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Sunday, 14 June, 2026
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भारत के बाद चीन पहुंचे नेपाल के विदेश मंत्री, दोनों देशों के रिश्तों को रीसेट करने पर होगा फोकस

उम्मीद है कि वे चीनी नेतृत्व के सामने RSP सरकार की चीन नीति की रूपरेखा पेश करेंगे. पिछले साल आम चुनावों में RSP की जीत ने नेपाल में कम्युनिस्ट पार्टियों के दबदबे को खत्म कर दिया.

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नई दिल्ली: नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल रविवार को चीन पहुंचे, जहां वह चीन के शीर्ष अधिकारियों के साथ बातचीत करेंगे. इस दौरे को दोनों देशों के रिश्तों में नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है. इसकी वजह इस साल की शुरुआत में हिमालयी देश में आरएसपी की बड़ी जीत है.

खनाल का यह चार दिन का दौरा भारत की यात्रा के एक हफ्ते बाद हो रहा है. मार्च में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) की सरकार बनने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा थी. आरएसपी सरकार के सत्ता में आने के साथ नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टियों के एक दशक से ज्यादा लंबे शासन का अंत हो गया.

अपने दौरे के दौरान खनाल अपने चीनी समकक्ष वांग यी से बातचीत करेंगे और चीन के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करेंगे. दोनों देशों के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी.

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने शुक्रवार को मीडिया से कहा, “चीन, चीन-नेपाल संबंधों को बहुत महत्व देता है. हम इस यात्रा को एक अवसर के रूप में लेते हुए नेपाल की नई सरकार के साथ राजनीतिक आपसी विश्वास बढ़ाने, व्यावहारिक सहयोग को गहरा करने, उच्च गुणवत्ता वाले बेल्ट एंड रोड सहयोग को आगे बढ़ाने और चीन-नेपाल रणनीतिक सहयोग साझेदारी में और ज्यादा प्रगति करने के लिए काम करेंगे.”

खनाल की यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वह चीनी नेतृत्व के सामने आरएसपी सरकार की चीन नीति का खाका पेश कर सकते हैं.

जनरेशन-ज़ेड के विरोध प्रदर्शनों के बाद आरएसपी ने संसदीय चुनावों में बड़ी जीत हासिल की थी. इन प्रदर्शनों के कारण के. पी. शर्मा ओली के नेतृत्व वाली चीन समर्थक सरकार गिर गई थी.

आम चुनावों में आरएसपी की जीत के साथ ही ओली के नेतृत्व वाली नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) और पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड के नेतृत्व वाली नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी केंद्र) के वर्चस्व का भी अंत हो गया.

2008 में नेपाल में राजशाही खत्म होने के बाद इन दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों को राजनीतिक महत्व मिला था. उन्होंने नेपाल को भारत से दूर और चीन के ज्यादा करीब ले जाने की कोशिश की.

प्रचंड और ओली, जो 2008 के बाद तीन-तीन बार प्रधानमंत्री बने, दोनों ही चीन के साथ राजनीतिक और आर्थिक संबंध मजबूत करने के पक्षधर रहे. उन्होंने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव जैसे कदमों के जरिए नेपाल में चीन का प्रभाव बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई.

बीजिंग रवाना होने से पहले खनाल ने कहा कि चीनी नेतृत्व के साथ उनकी बातचीत का मुख्य उद्देश्य आरएसपी सरकार की विदेश नीति को लेकर बनी गलत धारणाओं को दूर करना होगा.

द काठमांडू पोस्ट अखबार ने रविवार को खनाल के हवाले से कहा, “मेरी यात्रा का उद्देश्य ऐसी धारणाओं को दूर करना, विश्वास और भरोसा बनाना और नई सरकार की प्राथमिकताओं पर चर्चा करना है, ताकि हम अलग-अलग क्षेत्रों में ठोस प्रगति कर सकें.”

चीनी अधिकारियों से बातचीत के अलावा खनाल बीजिंग में नेपाल दूतावास द्वारा आयोजित निवेश सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे. इसका उद्देश्य नेपाल में विदेशी निवेश को बढ़ावा देना है. वह चीनी कारोबारी समुदाय से भी बातचीत करेंगे और नेपाल दूतावास में उनके सम्मान में आयोजित स्वागत समारोह में भी शामिल होंगे.

इससे पहले खनाल ने 5 से 7 जून के बीच दिल्ली का दौरा किया था, जहां उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बातचीत की. बातचीत के बाद खनाल ने कहा कि नेपाल, भारत के साथ अपने रिश्ते को “सबसे ज्यादा प्राथमिकता” देता है और नई दिल्ली के साथ “सार्थक और उद्देश्यपूर्ण” तरीके से जुड़ने के लिए तैयार है.

दिल्ली दौरे से पहले सत्तारूढ़ आरएसपी के अध्यक्ष रबी लामिछाने ने भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन नबीन के निमंत्रण पर पांच दिन की भारत यात्रा की थी और 3 जून को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी.


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