नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ऐलान किया कि जेनेरिक दवाओं पर अगले दो साल तक 0% टैरिफ रहेगा. इसके बाद एक साल के लिए 100% टैरिफ लगाया जाएगा और फिर 200% टैरिफ लागू होगा. इसका मकसद दवाओं का प्रोडक्शन फिर से अमेरिका में शुरू कराना है.
यह फैसला भारत के लिए अहम है, क्योंकि भारतीय दवा कंपनियां अमेरिका में जेनेरिक दवाओं की बड़ी सप्लायर हैं. फिलहाल भारतीय कंपनियों को कुछ राहत मिलेगी, लेकिन अगर उन्होंने अमेरिका में अपनी फैक्ट्री नहीं लगाई, तो आगे उन्हें ज्यादा लागत का सामना करना पड़ सकता है.
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर लिखा, “1 अगस्त 2026 से अमेरिका में आने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर अगले दो साल तक 0% टैरिफ रहेगा. इसके बाद एक साल के लिए 100% और फिर 200% टैरिफ लगाया जाएगा.”
उन्होंने कहा, “यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि जेनेरिक दवाओं का उत्पादन फिर से अमेरिका में हो. जो कंपनियां तय समय के अंदर अमेरिका में प्लांट और मशीनें नहीं लगाएंगी, उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी.”
ट्रंप ने यह भी कहा कि पेटेंट, ब्रांडेड और नई दवाओं पर मौजूदा नीति में कोई बदलाव नहीं होगा, क्योंकि वह सफल रही है.
अमेरिका, भारत से दवा निर्यात का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है.
पिछले वित्त वर्ष में भारत ने अमेरिका को 8.5 अरब डॉलर से ज्यादा की दवाएं निर्यात कीं, जिनमें ज्यादातर जेनेरिक दवाएं थीं. उससे पहले 2024-25 में भारत ने अमेरिका को 9.7 अरब डॉलर से ज्यादा की दवाएं निर्यात की थीं. यह जानकारी सरकारी आंकड़ों में दी गई है.
भारत के कुल दवा निर्यात का करीब एक-तिहाई हिस्सा सिर्फ अमेरिका जाता है.
पिछले वित्त वर्ष में भारत का कुल दवा निर्यात करीब 25 अरब डॉलर का था, जिसमें 34% हिस्सा अमेरिका का था. वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष में भारत से अमेरिका को होने वाले कुल सामान निर्यात में दवाओं की हिस्सेदारी करीब 10% थी.
अमेरिका की ओर से टैरिफ लगाए जाने की संभावना को देखते हुए कई भारतीय कंपनियां पहले से तैयारी कर रही थीं.
सन फार्मास्युटिकल्स ने इस साल अप्रैल में 11.75 अरब डॉलर में न्यू जर्सी की कंपनी ऑर्गेनॉन एंड कंपनी का अधिग्रहण करने के बाद अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने की योजना का ऐलान किया था.
इसके अलावा ऑरोबिंदो फार्मा, बायोकॉन ग्रुप, सिप्ला, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स, ग्रेन्यूल्स इंडिया, जुबिलेंट ग्रुप, ल्यूपिन, पिरामल फार्मा और ज़ाइडस लाइफसाइंसेज भी अमेरिका में निवेश की योजना का ऐलान कर चुकी हैं.
इस साल मई तक भारतीय दवा कंपनियों ने अमेरिका में 19.1 अरब डॉलर निवेश करने का वादा किया था.
भारत सरकार ने भी अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते पर बातचीत के दौरान ऐसे टैरिफ की संभावना को ध्यान में रखा था.
फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की बातचीत के बाद जारी भारत-अमेरिका संयुक्त बयान में कहा गया था कि अगर सेक्शन 232 जांच के बाद अमेरिका जेनेरिक दवाओं और उनके कच्चे माल पर टैरिफ में बदलाव करता है, तो भारत को इस पर बातचीत के जरिए तय नतीजे मिलेंगे.
सेक्शन 232 जांच 1962 के Trade Expansion Act के तहत की जाती है. इसमें यह देखा जाता है कि क्या किसी दूसरे देश से आने वाला आयात अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है.
अमेरिका ने अप्रैल में दवाओं पर नए टैरिफ का ऐलान किया था, जिन्हें कुछ मामलों में इसी महीने और कुछ मामलों में सितंबर से लागू किया जाना था.
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