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Tuesday, 10 February, 2026
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बांग्लादेश के मेमेन्सिंघ में एक और हिंदू व्यापारी की हत्या

18 दिसंबर 2025 को इसी जिले में एक भीड़ ने दीपू चंद्र दास की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. दीपू दास एक गारमेंट फैक्ट्री में काम करता था.

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ढाका: बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमले की एक और घटना सामने आई है. मंगलवार को उत्तरी बांग्लादेश के मेमेन्सिंघ जिले के त्रिशाल इलाके में एक हिंदू कारोबारी की अज्ञात लोगों ने हत्या कर दी.

बांग्लादेश पुलिस के मुताबिक, मृतक की पहचान 60 वर्षीय सुषेन चंद्र सरकार के रूप में हुई है. यह मामला तब सामने आया, जब सरकार सोमवार देर रात तक घर नहीं लौटे.

त्रिशाल सर्कल के पुलिस एएसपी हसन इसराफिल ने कहा, “सुषेन चंद्र सरकार एक कारोबारी थे. जब वह रात में घर नहीं लौटे, तो उनके बेटे ने उन्हें बार-बार फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. इसके बाद बेटा अपने पिता की दुकान पर गया, जहां उसने उन्हें कुख्यात अपराधियों द्वारा घायल अवस्था में पाया. उनके सिर पर धारदार हथियार से चोट लगी थी. उन्हें मेमेन्सिंघ मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.”

एएसपी ने आगे कहा कि हत्या के पीछे का मकसद अभी साफ नहीं है और मामले की जांच जारी है.

उन्होंने कहा, “हम अभी तक इस हत्या के पीछे का कारण पता नहीं लगा पाए हैं. हम अभी इस हत्या की वजह जानने की प्रक्रिया में हैं.”

18 दिसंबर 2025 को इसी जिले में एक भीड़ ने दीपू चंद्र दास की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. दीपू दास एक गारमेंट फैक्ट्री में काम करता था.

रिपोर्टों के मुताबिक, कथित ईशनिंदा के आरोप में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मारे गए दीपू दास के शव को बाद में लटका दिया गया और आग लगा दी गई.

डेली स्टार ने मेमेन्सिंघ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अब्दुल्ला अल मामून के हवाले से बताया कि एक फैक्ट्री अधिकारी ने भालुका पुलिस को जानकारी दी थी कि मजदूरों के एक समूह ने फैक्ट्री के अंदर दीपू पर हमला किया. उन पर फेसबुक पोस्ट में “पवित्र पैगंबर हजरत मुहम्मद (PBUH) के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी” करने का आरोप लगाया गया था.

फैक्ट्री सूत्रों ने डेली स्टार को बताया कि बाद में हमलावर दीपू को फैक्ट्री परिसर से बाहर ले गए, जहां स्थानीय लोग भी हमले में शामिल हो गए. इसके बाद उसकी मौत हो गई.

हालांकि, मेमेन्सिंघ में रैपिड एक्शन बटालियन (RAB)-14 के कंपनी कमांडर एमडी समसुझ्जामान ने डेली स्टार से कहा कि जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो कि मृतक ने फेसबुक पर ऐसा कुछ पोस्ट किया या लिखा हो, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हों. उन्होंने यह भी कहा कि न तो स्थानीय निवासी और न ही गारमेंट फैक्ट्री के सहकर्मी पीड़ित की ऐसी किसी गतिविधि की ओर इशारा कर सके.

पिछले महीने, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने 2025 में अल्पसंख्यक समुदायों को प्रभावित करने वाली घटनाओं और देश की कानून-व्यवस्था से जुड़े हालात पर आंकड़े जारी किए थे.

अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस द्वारा साझा की गई पुलिस रिकॉर्ड की आधिकारिक समीक्षा के मुताबिक, देश में अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों से जुड़े 645 मामलों को दर्ज किया गया. ये आंकड़े पूरे देश से सत्यापित एफआईआर, जनरल डायरी, चार्जशीट और पुलिस जांच से जुड़े अपडेट के आधार पर तैयार किए गए हैं.


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