजिंग: बांग्लादेश और चीन ने गुरुवार को तीस्ता और अन्य नदियों के प्रबंधन में सहयोग मजबूत करने पर सहमति जताई.
यह सहमति तब बनी जब चीन के जल संसाधन मंत्री ली गुओयिंग ने वर्तमान में बीजिंग दौरे पर मौजूद बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात की. सरकारी समाचार एजेंसी बांग्लादेश संगबाद संस्था (बीएसएस) ने यह जानकारी दी.
इस साल की शुरुआत में पद संभालने के बाद रहमान ने अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए मलेशिया को चुना था. वे 22 जून को कुआलालंपुर से चीन के डालियान शहर पहुंचे थे, जहां उन्होंने विश्व आर्थिक मंच के एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया था.
बुधवार को वे डालियान से हाई-स्पीड ट्रेन के जरिए बीजिंग पहुंचे. वहां उनकी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, प्रधानमंत्री ली कियांग और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठकें होने की उम्मीद है.
ली के साथ बैठक के दौरान रहमान ने बांग्लादेश के चल रहे नदी खुदाई कार्यक्रम का जिक्र किया, जिसका उद्देश्य बाढ़ के खतरे को कम करना, पर्यावरण की रक्षा करना और जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना है.
इस संबंध में उन्होंने बांग्लादेश के जल संसाधन प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए चीन से सहयोग मांगा.
रहमान ने तीस्ता प्रबंधन परियोजना में भी चीन से तकनीकी सहायता की मांग की.
इसके जवाब में चीनी मंत्री ने जल संसाधन प्रबंधन से जुड़ी बांग्लादेश सरकार की पहलों में पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया.
ढाका और बीजिंग के बीच 2005 में हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) और पिछले साल बांग्लादेश के दौरे पर गए चीनी जल विशेषज्ञों का जिक्र करते हुए ली ने कहा कि जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग व्यावहारिक और शोध आधारित है.
रहमान ने नदी कटाव रोकने, सिंचाई व्यवस्था सुधारने और बांग्लादेश में आंतरिक जल परिवहन को बेहतर बनाने के लिए भी चीन से सहायता मांगी.
चीनी मंत्री ने कहा कि बांग्लादेश जल प्रबंधन के क्षेत्र में चीन के अनुभव से लाभ उठा सकता है. उन्होंने बांग्लादेश के जल विशेषज्ञों और संबंधित अधिकारियों को प्रशिक्षण के लिए चीन आने का निमंत्रण भी दिया.
तीस्ता परियोजना भारत-बांग्लादेश संबंधों में एक संवेदनशील मुद्दा है. फरवरी में रहमान सरकार के सत्ता में आने के बाद दोनों देशों के संबंधों में सुधार के संकेत मिले हैं. इससे पहले मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के संक्षिप्त कार्यकाल के दौरान नई दिल्ली और ढाका के संबंधों में गिरावट आई थी.
पिछले महीने रहमान सरकार ने औपचारिक रूप से तीस्ता नदी पुनर्स्थापन परियोजना के लिए चीन की भागीदारी और समर्थन की मांग की थी. उस समय विदेश मंत्री खलीलुर रहमान बीजिंग दौरे पर गए थे. बीएसएस ने उस समय यह जानकारी दी थी.
तीस्ता नदी पूर्वी हिमालय से निकलती है और सिक्किम तथा पश्चिम बंगाल से होकर बांग्लादेश में प्रवेश करती है. वहां यह लाखों लोगों के लिए सिंचाई और आजीविका का एक महत्वपूर्ण स्रोत है.
चीन कई वर्षों से तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और पुनर्स्थापन परियोजना को विकसित करने में रुचि दिखाता रहा है. यह परियोजना भारत के संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास स्थित है, जो मुख्य भूमि भारत को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है.
इसी पृष्ठभूमि में भारत ने 2024 में तीस्ता बेसिन के लिए तकनीकी और संरक्षण संबंधी सहायता की पेशकश की थी. यह सीमा-पार नदी प्रबंधन के मुद्दे पर ढाका के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए दिल्ली के प्रयासों का हिस्सा था.
जल बंटवारा नई दिल्ली और ढाका के संबंधों का एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है. यह मुद्दा इसलिए भी अधिक महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि गंगा नदी के सूखे मौसम में जल बंटवारे को लेकर 1996 में हुआ भारत-बांग्लादेश गंगा जल समझौता 30 वर्षों के लिए था और यदि इसका नवीनीकरण नहीं किया गया तो यह इस वर्ष समाप्त हो जाएगा.
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