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Friday, 28 August, 2026
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सऊदी-तुर्की के बाद पाकिस्तान ने कुवैत के साथ रक्षा सहयोग समझौता किया, ‘साझा हितों’ पर बनी सहमति

2023 के समझौते को आगे बढ़ाते हुए, इस नई डील का मकसद दोनों देशों की सेनाओं के बीच बेहतर ऑपरेशनल तालमेल, मिलिट्री जानकारी का आदान-प्रदान और ज़्यादा करीबी तालमेल बनाना है.

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नई दिल्ली: कुवैत और पाकिस्तान ने गुरुवार को एक नए रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसका मकसद सैन्य और रक्षा सहयोग को बढ़ाना है. यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच खाड़ी देशों ने अपनी रक्षा प्राथमिकताओं पर फिर से विचार करना शुरू किया है.

यह समझौता इस्लामाबाद में कुवैत के रक्षा मंत्री शेख अब्दुल्ला अली अब्दुल्ला अल-सलेम अल-सबा के दौरे के दौरान हुआ. उन्होंने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ से मुलाकात की. दोनों मंत्रियों ने सैन्य सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ क्षेत्रीय घटनाक्रम और सुरक्षा व स्थिरता को बढ़ावा देने के प्रयासों पर चर्चा की, कुवैत सेना के एक बयान में कहा गया.

कुवैत और पाकिस्तान के बीच कई दशकों से सैन्य संबंध हैं. इनमें ट्रेनिंग, पेशेवर आदान-प्रदान और सैन्य अभ्यास में सहयोग शामिल है. यह नया समझौता जून 2023 में कुवैत सिटी में हुए रक्षा सहयोग समझौते पर आधारित है. उस पुराने समझौते ने दोनों देशों के रक्षा संस्थानों के बीच सहयोग के लिए एक औपचारिक ढांचा तैयार किया था. इसमें सैन्य शिक्षा और ट्रेनिंग, खुफिया सहयोग, लॉजिस्टिक्स, रक्षा तकनीक, वैज्ञानिक रिसर्च और विशेषज्ञता के आदान-प्रदान को शामिल किया गया था.

एक बयान में नए समझौते को “दोनों देशों के बीच रक्षा और सैन्य सहयोग में एक महत्वपूर्ण कदम” बताया गया. इसमें सैन्य अभियानों के बीच बेहतर तालमेल, सैन्य विशेषज्ञता का आदान-प्रदान और दोनों देशों की सेनाओं के बीच ज्यादा करीबी सहयोग का प्रावधान है. इसका मकसद दोनों देशों के साझा हितों को आगे बढ़ाना और क्षेत्रीय सुरक्षा में योगदान देना बताया गया है.

“नए समझौते के तहत पाकिस्तान की सशस्त्र सेनाएं ट्रेनिंग, क्षमता बढ़ाने, सीमा प्रबंधन और रक्षा सहयोग के अन्य आपसी सहमति वाले क्षेत्रों सहित कई क्षेत्रों में कुवैत की सशस्त्र सेनाओं को मदद देंगी,” पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय के एक बयान में कहा गया.

यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब कुवैत को खाड़ी क्षेत्र में ज्यादा अनिश्चित सुरक्षा माहौल का सामना करना पड़ रहा है. हाल में क्षेत्र में बढ़े तनाव के दौरान कुवैत उन खाड़ी देशों में शामिल रहा है, जिन्हें ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा. तेहरान ने कहा है कि ऐसे हमलों का निशाना खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने रहे हैं, जबकि कुवैत के अधिकारियों ने कहा है कि उनकी वायु रक्षा प्रणाली ने देश के हवाई क्षेत्र में दाखिल हुए प्रोजेक्टाइल को रोक दिया.

इस समझौते में रक्षा उत्पादन, इलेक्ट्रॉनिक संचार और सैन्य सांस्कृतिक गतिविधियों में सहयोग पर भी बात की गई. इस व्यवस्था की निगरानी के लिए एक संयुक्त सैन्य समिति बनाई गई. इसमें सैन्य अभ्यास, आधिकारिक दौरों और दूसरे कार्यक्रमों के बीच तालमेल शामिल है.

कुवैत ने जुलाई 2026 में कुवैत की आधिकारिक सरकारी पत्रिका कुवैत अल-यौम में प्रकाशित एक डिक्री-लॉ के जरिए 2023 के समझौते को औपचारिक रूप से मंजूरी दी. इस समझौते को शुरुआती पांच साल की अवधि के लिए मंजूरी दी गई और अगर कोई भी पक्ष इसे खत्म करने का फैसला नहीं करता है तो यह अपने आप आगे बढ़ता रहेगा.

हालांकि, इस समझौते का मतलब ऐसा आपसी रक्षा वादा नहीं था, जिसके तहत हमले की स्थिति में किसी भी देश को अपने आप सैनिक भेजने पड़ते. इसके बजाय, इसने करीबी सैन्य सहयोग के लिए संस्थागत व्यवस्था तैयार की. इसमें गोपनीय रक्षा जानकारी की सुरक्षा और राजनयिक माध्यमों से विवादों को सुलझाना शामिल था.

हालांकि, हाल के घटनाक्रमों के बीच ऐसी चर्चा भी हो रही है कि दोनों देशों के संबंध ट्रेनिंग और संस्थागत सहयोग से आगे बढ़ सकते हैं.

पिछले महीने की रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान कुवैत के साथ ऊर्जा सहयोग और निवेश के बदले संभावित रूप से एक बड़े रक्षा समझौते पर बातचीत कर रहा था.

उस समय कुवैत ऐसे सुरक्षा इंतजाम चाहता था, जो कुछ हद तक सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान के बढ़े हुए रक्षा संबंधों जैसे हो सकते हैं. चर्चा में कथित तौर पर पाकिस्तानी सैनिकों, लड़ाकू विमानों, ड्रोन, एयर-डिफेंस सिस्टम और अन्य सैन्य सुविधाओं की संभावित तैनाती शामिल थी.

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच कुवैत पहले से ही अपनी रक्षा मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र को एक बार फिर सुरक्षा जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है. वहीं, पाकिस्तान अमीर खाड़ी देशों के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करना चाहता है. उसने इसी महीने सऊदी अरब और तुर्की के साथ मक्का समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. कुवैत के इन तीनों देशों के साथ लंबे समय से व्यापारिक संबंध हैं.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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