scorecardresearch
Saturday, 22 August, 2026
होमविदेशविरोध के डर के बीच, मुनीर को नई शक्तियां मिलने के बाद रावलपिंडी में ज्यादा सैनिक तैनात किए गए

विरोध के डर के बीच, मुनीर को नई शक्तियां मिलने के बाद रावलपिंडी में ज्यादा सैनिक तैनात किए गए

नए डिफेंस एक्ट से आसिम मुनीर को बड़ी शक्तियां मिलने के कुछ दिनों बाद पाकिस्तान ने सुरक्षा खतरे और ‘अप्रिय स्थिति’ के डर का हवाला देते हुए रावलपिंडी में छह महीने के लिए सेना की तीन कंपनियां तैनात की हैं.

Text Size:

नई दिल्ली: नए डिफेंस एक्ट से आसिम मुनीर को सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा पर बड़ी शक्तियां मिलने के दो दिन बाद पाकिस्तान के फील्ड मार्शल ने रावलपिंडी में सुरक्षा बढ़ा दी है. रावलपिंडी में सेना का जनरल हेडक्वार्टर स्थित है. यह कदम संभावित विद्रोह या विरोध की आशंका के बीच उठाया गया है.

पाकिस्तान की संघीय सरकार ने शनिवार को रावलपिंडी में छह महीने के लिए पाकिस्तान सेना की तीन कंपनियों की तैनाती को मंजूरी दी. इसके लिए आधिकारिक तौर पर “संवेदनशील सुरक्षा ड्यूटी” और “अप्रिय स्थिति” को रोकने और “अचानक सामने आने वाले खतरों” से निपटने की जरूरत का हवाला दिया गया.

पाकिस्तान के नए डिफेंस फोर्सेज एक्ट ने चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज असीम मुनीर को सशस्त्र बलों पर बड़ी शक्तियां दी हैं. इनमें सैन्यकर्मियों को रिटायर करने, सेवा से हटाने, सेवा में बनाए रखने या उनकी सेवा बढ़ाने की शक्ति शामिल है. अब वह सेना की कमान संभालते हैं, नौसेना और वायुसेना पर ऑपरेशनल अधिकार रखते हैं और रक्षा व राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में प्रधानमंत्री के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार के तौर पर काम करते हैं.

गृह मंत्रालय की ओर से 21 अगस्त को जारी यह आदेश पाकिस्तान की नेशनल असेंबली द्वारा सेना प्रमुख के अधिकार बढ़ाने वाला कानून पारित किए जाने के दो दिन बाद आया है.

सरकार ने कहा कि यह तैनाती पंजाब के गृह विभाग के अनुरोध के बाद की गई है और इसे संविधान के अनुच्छेद 245 के तहत मंजूरी दी गई है. यह अनुच्छेद सशस्त्र बलों को नागरिक प्रशासन की मदद करने की अनुमति देता है.

आदेश में कहा गया, “पंजाब के गृह विभाग की ओर से किए गए अनुरोध के तहत…” सरकार ने रावलपिंडी में छह महीने के लिए “संवेदनशील सुरक्षा ड्यूटी” के लिए सेना की तीन कंपनियों को तत्काल प्रभाव से तैनात करने की मंजूरी दी है.

लेकिन इस तैनाती के समय को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या इसका मकसद सिर्फ सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करना है.

रावलपिंडी में ही अदियाला जेल भी है, जहां पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान बंद हैं. इमरान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने 27 सितंबर को इस्लामाबाद की ओर मार्च निकालने की योजना का ऐलान किया है. पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट के इमरान को इलाज के लिए 16 सितंबर तक शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में रखने के आदेश के बावजूद उन्हें वापस जेल भेज दिया गया. 16 सितंबर उनकी सुनवाई की अगली तारीख है.

कुछ पाकिस्तानी विश्लेषकों ने इस तैनाती को इस संकेत के तौर पर देखा है कि सैन्य नेतृत्व को सशस्त्र बलों के अंदर असहमति की संभावना को लेकर चिंता है.

इमरान खान की सरकार में पूर्व जवाबदेही मंत्री मिर्जा शहजाद अकबर ने एक्स पर इस फैसले पर सवाल उठाया. उन्होंने लिखा, “रावलपिंडी जिले को छह महीने के लिए सेना को सौंप दिया गया, वजह पता नहीं! क्या कोई निजी डर से परेशान है?”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


यह भी पढ़ें: मुनीर का सत्ता हथियाने का खेल उनके डर की इंतिहा है, तानाशाही के साथ अक्सर भ्रम भी पनपता है


 

share & View comments