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Friday, 28 August, 2026
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राजू दास: जिसने टीवी पर कांग्रेस नेता को गाली दी, कभी खुर्शीद का ‘सिर’ काटने पर इनाम रखा था

दास पहले भी कई विवादों के केंद्र में रहे हैं. 2022 में, उन्होंने फिल्म 'पठान' में दीपिका पादुकोण के 'भगवा' कपड़ों पर आपत्ति जताई थी और सिनेमाघरों में आग लगाने की धमकी दी थी.

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लखनऊ: सोशल मीडिया पर एक वीडियो क्लिप वायरल हो रही है, जिसमें दूरदर्शन की एक डिबेट के दौरान अयोध्या के पुजारी राजू दास को उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता कुंवर निषाद के साथ तीखी बहस के दौरान गाली देते हुए देखा जा सकता है. यह बहस उन आरोपों को लेकर हो रही थी, जिनमें कहा गया था कि यूपी कांग्रेस प्रमुख अजय राय अयोध्या में एक ऐसे कार्यक्रम में शामिल हुए थे, जहां मछली परोसी गई थी.

जब दास बार-बार निषाद की बात काट रहे थे, तो कांग्रेस प्रवक्ता ने उन्हें चुप रहने के लिए रूखे तरीके से कहा और कैमरे पर जूता दिखाया.

भगवा कपड़े पहने दास इस पर भड़क गए और कांग्रेस प्रवक्ता को गालियां देने लगे. इसके बाद उन्होंने उनसे कहा, “इतना जूता मारूंगा….”

दूरदर्शन के एंकर ने पुजारी से बार-बार “मर्यादा बनाए रखने” की अपील की, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई.

यह पहली बार नहीं है जब दास विवादों में आए हैं. उनका विवादित बयान देने का पुराना रिकॉर्ड रहा है. वह पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य और कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद से लेकर अभिनेत्री स्वरा भास्कर और दीपिका पादुकोण तक, कई लोगों को निशाना बनाकर बयान दे चुके हैं.

2024 के लोकसभा चुनाव में अयोध्या में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की हार के लिए उन्होंने प्रशासन को भी जिम्मेदार ठहराया था. इसके बाद उनकी सुरक्षा हटा दी गई थी.

43 साल के दास ने कभी आधिकारिक तौर पर बीजेपी जॉइन नहीं की है, लेकिन उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव में चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी. हालांकि, बीजेपी ने उन्हें टिकट नहीं दिया. वह अक्सर विपक्षी दलों के नेताओं को अपने बयानों से निशाना बनाते रहे हैं.

दिप्रिंट ने राजू दास से इस मामले पर प्रतिक्रिया लेने के लिए संपर्क किया, लेकिन अभी तक उनका जवाब नहीं मिला है. जवाब मिलने पर इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा.

हनुमान गढ़ी से जुड़े हुए

मूल रूप से बिहार के रहने वाले दास पिछले कई सालों से अयोध्या में रह रहे हैं और लंबे समय से हनुमान गढ़ी मंदिर से जुड़े हुए हैं. उनका कहना है कि वह सितंबर 2000 से मंदिर से जुड़े हुए हैं.

वह खुद को फैजाबाद के साकेत महाविद्यालय से कानून की पढ़ाई करने वाला बताते हैं. उन्होंने 2011 में कानून की डिग्री पूरी की थी.

अयोध्या बीजेपी से जुड़े नेताओं का कहना है कि दास खुद को एबीवीपी से जुड़ा हुआ बताते हैं, लेकिन उन्होंने संगठन में कभी कोई आधिकारिक पद नहीं संभाला.

वह साकेत महाविद्यालय में छात्र राजनीति में एक सामान्य कार्यकर्ता के तौर पर सक्रिय थे. वह हनुमान गढ़ी के वरिष्ठ संतों के शिष्य भी रहे हैं. स्थानीय नेताओं का कहना है कि इसी वजह से वे शहर में जाने-पहचाने जाते हैं.

दास कई बार अयोध्या से चुनाव लड़ने के लिए टिकट मांग चुके हैं. इसमें 2022 का विधानसभा चुनाव, मेयर का चुनाव और 2024 का लोकसभा चुनाव शामिल है. हालांकि, उन्हें किसी भी चुनाव में टिकट नहीं दिया गया.

हनुमानगढ़ी मंदिर का प्रबंधन चार ‘पट्टियों’ यानी हिस्सों में बंटा हुआ है. इनमें से एक बसंतिया पट्टी है. इसके महंत संत राम दास हैं, जो राजू दास के गुरु भी हैं. दास हनुमान गढ़ी प्रबंधन के एक हिस्से से जुड़े पुजारी हैं.

“राजू दास हनुमान गढ़ी के पुजारी हैं, महंत नहीं. महंत गद्दी पर बैठते हैं और उनका पद काफी बड़ा होता है. महंत आमतौर पर बयान नहीं देते और विवादित बातें नहीं कहते,” मंदिर प्रबंधन से जुड़े एक पदाधिकारी ने दिप्रिंट को बताया.

“कई पुजारी हैं और राजू दास उनमें से एक हैं. उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं भी काफी हैं. इसी वजह से वह टीवी डिबेट में खुद को अयोध्या के बड़े संत के तौर पर पेश करते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है,” पदाधिकारी ने कहा.

