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Tuesday, 15 September, 2026
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रिश्तों में तनाव के बीच भारत ने बांग्लादेश के अगले हाई कमिश्नर की नियुक्ति को मंज़ूरी नहीं दी

मौजूदा विदेश सचिव असद आलम सियाम को ढाका ने भारत में अगले हाई कमिश्नर के लिए चुना है, ऐसी खबरें हैं. हालांकि, भारत ने अभी तक मंजूरी नहीं दी है, जो प्रोटोकॉल के तहत जरूरी है.

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नई दिल्ली: दिप्रिंट को पता चला है कि भारत ने अभी तक असद आलम सियाम को नई दिल्ली में ढाका का अगला हाई कमिश्नर नियुक्त करने के लिए अपनी सहमति या मंजूरी नहीं दी है. ढाका की ओर से अलग-अलग देशों में नए हाई कमिश्नर और राजदूत नियुक्त करने की प्रक्रिया जुलाई में शुरू हुई थी.

ढाका ने सियाम को अपना अगला हाई कमिश्नर नियुक्त करने के लिए नई दिल्ली से मंजूरी मांगे एक महीने से ज्यादा समय हो चुका है. भारत की मंजूरी के बिना सियाम की औपचारिक सार्वजनिक घोषणा नहीं की जा सकती.

भारत में मौजूदा बांग्लादेशी हाई कमिश्नर एम. रियाज हमीदुल्लाह के अक्टूबर के मध्य के आसपास जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र में बांग्लादेश के स्थायी प्रतिनिधि के तौर पर नई जिम्मेदारी संभालने की उम्मीद है.

भारत की ओर से मंजूरी रोके जाने के कारण ढाका नई दिल्ली में नया हाई कमिश्नर नियुक्त नहीं कर सकता. राजनयिक संबंधों पर वियना कन्वेंशन के अनुच्छेद 4 में साफ कहा गया है कि “भेजने वाले देश को यह सुनिश्चित करना होगा कि जिस व्यक्ति को वह दूसरे देश में अपने मिशन के प्रमुख के रूप में नियुक्त करना चाहता है, उसके लिए उस देश की मंजूरी मिल गई है.”

इस मामले में भारत यानी जिस देश में राजनयिक भेजा जाना है, वह वियना कन्वेंशन के तहत उस व्यक्ति की नियुक्ति को खारिज करने की वजह बताने के लिए बाध्य नहीं है, जिसे भेजने वाला देश भेजना चाहता है. यह प्रक्रिया निजी रखी जाती है, ताकि अगर मेजबान देश किसी राजनयिक नियुक्ति को खारिज करता है तो सार्वजनिक तौर पर कोई विवाद न हो.

सियाम बांग्लादेश के मौजूदा विदेश सचिव हैं और विदेश मंत्रालय के सबसे वरिष्ठ करियर राजनयिकों में से एक हैं. पिछले साल मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार ने उन्हें इस पद पर नियुक्त किया था. विदेश सचिव बनने से पहले सियाम अमेरिका में बांग्लादेश के राजदूत रह चुके हैं.

सियाम की नियुक्ति को मंजूरी देने की प्रक्रिया में यह देरी ऐसे समय हो रही है जब भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्ते अब भी ठंडे बने हुए हैं. बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की नई दिल्ली यात्रा अगस्त में आखिरी समय पर रद्द कर दी गई थी.

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री ने सप्ताहांत में नई दिल्ली में हुए BRICS नेताओं के शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा नहीं लिया, जबकि उन्हें बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल (BIMSTEC) के अध्यक्ष के तौर पर आमंत्रित किया गया था. यह भारत की क्षेत्रीय संगठनों तक पहुंच बढ़ाने की कोशिश का हिस्सा था.

ढाका ने कोई प्रतिनिधि भी नहीं भेजा. मौजूदा समय में भारत में हाई कमिश्नर की भूमिका निभा रहे हमीदुल्लाह भी शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं हुए.

राजनीतिक तनाव के बावजूद, नई दिल्ली और ढाका ने रिश्तों को आगे बढ़ाने की कोशिश में अलग-अलग माध्यमों से बातचीत जारी रखी है. पिछले हफ्ते ढाका में दो दिन की अंतर-सरकारी रेलवे बैठक (IGRM) हुई. IGRM में दोनों देशों के रेलवे अधिकारी और संबंधित मंत्रालयों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं. इसमें सीमा पार चलने वाली ट्रेनों के संचालन पर चर्चा की जाती है.

पिछले सात महीनों में दोनों पक्षों ने अलग-अलग विशेषज्ञ समूहों और तकनीकी माध्यमों के साथ फिर से बातचीत शुरू की है. यह सिलसिला तब से जारी है, जब रहमान ने ढाका में सत्ता संभाली थी. हालांकि, राजनीतिक खटास का असर दोनों देशों के रिश्तों की कुल स्थिति पर अब भी पड़ रहा है.

भारत ने पिछले महीने रहमान को दो बार आमंत्रित किया. एक बार राजकीय यात्रा के लिए और दूसरी बार BRICS शिखर सम्मेलन में BIMSTEC का प्रतिनिधित्व करने के लिए. दोनों ही मामलों में यात्राएं नहीं हो सकीं.

राजकीय यात्रा में 5 अगस्त को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की ओर से की गई प्रेस ब्रीफिंग के कारण मुश्किलें आईं. हसीना को अगस्त 2024 में सत्ता से हटा दिया गया था और वह नई दिल्ली चली गई थीं, जहां वह अब भी हैं.

दोनों देशों ने बातचीत के लिए जगह बनाने और राजनयिक तरीके से संपर्क बनाए रखने के रास्ते तलाशे हैं. भारत ने इस साल की शुरुआत में राजनेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में अपना हाई कमिश्नर नियुक्त किया. त्रिवेदी ने जून के अंत में अपना पद संभाला.

भारत की व्यवस्था में उनके पद को कैबिनेट रैंक का दर्जा दिया गया, ताकि यह दिखाया जा सके कि नई दिल्ली बांग्लादेश के साथ अपने रिश्तों को कितनी गंभीरता से ले रहा है. हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद दोनों पड़ोसी देशों के रिश्ते बहुत खराब हो गए थे.

नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने अगस्त 2024 से फरवरी 2026 तक बांग्लादेश का नेतृत्व किया. उनके कार्यकाल में रिश्ते मुश्किल दौर से गुजरे, क्योंकि ढाका ने चीन और पाकिस्तान की ओर अपने संबंध बढ़ाने की कोशिश की.

रहमान के कार्यकाल में रिश्तों में कुछ सकारात्मक सुधार देखने को मिला था, लेकिन पिछले एक महीने में यह गति फिर कम हो गई है. नई दिल्ली को उम्मीद थी कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री अब तक भारत का दौरा कर चुके होंगे, लेकिन जब भी दोनों देश किसी समझौते के करीब पहुंचे, कोई न कोई मुद्दा सामने आ गया.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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