नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) हरियाणा के हिसार में विरोध प्रदर्शन करने के एक दिन बाद कई जूनियर पहलवान, उनके माता-पिता और कोच गुरुवार को यहां भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के मुख्यालय पहुंचे और एशियाई खेलों के ट्रायल से विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया को दी गई छूट वापस लेने और निष्पक्ष ट्रायल कराने की मांग की।
उन्होंने साथ ही कहा कि जब तक यह छूट वापस नहीं ली जाती, तब तक वे मुख्यालय से नहीं हटेंगे।
रोहतक (छोटू राम अखाड़ा), नरेला (वीरेंद्र सिंह का सेंटर), हिसार (बाबा लाल दास अखाड़ा), दिल्ली (हनुमान अखाड़ा और छत्रसाल स्टेडियम) में ट्रेनिंग सेंटर के पहलवानों के साथ जूनियर पहलवानों के रिश्तेदार ओलंपिक भवन इकट्ठे हुए जिसमें कई वरिष्ठ नागरिक भी शामिल थे।
पहलवानों के परिजनों सहित लगभग 100 लोग आईओए महासचिव कल्याण चौबे से निष्पक्ष ट्रायल सुनिश्चित करने की मांग कर रहे थे।
आईओए अधिकारियों ने अपने साथियों के साथ एक दौर की बैठक के बाद विरोध कर रहे लोगों से मुलाकात की और उन्हें समर्थन देने का आश्वासन दिया।
पंघाल के पिता राम निवास ने पीटीआई से कहा, ‘‘मैं और मेरी पत्नी यहां हैं और अंतिम की दादी भी यहां है। योगेश्वर (दत्त) भी हमारा समर्थन कर रहे हैं। हमने कल्याण चौबे से मुलाकात की और स्पष्ट किया कि किसी को भी कोई छूट नहीं दी जानी चाहिए। जब तक यह छूट वापस नहीं ली जायेगी, हम इस जगह को नहीं छोड़ेंगे। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘चौबे ने हमें कहा कि अब यह मामला अदालत में है तो वे इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि वे फैसला करने की स्थिति में नहीं हैं। अगर अदालत आपके पक्ष में फैसला नहीं करती है तो आईओए एक बैठक करेगा और आपकी मदद की कोशिश करेगा। ’’
उदीयमान खिलाड़ी अंतिम पंघाल के कोच विकास भारद्वाज ने पीटीआई से कहा,‘‘ हम सभी आईओए के शीर्ष अधिकारियों से मिलना चाहते हैं। हम किसी भी तरह के पक्षपातपूर्ण फैसले को स्वीकार नहीं करेंगे। यह गलत है। हम यहां पैनल से यह आग्रह करने आए हैं कि वह बजरंग और विनेश को दी गई छूट वापस ले। ’’
मौजूदा अंडर-20 विश्व चैंपियन पंघाल और अंडर 23 एशियाई चैंपियन सुजीत कलकल ने तदर्थ समिति के फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे अनुचित और अन्यायपूर्ण करार दिया था और दावा किया था कि अगर ट्रायल्स में उनका मुकाबला बजरंग और विनेश से होता है तो वे उन्हें हराने में सक्षम हैं।
बाजवा की अगुवाई वाले आईओए के तदर्थ पैनल में मंगलवार को ट्रायल के मानदंड घोषित करते हुए कहा था कि सभी भार वर्गों में ट्रायल्स होंगे लेकिन उन्होंने पुरुषों के फ्रीस्टाइल 65 किग्रा और महिलाओं के 53 किग्रा भार वर्ग में पहले ही पहलवानों का चयन कर लिया है।
पंघाल और सुजीत ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर करके बजरंग और विनेश को दी गई छूट को वापस लेने के लिए आईओए को निर्देश देने की मांग की है।
जनवरी में जंतर-मंतर पर पहलवानों के विरोध पदर्शन का हिस्सा रहीं विश्व चैम्पियनशिप और राष्ट्रमंडल खेलों की रजत पदक वजेता अंशु मलिक ने जूनियर पहलवानों का समर्थन करते हुए ट्वीट किया, ‘‘एक एथलीट का सबसे बड़ा सपना ओलंपिक और एशियाई खेलों जैसे टूर्नामेंट में पदक जीतकर देशवासियों को गौरवान्वित करने का होता है। लेकिन अगर इन खिलाड़ियों के अधिकार ही छीन लिये जायें। ’’
महिलाओं की 57 किग्रा वर्ग में स्पर्धा करने वाली अंशु ने कहा, ‘‘जूनियर खिलाड़ियों द्वारा ट्रायल की मांग करना उचित है और यह उनका अधिकार है। मैं जूनियर खिलाड़ियों की मांग का समर्थन करती हूं। ’’
ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक ने कहा कि उसने एशियाई खेलों के ट्रायल से छूट की मांग कभी नहीं की थी हालांकि आईओए की तदर्थ समिति ने विनेश और बजरंग की तरह उन्हें भी इसकी पेशकश की थी ।
उन्होंने आरोप लगाया कि बजरंग और विनेश को ट्रायल से छूट देने की पेशकश सरकार द्वारा पहलवानों की एकता तोड़ने की कोशिश है ।
अमेरिका में अभ्यास कर रही साक्षी ने कहा ,‘‘ आप सभी को पता है कि हमने एशियाई खेलों की तैयारी के लिये सरकार से अतिरिक्त समय मांगा था । हमने ट्रायल दस अगस्त के बाद कराने का अनुरोध किया था । सरकार ने हमें समय भी दिया जिसके बाद हम यहां अभ्यास के लिये आये ।’’
उन्होंने कहा ,‘‘ पिछले तीन चार दिन में पता चला कि दो भारवर्गों में सीधे प्रवेश दिया जा रहा है ।’’
उन्होंने कहा ,‘‘ मुझे भी ईमेल करने के लिये कहा गया था ताकि मेरे नाम पर भी विचार हो लेकिन मैने मना कर दिया । मैं ट्रायल के बिना नहीं जाना चाहती । मैं किसी भी टूर्नामेंट में कभी ट्रायल के बिना नहीं गई और आगे भी नहीं जाऊंगी । हमने बस ट्रायल के लिये अतिरिक्त समय की मांग की थी ।’’
उन्होंने कहा ,‘‘ मैं इतना ही कहना चाहती हूं कि सभी को चयन का मौका मिलना चाहिये ।’’
भाषा नमिता मोना
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