दास के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर उनकी कवर फोटो में वह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ खड़े दिखाई देते हैं, जबकि उनकी प्रोफाइल फोटो में वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ हैं. उन्हें अयोध्या में कई कार्यक्रमों के दौरान बीजेपी नेताओं और मंत्रियों के आसपास भी देखा गया है.

पुराने विवाद

दास पहली बार 2022 में चर्चा में आए थे. उस समय उन्होंने शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण की फिल्म पठान के गाने “बेशर्म रंग” पर आपत्ति जताई थी और सिनेमाघरों में आग लगाने की बात कही थी.

उन्होंने दीपिका पादुकोण के कुछ दृश्यों पर भी आपत्ति जताई थी. उनका आरोप था कि उन्हें भगवा रंग के कपड़े पहने हुए दिखाया गया है.

उन्होंने दावा किया था कि भगवा रंग, जिसे लेकर उनका आरोप था कि फिल्म के मुख्य किरदार शाहरुख खान ने नफरत दिखाई है, ऐतिहासिक रूप से देश की आत्मा और पहचान का प्रतीक रहा है.

2023 में भी वह विवाद में फंस गए थे, जब लखनऊ में एक निजी टीवी चैनल के कार्यक्रम में उस समय के समाजवादी पार्टी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के समर्थकों और दास के बीच आमना-सामना हो गया था. यह विवाद कथित तौर पर हाथापाई तक पहुंच गया था.

रामचरितमानस को लेकर चल रहे विवाद के दौरान मौर्य ने इसकी कुछ चौपाइयों पर आपत्ति जताई थी. उनका दावा था कि इनमें आपत्तिजनक भाषा और जाति से जुड़े अपमानजनक शब्द थे. उन्होंने मौर्य का सिर काटने वाले को 21 लाख रुपये का इनाम देने का ऐलान किया था.

यह पहली बार नहीं था जब उन्होंने किसी राजनीतिक नेता की हत्या से जुड़ा इनाम घोषित किया था. इससे पहले 2023 में ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से की थी. इसके बाद दास ने खुर्शीद की हत्या के लिए 21 करोड़ रुपये के इनाम का ऐलान किया था.

दास ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि संत खुर्शीद का सिर काटने वाले को 21 करोड़ रुपये देंगे.

दास ने अभिनेता स्वरा भास्कर और नेता फहद अहमद की शादी को लेकर भी विवादित बयान दिया था. उन्होंने आरोप लगाया था कि भास्कर ने ऐसे समुदाय में शादी की है, जहां महिलाओं को बार-बार तलाक और दोबारा शादी जैसी प्रथाओं का सामना करना पड़ता है.

उन्होंने समलैंगिकता को भी “गलत” बताया है. 2023 में दिए एक बयान में उन्होंने कहा था कि समलैंगिकता सनातन धर्म के लिए खतरा है.

अगस्त 2023 में समाजवादी पार्टी की महिला शाखा ने अयोध्या में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. आरोप था कि उन्होंने महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक बातें कही थीं.

यह शिकायत एक वीडियो को लेकर थी, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर “जीजा-साली” के रिश्ते को लेकर टिप्पणी की थी. हालांकि, दास ने दावा किया था कि वीडियो को एडिट किया गया था और उसे संदर्भ से हटाकर पेश किया गया था.

जब प्रशासन ने उनकी सुरक्षा हटा दी

2024 के लोकसभा चुनाव के बाद दास की सुरक्षा हटाए जाने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था.

बीजेपी के नेताओं के मुताबिक, दास चुनाव नतीजों पर अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए उस समय अयोध्या के प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही से मिलने गए थे. अयोध्या के जिलाधिकारी नीतीश कुमार भी उस समय वहां मौजूद थे.

दास ने कथित तौर पर चुनाव में बीजेपी की हार को लेकर प्रशासन की आलोचना की और नतीजे के लिए अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया. उनकी बातों से जिलाधिकारी कथित तौर पर नाराज हो गए और उन्होंने उनके साथ बैठने से इनकार कर दिया. इसके बाद दोनों के बीच तीखी बहस हुई और फिर दास की सुरक्षा में तैनात जवानों को हटा लिया गया.

उस समय के जिलाधिकारी नीतीश कुमार ने कहा था कि दास का आपराधिक रिकॉर्ड है और उनके खिलाफ 2013, 2017 और 2023 में मामले दर्ज किए गए थे. डीएम ने आरोप लगाया था कि दास ने अयोध्या के लोगों और प्रशासन को गालियां दी थीं और ऐसा माहौल बना रहे थे जैसे वह सुरक्षा पाने के हकदार हों. उन्होंने कहा था कि सुरक्षा हटाने की यह भी एक वजह थी.

सूत्रों ने दावा किया था कि बीजेपी के अयोध्या चुनाव प्रदर्शन की समीक्षा बैठक के दौरान देर रात विवाद हुआ था. जिलाधिकारी और दास के बीच यह तीखी बहस उत्तर प्रदेश सरकार के दो कैबिनेट मंत्रियों, सूर्य प्रताप शाही और जयवीर सिंह की मौजूदगी में हुई थी.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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